आत्महत्या का अर्थ है -खुद की हत्या करना ?

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आत्महत्या

आत्महत्या-खुद की हत्या करना ?

बहुत दिन से मैं सोच रहा था की इस टॉपिक पे लिखू लेकिन बार -बार ख्याल आता की सच में ये जानना जरुरी है या ये समझना जरुरी है | लेकिन हाल ही कई ऐसे वाकये हुए की मुझे लगा की लिखना चाहिए | समाज ऐसा है की कई लोग आत्महत्या करने को मजबूर हो जाते है या किये जाते है | सबसे पहले हमे यहाँ ये समझना है की आत्महत्या है क्या और लोग क्यों इतने मजबूर हो जाते है की आत्महत्या कर लेते है |

सफलता और असफलता तो जीवन के संघर्ष को ही दर्शाती है | फिर क्यों हार जाना लेकिन गलती यही हो जाती है जो भी व्यक्ति ये  कदम उठाते है क्या वो ये सोच लेते है की सबसे जयदा वो दुखी है इस संसार में या अब उनका कोई सहारा नहीं है |लेकिन ये बात विचारणीय है की क्यों जब भी आप संघर्षो से ऊपर जाते हो और अपनी सफलता के चोटी पे रहते हो तो आप उसका जश्न मनाते हो | लेकिन आप इस जगह पे संघर्षो से पहुंचे हो | फिर वही जब विफल होते हो क्यों इतने टूट जाते हो |की खुद को खतम करने के बारे में सोचते हो | ऐसा क्यों है क्या ये आपके आस -पास के लोगों में सवांद की कमी है लेकिन जिससे आप हर पल घिरे रहते हो |

समाज में परिवर्तन होता रहता है

क्योकि संसार में परिवर्तन एक नियम की तरह है | हो सकता बहुत लोग हो जो आपसे कठिन परिस्थति में होकर भी ये कदम नहीं उठाते है | क्या ये एक मानसिक कमजोरी है या कुछ और क्योकि समाज वही था जगह वही थी सब कुछ वही था बदला तो परिस्थति थी | खुद की हत्या करना या कोशिश करना भी अपराध की  श्रेणी में आता है | क्योकि जीवन का बहुत मूल्य है और आप उसे ऐसे जाया नहीं कर सकते | अगर आप आत्महत्या करने की कोशिश करते है तो भारतीय कानून में आपको १ साल की क़ैद या हर्जाना लग सकता है | सोचने वाली बात है की आपको ये कानून भी आपको इसकी इजाजत नहीं देता है |इंडियन पैनल कोड ३०९ के अंतर्गत ये आता है |

आत्महत्या के कारण जानना जरुरी है ?-

लेकिन हमे आत्महत्या के अंदर का कारन जानना बहुत ही जरुरी है | क्योकि ये आत्महत्या हत्या तो नहीं है |आप इस बात को समझिये -की कोई भी इंसान मरने को क्यों सोचता है वो भी खुद से -क्या वो हारा हुआ इंसान है| या क्या वो सब कुछ खो चूका है या वो बहुत ही निर्बल है या वो इज्जत के बरम को अपने कंधो पे ढो नहीं पा रहा है| या उसको कोई दर्द है और वो किसी से कह नहीं पा रहा है | देखिये लोग अक्सर कहते है जो भी आत्महत्या करता है वो बहुत कमजोर होता है अंदर से -लेकिन इसका दूसरा भी पहलु है की आत्महत्या करने के लिए या अपनी कलाई खुद काटने के लिए भी बहुत हिम्मत चाहिए |

आत्महत्या न करे-

मेरा मानना है की आप लोग या सभी लोगो से जो हमे पड़ते है की – हम जिस सोसाइटी में रहते है | जहा हम काम करते है -जहाँ हम खेलते है -जहा हम पड़ते है वह पर हर इंसान से बात करे उनसे दोस्ती करे और उनके मन की बातें को सुने -समझे -उनकी हर तरह से मदद करे -उनके सपोर्ट करे -सपोर्ट हर तरह से आर्थिक रूप से और सामाजिक रूप से और मानसिक रूप से भी | क्योकि हमारे फेसबुक और इंस्टाग्राम पे दोस्त और फोलवेर बहुत जयदा होते लेकिन हम अपनी दिल की बात कहने के लिए एक अदद दोस्त की तलाश रहती है |इसलिए दिखावे और ढोंग से बचे | खुद में परिवर्तन लाये जिससे ये जिंदगी के संघर्षों से लड़ने का जज़्बा खुद में आये और समाज की मनोदशा को समझ पाए |

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