आरसीईपी( RCEP ) आखिर है क्या ? भारत क्यों हटा इस समझौतों से है –

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आरसीईपी

आरसीईपी( RCEP ) आखिर है क्या ? भारत क्यों हटा इस समझौतों से है |

सबसे पहले समझते है आरसीईपी क्या है -इसका अर्थ है – RCEP – रीजनल कम्प्रेहैन्सिव इकनोमिक पार्टनशिप- ये एक तरह का व्यपार समझोता था | जो इसके सदस्य देशों के लिए एक-दूसरे के साथ व्यापार करने को आसान बनाता है| ये एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होता है जो देशों के बीच होता है | इससमझौतों  का लक्ष्य रहता है की १० एशियाई देश और जैसे – भारत , चीन , जापान , ऑस्ट्रेलिया , साउथ कोरिया , न्यूज़ीलैंड  जीरो कस्टम ड्यूटी जोन बनाना है |

इसमें पुरे  भारत को छोड़ के १५ देश शामिल है | इसका सीधा साधा मतलब ये था | अभी जो भी चीज आयत करते है| उसपे टैक्स या कस्टम ड्यूटी लगती है | और जिससे हमे टैक्स मिलता ही है और हमारे खुद के उत्पाद जो बनते  है | जैसे छोटे -छोटे रोजगार उन लोग को फायदा मिल जाता है | अब हमारे यहाँ न्यूज़ीलैंड से दूध के पाउडर के आयात के चलते भारत का दूध का पूरा उद्योग ठप पड़ जाता  क्योकि कस्टम ड्यूटी नहीं रहती | और कम दामों में मिलती |

भारत क्यों हटा आरसीईपी से –

किसी भी दृष्टि से ये समझौता भारत के लिए सही नहीं था | क्योकि व्यापरिक दृस्टि से भी देखे इन देशों को हम निर्यात बहुत कम करते है | हमारे जनसंख्या ज्यादा होने की वजह से डिमांड भी अधिक है | किसानी-खेती की बात करें तो इस समझौते के बाद नारियल, काली मिर्च, रबर, गेहूं और तिलहन के दाम गिर जाने का खतरा था| छोटे व्यापारियों का धंधा चौपट होने का खतरा था| छोटे व्यापरियों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ता | सभी संगठन जो किसानो से जुड़े थे वो विरोध कर रहे थे |यहाँ तक राजनितिक पार्टी जो सत्ता में है उसके भी संगठन आरसीईपी का विरोध कर रहे थे | कांग्रेस भी यू -टर्न लेते हुए आरसीईपी का विरोध करने लगी थी |

आरसीईपी के समर्थन की दलीले –

कुछ लोग ये कह के आरसीईपी का समर्थन कर रहे है की और कई रहे थे इससे आयत -निर्यात बढ़ेगा | विनोद शर्मा – डायरेक्टर ऑफ़ deki  इलेक्ट्रॉनिक्स ने कहा की -इससे भारत के लिए चीन के बाजार का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग कर सकते थे | विनोद शर्मा रॉ मेट्रिअल चीन से आयत करते है | इनके नजरिये में भारत ने एक मौका गवा दिया है |और भारत और चीन व्यपारिक घाटा और बढ़ेगा | २०१७ -२०१८ साल में भारत ने चीन को माल निर्यात  १३.१ बिलियन डॉलर जबकि चीन से जो माल आयात किया है वो है ७३.३ बिलियन डॉलर इनका जो व्यापरिक डेफिसिट है वो है ६३ .१ बिलियन डॉलर है | चीन १८ वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन के मेंबर है | वो अपने डोमेस्टिक उत्पादक को कानून में बदलाव करके सब्सिडी दे रहा है |

RCEP

भारत के पास कोई विकल्प नहीं था | अभी वैसे ही भारत की इकॉनमी सुस्त चल रही है | आरसीईपी  से प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती और जो लोग पारिवारिक व्यपार चला रहे है उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता |आरसीईपी( rcep ) में मोल -भाव मई -२१०३ से ही हो रहा है |इसके लिए १३ मिनिस्टीरियल मीटिंग हो चुकी है |२४ मीटिंग एक्सपर्ट लेवल की हो चुकी है |

दूसरी तरफ़ भारत के उत्पादकों और किसानों की चिंता थी कि मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर भारत का अनुभव पहले ठीक नहीं रहा है और आरसीईपी में भारत जिन देशों के साथ शामिल होगा, उनसे भारत आयात अधिक करता है और निर्यात कम|  भारत को जितना फायदा होगा, उसे कहीं अधिक नुकसान हो जाएगा. इस वजह से भारत ने इस समझौते पर आगे बढ़ने से मना कर दिया होगा |

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