इंटरनेट की खोज किसने की –

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इंटरनेट

इंटरनेट क्या एक रहस्य है –

आज के दौर में सब काम इंटरनेट पर निर्भर होता जा रहा है |आपने कभी सोचा नहीं की गूगल पर कुछ भी टाइप करते ही उसके बारे में हमें पूरी जानकारी मिल जाती है |कोई भी वीडियो हम बड़ी सरलता से देख लेते है |पुराना हो या नया सब जानकारी बस एक क्लिक में हमे पता लग जाता है |

लेकिन इसके पीछे कारण क्या है या इसको खोजने वाले कौन लोग थे जो हमे जीवन के अलग फेज में ले गये|मुझे कई बार ये जानने की इच्छा हुई की इंटरनेट की गतिविधि कैसे होती है उसका समझा जाये |लेकिन उस समय कम संसाधन होने की वजह से हम इसे जान न सके |इंटरनेट की खोज भी एक क्रांति की तरह है क्योकि आप बस एक क्लिक से सेकंड से भी कम समय में पूरी दुनिया से जुड़ जाते है |आये आज आपको बताता हूँ आखिर इंटरनेट नाम की बला क्या चीज है |

इंटरनेट क्या वही है जितना हम देखते है –

हमारा मानना ये होता है की ब्राउज़र , यूआरलस ,वेबसाइट ,सर्च बार ये इंटरनेट है लेकिन ऐसा नहीं है | इन पूरी सुचना के पीछे का दिमाग जो आपके किसी वेबसाइट का टाइप करते है उससे पहले उनके प्रोटोकॉल और नियम को और किस पथ से जायेगा यही इंटरनेट है |साफ़ -साफ़ मतलब है की आप जब भी किसी वेबसाइट का वेब एड्रेस टाइप करते है |उसका ओपन होने के कई तरह के नियम -कानून होते है जिसको मानते हुए वो ओपन होता है यही पूरी प्रक्रिया ही इंटरनेट है |इस समय जो हम इंटरनेट प्रोटोकॉल प्रयोग में ला रहे है उसका पूरा श्रेय कंप्यूटर वैज्ञानिक विंटन सर्फ और बॉब कान को जाता है |

इंटरनेट की इस खोज से पहले लम्बी दूरी के कंप्यूटर को एक दूसरे से जोड़ने के लिए रिसर्चटीम स्टैनफोर्ड ने 1969 एक खोज की लेकिन वो सिस्टम शुरुआती दौर में ही असफल हो गया |इस रिसर्च टीम को उस समय के वैज्ञानिक लियोनार्ड क्लेंरोक नेतृत्व दे रहे थे |लेकिन इस प्रयोग को पैकेट स्विचिंग का पहला टेस्ट भी कह सकते है |ये एक डाटा को ट्रांसफर करने का सिस्टम था एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में |पैकेट स्विचिंग का सीधा से मतलब है की इस ट्रांसमिशन में सुचना के अलग छोटे -छोटे पैकेट के रूप एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक पहुंचाते है और वहाँ पहुंच वो एक साथ जोड़ लेते है |और ये प्रक्रिया इस समय भी चल रही है |

एक ईमेल के पीछे की पूरी कहानी –

आपको एक उदहारण को लेकर बताते है जैसे आप किसी को कोई मेल करते है तो आप कोई भी लेटर लिख कर उसके मेल एड्रेस पे सेंड कर देते है |और आपको तुरंत उसके पहुंचने का रिमाइंडर भी मिल जाता है |लेकिन ये प्रक्रिया जितनी आसान दिखती है उतनी है नहीं आपका ईमेल को पहले टुकड़ों में करते है फिर उसको अलग चैनल के जरिये उसके वेब एड्रेस को पहुचाये जाते है फिर वहाँ पर वो रिसंबल हो जाता है और रिसीवर वही पढ़ता है जो हमने भेजा है |यही पैकेट स्विचिंग भी है |

ट्रांसमिशन कण्ट्रोल प्रोटोकॉल और इंटरनेट प्रोटोकॉल(TCP /IP ) क्या है –

विंटन सर्फ और बॉब कान ने इन्ही डाटा ट्रांसफर या कहे पैकेट स्विचिंग के लिए एक पूरा सेट गाइडलाइन्स बनाया |1980 में बने इन सेट गाइडलाइन्स को ट्रांसमिशन कण्ट्रोल प्रोटोकॉल और इंटरनेट प्रोटोकॉल(TCP /IP ) कहा जाता है |डाटा को कैसे पैक करे उसके ट्रांसमिशन से पहले इसकी पूरी जिम्मेदारी ट्रांसमिशन कण्ट्रोल प्रोटोकॉल के तहत होती है |जब ये डाटा पैकेटों के रूप में चल देता है तो उसका जिम्मा इंटरनेट प्रोटोकॉल इसके मूवमेंट को नियंत्रित करता है |इसमें इसके प्रारम्भ बिंदु से अंतिम बिंदु तक नज़र रखता है |विज्ञानं का में कोई भी प्रयोग कहे तो असफल नहीं होता है क्योकि लियोनार्ड क्लेंरोक खोजने कुछ निकले थे लेकिन उन्होंने हमे ये बता दिया की दो कंप्यूटर को एक सिंगल नेटवर्क से जोड़ सकते है |विंटन सर्फ और बॉब कान TCP /IP दे कर एक बहुत बड़ा वेब कनेक्शन नेटवर्क दिया |

सड़क पर चलते हुए डाटा –

इससे पहले हम अलग तरह के प्रोटोकॉल प्रयोग कर रहे थे जैसे फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल और नेटवर्क कण्ट्रोल प्रोटोकॉल लेकिन स्पीड और तेज़ी के दौर में ट्रांसमिशन कण्ट्रोल प्रोटोकॉल और इंटरनेट प्रोटोकॉल की जरुरत थी |आप ये समझ सकते है जैसे हमारे सड़क पर चलने के एक नियम बने हुए है उसी तरह डाटा के चलने या कहे मूव करने के भी एक नियम बने | अगर हम सड़क पर चलने के नियम को नहीं मानते तो दुर्घटना होती है उसी तरह इसमें भी यही सम्भावनाये होती है |हमारा काम है की आपको एक अलग ही सुचना की दुनिया की सैर कराते रहे है |अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आये तो हमे पूरा समर्थन दे जिसे हमे आत्मबल मिले |

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