इमोशंस को आये देखते है विज्ञानं के नजरिये से –

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इमोशंस

इमोशंस कैसे पैदा होते है –

इमोशंस ( भावनाये) एक ऐसी चीज है जिससे हम अपनी भावनाओं को दर्शाते है लेकिन आप को ये जान कर आश्चर्य होगा की इमोशंस पैदा यूँ ही नहीं होता है उसका भी एक सामाजिक और वैज्ञानिक कारण है |जब कभी हम दुखी होते है तो उसके आंशुओं से व्यक्त करते है अगर गुस्सा हुए तो अपने आँखों से प्रदर्शित करते है |खुश होते है तो उसको हॅसते हुए प्रदर्शित करते है | सभी का जीवन तीन फेज से होकर गुज़रता है |

1 – बचपन (Infancy )

इमोशंस (2)

बचपन में जो भी भावनाये होती है वो निर्भरता से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है | आप इसको समझ सकते हो एक उदाहरण से मुस्कराना है जो दो तरह का होता है एक जिसमे आप किसी से जुड़ना या स्वस्थ संबध बनाना चाहते है इसे सोशल स्माइल कह सकते है | नवजातों पे अध्यन करने वालों ने बताया की नवजात ( छोटे बच्चे ) जब पैदा होता है उसकी स्माइल नवजात स्माइल है जबकि 6 वीक बाद वो सोशल स्माइल करता है |और 4 से 5 माह बाद बच्चा सेलेक्टिव स्माइल करता है अपने जानने वालों के चेहरे देखकर और अपने देखभाल करने वालों को सकरात्मक इमोशन की अदला -बदली करता है | साल के लास्ट 6 माह बच्चे मौलिक रूप से अपने दिमाग के अंदर मेमोरी बनाते है और उससे रेस्पॉन्ड करते है |और एक पर्टिकुलर इमोशंस देते है जो उस प्रसंग से संबधित हो |

2-Early childhood –

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डगमगा के चलने ( early childhood ) वाले बच्चे फिर धीरे -धीरे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते है |क्योकि उनकी दिमाग की फ्रंटल लोबेस ओर लिम्बिक सर्किट का जुड़ाव धीरे धीरे ही पूणता की ओर बढ़ रहा होता है |ओर वो खुद को उभार( पहचान ) रहे होते है |इसलिए ये ज्यादा आत्मनिर्भर और गुस्सा व्यक्त करने वाले होते है |इनके अंदर एंगर (गुस्सा ) उत्पन्य होता है क्योकि ये आत्मनिर्भरता( ऑटोनोमी ) की ओर संघर्ष करते रहते है |इस समय ही इनके अंदर किसी भी चीज को अलग करने और मोरल समझ बनती है |और अपने दूसरे साल के अंत तक ये नकरात्मक सिगनल( संकेत ) दूसरों को देने लगते है | और उनके अंदर शर्म , हया, गिल्ट , गर्व इस तरह के आत्म-जागरूक भावनाएं(self -conscious -emotions ) उत्पन्य होने लगती है |

इमोशंस (4)
3 -Middle And Late Childhood –

इस दौरान बच्चे सिंगल परिस्थति को समझते है और कोई इवेंट को नेतृत्व देते है तो उन्हें मिश्रित इमोशन का सामना करना पड़ता है |उदाहरण के लिए जब फेयरवेल की पार्टी होती है तो वो एक खुशी और दुःख दोनों का पल होता है जब बच्चों को इसका सामना करना पड़ता है |इसी उम्र में बच्चे अपनी भावनाओं को छुपाना सीखते है | जैसे की आप खुश न हो फिर भी स्माइल करो |

4 – किशोरावस्था( Adolescence ) –

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इस अवस्था में बच्चों के संघर्ष कुछ और भी चीजें जुड़ जाती है और वो अपना ज्यादा समय अपने साथियों या दोस्तों के साथ व्यतीत करते है न की परिवार के साथ | इस समय वो इमोशन के मामले में अपनी परिवार पे कम निर्भर रहते है और इससे कनफ्लिक्ट का जन्म होता है | और किशोरावस्था में नेगेटिव और पॉजिटिव इमोशंस दोनों ही ज्यादा होता है |

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