ओलिंपिक में पदक जितने वाली भारतीय महिलाये –

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ओलिंपिक में पदक जितने वाली भारतीय महिलाये –

भारत की आबादी दुनिया में दूसरे नंबर है की लेकिन हम ओलिंपिक में ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे है |और हमारे लिए गर्व की बात है की ओलिंपिक जैसे प्रतिस्पर्द्धा में हम दिनों -दिन में प्रगति कर रहे है |और तो और हमारी महिलाये भी इस प्रतियोगिता में बढ़चढ़ हिस्सा ले रही है | इनमे तो कुछ महिलाये मताये भी है | हर जिम्मेदारी को समझते हुए देश का गौरव बढ़ा रही है |हम कई ऐसे नाम जानते है जिन्होंने हर पल हमे गर्विंत किया है | हमारे देश में कम सुख -सुविधा होते हुए भी जहा भी उन्हें मौका मिला उन्होंने हमारा सर ही उच्चा किया है |आज इनमे से कुछ महिलाओं के बारे में बात करते है जो दुनिया के पटल पे हमे अपने लिए गर्विंत होने का मौका दिया है |

१-कर्णम मल्लेश्वरी –karnam

ओलिंपिक में पहला मैडल किसी महिला को जितने का श्रेय कर्णम मल्लेश्वरी को जाता है जो भारोत्तलम में कांस्य पदक जीता था | सिडनी ओलिंपिक में उनके पदक जितने से पहले कोई भी भारतीय महिला ने ओलिंपिक में पदक नहीं जीता था | उन्होंने ६९ किलो वर्ग में ये पदक जीता | और ये हमारे आंध्रप्रदेश से आती है |इन्हे भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार ,राजीव गाँधी खेल रत्न , पद्मश्री सम्मानित किया | इनके फादर रेलवे में पुलिस थे | इनकी बहन किशना कुमारी भी नेशनल लेबल की वेइटलिफ्टर है | और बाद में इन्होने वेइटलिफ्टर राजेश त्यागी से शादी कर ली | इनको ‘आयरन गर्ल ऑफ़ आंध्रप्रदेश’ कहते है |

२- मेरी कॉम-
मेरी कॉम को आज कौन नहीं जनता है |उनपे फिल्म भी आ चुकी है और जिसमे मैं कॅरेक्टर ” मेरी कॉम ” का रोल प्रियंका चोपड़ा ने निभाया है | और जिसने बॉक्स ऑफिस पे अच्छा बिज़नेस किया | क्योकि लोग एक लड़की को बॉक्सिंग करते हुए देखते ही चकित थे | मेरी कॉम ने ५ बार मुक्केबाज़ी में चैम्पियनशिप हासिल की है | लेकिन वो रिओ ओलिंपिक में नहीं खेल पायी थी |लेकिन २०१२ में लन्दन ओलिंपिक में उन्होंने भारत को पदक दिलाया |ये तो अब महिलाओं के बीच एक ‘ब्रांड ‘ बन चुकी है |ये हमारे पुरुत्तर राज्य मणिपुर से आती है |उन्होंने पूरी दुनिया में धूम मचा रखा है | उन्होंने ये साबित किया है की अगर प्रतिभा का सम्बन्ध अमीरी और गरीबी से होता है अगर आप में है तो हर हाल में आपके कामयाबी कदम चूमेगी | ये अकेली महिला है जिन्होंने सभी विश्य प्रत्योगिता में पदक जीते है |मेरी कॉम का असली नाम अक्सर लोग नहीं जानते होंगे हम आपको बताता है |उनका पूरा नाम है -मेंमैंगते चंग्नेइजैंग मैरी कॉम है | भारत सरकार ने इन्हे २०१३ में पद्मभूषण से नवाजा , खेल का बड़ा पुरस्कार -राजीव खेल रत्न मिल चूका है | अर्जुन पुरस्कार इन्हे २००३ में ही मिल गया था |

३- साक्षी मालिक-साक्षी मलिक
ओलिंपिक में पदक जितने वाली साक्षी मालिक पहली महिला पहलवान है | वो सबकी नज़र तब आयी जब उन्होंने २०१४ में कॉमन वेल्थ गेम्स सिल्वर मैडल जीता था | एक ऐसा दौर भी था जब लोगो महिला का कुस्ती लड़ने को बहुत बुरा मानते थे लेकिन साक्षी ने इसे गलत साबित किया और उनकी ही वजह से हरयाणा के हालात बदल चुके है | और अब तो महिला पहलवानो की बढ़ सी आ गयी है |और वो रोजाना ५ -६ घंटे अभ्यास किया करती थी और १२ साल बाद उनका सपना सच हुआ और वो २०१६ में ओलिंपिक में रिओ में कांस्य पदक जीता | इनकी आयु भी ज्यादा नहीं है ये केवल २६ वर्ष की है | ये एक सामान्य परिवार से आती है | इनके पिता डीटीसी बस में बस कंडेक्टर थे और माता आगनबाड़ी कार्यकर्त्ता | इन्हे भी भारत सरकार ने राजीव गाँधी खेल रत्न , पद्मश्री से सम्मानित किया है |

४- साइना नेहवाल –साइना नेहवाल
ये बहुत बड़ा नाम है जिसने बैडमिंटन को घर -घर में मशहूर कर दिया है | इनके पिता भी बैडमिंटन के खिलाडी रहे है | और ये बचपन से ही इस खेल से जुड गयी थी | इनके बारे में जितना कहा जाया उतना कम है | इन्होने देश का बहुत बार सर उच्चा किया है | इन्होने २०१२ के ओलिंपिक में कांस्य पदक जीता था | और ये पदक जीतते ही ये भारत की पहली बैडमिंटन खिलाडी बनी थी जिसने बैडमिंटन में कोई पदक जीता था |इन्होने दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी है |साइना नेहवाल ने अभी जल्दी ही शादी की है जिनका नाम पि कश्यप है जो की बैडमिंटन के खिलाडी है |इनको भी अर्जुन पुरस्कार , राजीव खेल रत्न, पद्मभूषण और कई पुरस्कार से नवाजा जा चूका है | ेंपे एक फिल्म भी अभी बन रही है जिसमे मैं लीड श्रद्धा कपूर निभा रही है | क्योकि इनकी लाइफ बहुत लोग को प्रेरित कर सकता है ||

५-पि टी उषा –पी टी उषा
कुछ ऐसे भी नाम है जो ओलिंपिक में मैडल तो नहीं दिला सके लेकिन अभी भी आइकॉन माने जाते है | और कोई भी लड़की इनके दिमाग में रख के ही खेल में आगे बढ़ने का सपना देखती है | वो नाम पि -टी उषा है | जिन्हे उड़न परी भी कहा जाता है | १९८८ में ये पदक के बेहद करीब पहुंची थी | इन्होने लॉस एंजेलिस में होने वाले ओलिंपिक में ४०० मीटर दौड़ में फाइनल में पहुंचे थी और  और १\१०० सेकण्ड्स  पदक पाने से चूक गयी थी और ४ स्थान पे रही थी | वही भारत के महिला जिम्नास्ट दीपा कर्मकार भी रिओ ओलिंपिक में ४ स्थान पे रही थी | लेकिन इन महिलाओं के योगदान को हम कम नहीं आक सकते है और ये महिला सशक्तिकरण को आगे ले जाती हुई प्रतीत होती है | ये महिलाओं को सिखाती है की चौका -बर्तन करने के आलावा और भी भाग है जीवन में जहा भी महिलाये कुछ अचीव कर सकती है |महिलाओं को सम्मान देना चाहिए ऐसा बार -बार स्लोगन आता है लेकिन मैं इसमें और एक वाकया जोड़ना चाहता हूँ की -महिलाओं को सम्मान देना चाहिए नहीं तो वो खुद इस क़ाबिल हो जाये के सम्मान छीन लेंगी |

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