छोटे कपडे पहनने पे रोक क्यों लगाने जा रहा है कंबोडिया ?

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कंबोडिया

कमोडियन सरकार औऱ कंबोडिया की संस्कृति –

कंबोडिया एक प्रमुख देश है दक्षिण पूर्व एशिया का | इसकी आबादी भारत के कई राज्यों से भी कम है | नामपेन्ह इस राजतंत्रीय देश का सबसे बड़ा शहर एवं इसकी राजधानी है। कंबोडिया का आविर्भाव एक समय बहुत शक्तिशाली रहे हिंदू एवं बौद्ध खमेर साम्राज्य से हुआ जिसने ग्यारहवीं से चौदहवीं सदी के बीच पूरे हिन्द चीन (इंडोचायना) क्षेत्र पर शासन किया था|इसकी सीमाएं थाईलैंड और वियतनाम से लगते है |

कंबोडिया में बुद्ध धर्म मानने वाले ज्यादा है –

कंबोडिया (4)

इस देश की अर्थव्यवस्था वस्त्र और पर्यटन उद्योग पर निर्भर है यहाँ एक प्रसिद्ध मंदिर है जिसे देखने कई देशों के पर्यटक यहाँ हर साल पहुंचते है |उस मंदिर का नाम है -अंकोरवाट मंदिर है |कंबोडिया में भारतीय संस्कृति की अमिट छाप अभी भी दिखाई देती है |कंबोडिया में अभी भी राज्य तंत्रीय शासन है |यहाँ के राजा नोरोदोम शिहामोनी है|पहले यहाँ की भाषा भारतीय भाषा संस्कृत हुआ करती थी फिर पाली हुई और अब यहाँ के लोकप्रिय भाषा खमेर है | यहाँ इस भाषा को बोलने वालों की तादाद बहुत अधिक है | यहाँ पे बुद्ध धर्म को मानने वालों की आबादी 97 % तक है |

कंबोडिया में सरकार एक क़ानून औऱ बवाल –

कंबोडिया (2)

कंबोडिया में सरकार एक क़ानून का मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें महिलाओं को ‘छोटे कपड़े‘ पहनने पर जुर्माना लगाया जाएगा और पुरषों के टॉपलेस होने पर | ये जानकारी जैसे ही बाहर आ रही है लोगों में इस कानून के आने से पहले से ही विरोध होना शुरू हो गया है | मैंने पहले आपको इस देश के बारे में ऊपर इसलिए बताया की पहले हम इस देश की भैगोलिक स्थति को जानले और वहाँ रहने वालों लोगों को जान ले की कितनी आबादी वहा पे रहती है और इस कानून से कितने लोग प्रभावित होंगे |वहाँ की रहने वाली लड़किया इस कानून के खिलाफ एक ऑनलाइन हस्ताक्षर कैंपेन चला रही है और जिसको पुरजोर समर्थन मिल रहा है |

सरकार की दलील औऱ महिलाओं का विरोध –

कंबोडिया (3)सरकार की अपने दलीले है -सरकार का कहना है की वो सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक प्रतिष्ठा को बचाने की कोशिशों के तहत ये क़ानून ला रही है, लेकिन कई लोग इसके विरोध में आ गए है |उनका कहना है की हमारा शरीर है हमे कुछ भी पहनने का अधिकार होना चाहिए |कई युवा महिलाये इसका खुला विरोध कर रही है और कह रही है की सरकार हमारे पहनने और ओढ़ने पे इस तरह पाबन्दी नहीं लगा सकती |वो सकता है ये हमारा खुद को व्यक्त करने का तरीका हो |उनके इस ऑनलाइन हस्ताक्षर कैंपेन अब तक 21000 से ज्यादा हस्ताक्षर हो चुके |

कंबोडिया एक महिला को उत्तेजक ड्रेस की लिए मिल चुकी है सजा –

कुछ महिलाये कह रही है की महिलाओं को छोटी स्कर्ट पहनने से रोकने के लिए क़ानून लागू करने के बजाय सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने के और भी तरीके हैं सरकार को उस ओर ध्यान देना चाहिए |औऱ भी महिलाये अपने फोटे साझा करके अपना विरोध प्रदर्शित कर रही है औऱ हैसटैग ‘माय बॉडी माय चॉइस ‘ के साथ |अप्रैल में एक महिला को छह महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई थी| सोशल मीडिया पर कपड़े बेचने वाली इस महिला को पोर्नोग्राफी और “उत्तेजक” कहे जाने वाले आउटफिट पहनने का दोषी कहा गया था| सरकार कई जगह इस उत्तेजक पहनावे पे पहले भी प्रतिबंध लगा चुकी है लेकिन इस बार वो बाकायदा एक कानून को लेकर आ रही है |

इस कानून में कई औऱ प्रावधान है –

 एक युवती जिसकी उम्र केवल 18 साल है उसका कहना है की अगर ये कानून पारित हो जाता है तो इस बात को बल मिलेगा की यौन उत्पीड़न के अपराधी की कोई गलती नहीं है ये तो पूरा दोष उस कपडे का था |इस विधयेक में औऱ भी चीजें जुडी है जैसा की भीख मांगने पे प्रतिबंध , सार्वजनिक जगहों पर” शांतिपूर्ण रूप से इकट्ठा होने से पहले प्रशासन की मंज़ूरी लेने की बात शामिल है|अब देखना है की सरकार का अंतिम फैसला क्या होता है | एक सामजिक कार्यकर्त्ता ने कहा की इस मुहीम से कंबोडिया सरकार पर दबाव तो पड़ेगा ही क्योकि इस कानून से असमानता औऱ गरीबी भी बढ़ेगी |

महिलाओं का पृतसत्ता को चुनौती –

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आपका क्या मानना है की ये कानून होना चाहिए या नहीं ऐसी कई देशों की सरकारे ने कोशिश की थी इस तरह के कानून लाने की कोई विफल रही है |जब तक ये पृतसत्ता रहेगी औऱ बस नारों में स्त्री मुक्ति की बात होगी | तब तक किसी न किसी देश इसी तरह महिलाओं को दोयम दर्जे का एहसास कराये जायेगा | महिलाओं को पहले भी औऱ अब भी कई अधिकार छीनने ही पड़े | अभी महिलाओं को बराबरी का अधिकार कहा मिल पाया है | लेकिन ये बात बस एक देश की नहीं है पुरे विश्व की बात है |अब वक़्त आ गया है हर टैबू को तोड़ने का औऱ खुलकर जीने का 21 सदी की महिला बनकर जीने का |

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