किताबों से दूर होते भारतीय युवा ?

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किताबों

क्या किताबों को हम अपनी सबसे अच्छी दोस्त बना सकते हैं?

हां, किताबों को हम अपनी सबसे अच्छी दोस्त बना सकते हैं | पहले कहा जाता था की किताबे आपकी सबसे अच्छी दोस्त होती है | उनको पढ़ने से आप खुद में बहुत बदलाव ला सकते है वो हमे अच्छे -बुरे लोगों की पहचान भी कराती है | और बहुत ही प्रेरणा देती है | महान लोगों की जीवनी पढ़के हम बहुत कुछ सीखते है | हम इससे अपने लेखकों को पहचानते है और कई विचारधारा से अवगत होते है | लोगों के रूचि की बात है | आप विज्ञानं की किताब पढ़े या इतिहास की |

क्यों ट्वीटर और इंस्टाग्राम से आकर्षित हो रहे है युवा ?

लेकिन अब का दौर कुछ और है | अब कई साधन आ चुके है | हमारे मनोरंजन के लिए सोशल मीडिया उसमे से एक – उदहारण के लिए -फेसबुक , इंस्टाग्राम , ट्विटर  अब तो अलग -अलग तरह के एप्प आये है -टिक-टोक  जिसमे आजकल की युवा पीढ़ी व्यस्त रहती है और वो किताबों से दूर होती जा रही है |उन्हें लगता है की यही दुनिया है | और बड़े लेखों और बड़ी किताबों से वो वंचित रह जाते है | वो एक आभासी दुनिया के ही होकर रह जाते है | यहाँ तक की आउटडोर खेल भी अवॉयड करते है | और तो और हमारे महान लोगों के बारे में उन्हें थोड़ी भी जानकारी नहीं रहती है |

कैसे बच्चों और युवा को किताबों मैं रूचि पैदा करे ?

मेरा मानना है की युवकों  को किताबों के प्रति जागरूक करिये और उन्हें आप खुद ही नयी -नयी किताबे लाके दे जिससे उनकी उसके प्रति जागरकता आये|क्योकि ये दुनिया आभासी दुनिया से एकदम अलग होती है | वहां हर चीज की मॉडिफिकेशन , एडिट  और अनडू हो जाता है | लेकिन वास्तविक दुनिया कही अलग होती है |  अच्छे लेखकों की किताबे आप अपने घर में अवश्य रखे | और हर दिन अपने बच्चे को एक नेता , अभिनेता , इतिहासकार , एक लेखक , एक दार्शनिक ,एक वैज्ञानिक और कई विचारधारा से जरूर अवगत कराये | और उनकी लिखी हुई किताबों के बारे में जानकारी दे |

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