किशोर जिन्होंने संसार को बदल कर रख दिया ?

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किशोर

किशोर और समाज में सतत परिवर्तन –

किशोर को इंग्लिश में ‘टीनेजर’ कहा जाता है। अगर आप ध्यान से देखे तो 2020 को केवल कोरोना के लिए ही याद नहीं रखा जायेगा। बहुत सी ऐसी चीजें हुई है जिन्होंने पूरा का पूरा परिवर्तन कर दिया है।टीनेजर का साफ़ सा मतलब होता है 18 साल से कम उम्र के बच्चे। आप खुद के बचपन से ये अंदाज़ा लगा सकते है की आप इस उम्र में क्या कर रहे थे।और क्या आपने भी विश्व के किसी भी अच्छे परिवर्तन में सहायक थे। हम जैसे -जैसे बड़े होते है हम हमेशा सोचने लगते है की जो भी हमसे कम उम्र के है या तो वो विश्वास करने लायक नहीं है और या तो वो पिछड़े है। कई ऐसी भ्रांतिया है जो हम नहीं समझ सकते है।क्योकि समाज सतत परिवर्तित हो रहा है और जिस तरह से सोशल मीडिया और आईटी सेक्टर की फील्ड में विकास हो रहा है।

उसका समाज पर असर साफ़ दिख रहा है।लेकिन अभी जो पीढ़ियों की सोच में अंतर साफ़ देखने को मिल रहा है। लेकिन आज के जो भी किशोर है वो हर बात साफ़ -साफ़ कहने में विश्वास रखते है। और मैं कहना चाहता हूँ सभी लोगों से अब वक़्त आ गया है की हम इन किशोरों को बच्चे कहके टाले नहीं और उनकी बातें को भी जिम्मदेरी से सुने। क्योकि वो जो बात करेंगे या विचार प्रकट करेंगे वो उनके विचार के साथ ही साथ टीनेजर की बात या विचार होंगे। जिससे हमे उनके साथ सामजस्य बिठाने में मदद मिलेगी।आये अब आपको बताते है कौन से किशोर है जिन्होंने दुनिया को बता दिया है हम आ रहे है।

गीतांजलि राव-युवा वैज्ञानिक-

गीतांजलि राव एक भारतीय-अमेरिकी आविष्कारक, लेखक, वैज्ञानिक और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित प्रवर्तक हैं। उसने 2017 में डिस्कवरी एजुकेशन 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज जीता, और अपने नवाचारों के लिए फोर्ब्स 30 अंडर 30 में पहचाना गया।एक 15 साल की भारतीय मूल की अमेरिकी लड़की इस समय खूब चर्चा में है। इसकी वजह यह है कि मशहूर टाइम मैग्जीन (Time Magzine) ने उन्हें साल 2020 में पहली ‘किड ऑफ द ईयर (Kid of the Year) के खिताब से नवाजा है लेकिन उससे भी अहम बात यह है कि गीतांजली राव ( इतनी कम उम्र में ही एक बहुत ही मेधावी युवा वैज्ञानिक और इंवेंटर हो चुकी है।

जेंडर पे गैप के बारे में भी बात करती-

गीतांजली को इंसानी समस्याएं सुलझाने का जुनून सा है जो उनके काम में साफ तौर पर दिखाई देता है गीतांजलि राव का जन्म 19 नवंबर 2005 लोनेटरी कोलोरडे अमेरिका में हुआ है।अभी वो एक स्कूल की छात्रा है। राव आगे की पढ़ाई के लिए मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान में जाने का मन बना चुकी है इतनी छोटी उम्र की लड़की का कहे तो कांसेप्ट एकदम साफ़ है उसे पता है उसे क्या करना है। वो जेंडर पे गैप के बारे में भी बात करती है। विज्ञान और तकनीक के उपयोग के बारे में सामाजिक बदलावों के लिए गीतांजली ने दूसरी और तीसरी कक्षा से ही शुरू कर दिया थ।

उन्होंने देखा किशोर पीढ़ी कई तरह की समस्या से गुजर रही है तो उन्होंने अपना मिशन ही इन समस्याओं के सुलझाने के लिए युवा इनोवेटर्स का वैश्विक समुदाय बनाना में लगा दिय।उनका मानना है कि युवा लोगों को सारी समस्याएं सुलझाने के बजाए किए एक समस्या का मजेदार हल निकालने का प्रयास करना चाहिए।राव बताती है वो विज्ञानं के प्रति तब आकर्षित हुई जब उनके चाचा ने उन्हें 4 साल की उम्र एक साइंस किट दी थी।अमेरिका की शीर्ष युवा वैज्ञानिक के तौर पर नामित की गईं गीतांजली ने साल 2017 में टेथिस नाम का उपकरण बनाया था जो पानी में सीसे की मिलावट की पहचान करता है।आप समझ सकते है की राव की सोच कितनी सटीक और क्लियर है।

बिली ईलिश-अमेरिकी गायक-

बिली ईलिश एक अमेरिकी गायक-गीतकार हैं। उन्होंने पहली बार 2015 में ध्यान आकर्षित किया जब उन्होंने साउंडक्लाउड के लिए “ओशन आइज़” गीत अपलोड किया, जिसे बाद में इंटरस्कोप रिकॉर्ड्स की सहायक कंपनी डार्करूम ने रिलीज़ किया।बिली का जन्म 18 दिसंबर 2001 में कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स शहर में हुआ था। यहां वे अपने माता-पिता के साथ रहा करती थीं।उनके माता-पिता पैट्रिक ओ कोनेल और मैगी बेयर्ड दोनों ही एंटरटेन्मेंट इंडस्ट्री में थे।

बचपन में बिली ने कभी किसी स्कूल में दाखिला नहीं लिया।उन्होंने घर में ही पढ़ाई की। समय की कोई कमी ना होने की वजह से वे पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भी हिस्सा लिया करती थीं।केवल 8 साल की उम्र में ही बिली लॉस एंजिल्स के चिल्ड्रन्स कोरस में शामिल हो गईं थीं।यहां वे करीब तीन साल तक रहीं। केवल 11 साल की उम्र में ही उन्होंने गाने लिखना शुरू कर दिया था। बिली ने कई शॉर्ट फिल्म्स भी बनाई हैं।वे उन्हें अपने कैमरे से ही बना लिया करती थीं और एपल की वीडियो एडिटिंग एप से एडिट भी खुद ही करती थीं।

एक्टिंग और म्यूजिक के अलावा उन्हें डांस का भी शौक था।उन्होंने अपनी टीनेज में डांस सीखा भी था।इतनी सारी स्किल्स के साथ वे शो बिजनेस में कुछ बड़ा कर दिखाने का इरादा रखती थीं। बिली की मां भी गाने लिखती थीं और पिता तरह-तरह के म्यूजिकल यंत्र बजाया करते थे। बड़े भाई फीनिस को भी संगीत में कम दिलचस्पी नहीं थी।इतनी कम उम्र में इनके 2 गिन्नीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड और 2 म्यूजिक अवार्ड और ग्रैमी अवार्ड भी मिल चूका है।इनका जन्म 18 दिसंबर 2001 लॉस एंगेल्स में हुआ है। इनको माता अध्यापक रही है।

डारा मैकआनल्टी-एक प्रकृतिवादी लेखक-

एक उत्तरी आयरिश प्रकृतिवादी, लेखक और पर्यावरण प्रचारक है। वह RSPB पदक के सबसे कम उम्र के विजेता हैं और पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किए जाने वाले सबसे कम उम्र के लेखक होने के बाद 2020 में यूके प्रकृति लेखन के लिए वेनराइट राइट पुरस्कार जीता।इनका जन्म 2004 आयरलैंड में हुआ था। प्रकृतिवाद एक दार्शनिक विचारधारा है जो पदार्थ को आधार एवं यथार्थ मानती है। हमे आपको बस ये बताना है की आप की जो भी सोच है उसके आगे की सोचते हुए बच्चे और भी जागरूक हो रहे है। ये अपने विचार में सटीक और पारदर्शी है।

डाफ्ने अलमेज़ॉन -हार्वर्ड से सबसे कम उम्र के मास्टर डिग्री लेने वाली –

मैक्सिको को एक लड़की जिसने सबसे कम उम्र में हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री ली है इनके माता -पिता ये दावा करते है की ये भगवान की देन है या कहे की गिफ्टेड है क्योकि इसको पढ़ने लिखने और याद करने किसी के हेल्प की आवश्यकता नहीं पड़ी। इन्होने बाकायदा पढाई तब शुरू की जब ये 8 साल की थी और इनका जब टेस्ट लिया गया तो इनको हाई स्कूल लायक माना गया और इन्होने हाई स्कूल में एडमिशन लिया।और ये 13 साल तक पह्चते ही ये साइकोलॉजी से डिग्री कर ली और 17 साल की उम्र पहुंचते मास्टर के लिए ही हार्वर्ड ने इनका एडमिशन स्वीकार किया।उन्होंने बताया की मुझे एक अलग अनुभव से भी गुज़रना पड़ा क्योकि जब ये हार्वर्ड में गयी पढ़ने तो सब इनसे उम्र कही बड़े थे।लेकिन ये बात है की सब इन्हे सपोर्ट करते थे।

ग्रेटा थनबर्ग स्वीडन की एक पर्यावरण कार्यकर्ता-

ग्रेटा थनबर्ग स्वीडन की एक पर्यावरण कार्यकर्ता हैं जिनके पर्यावरण आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली है।स्वीडन की इस किशोरी के आंदोलनों के फलस्वरूप विश्व के नेता अब जलवायु परिवर्तन पर कार्य करने के लिए विवश हुए हैं।अगस्त 2018 में, 15 की उम्र में, थनबर्ग ने स्कूल से समय निकालकर हाथ में स्वीडन की भाषा में “Skolstrejk för klimatet ” ( जलवायु के लिए स्कूलबन्दी (स्कूलबंदी)) लिखी तख्ती लिए स्वीडन की संसद के बाहर प्रदर्शन करना शुरू किया।

11 दिसम्बर 2019 को इन्हे ‘टाइम पर्सन ऑफ़ द ईयर’ पुरस्कार प्रदान किया गया। ग्रेटा अपने सीधे-साधे शब्दों में बात करने के लिए भी जानी जातीं हैं।अपनी सार्वजनिक सभाओं में और राजनीतिक नेताओं के साथ वार्ता में वे जलवायु संकट पर तुरन्त कार्वाई करने का आग्रह करतीं हैं।देखिये ऐसे बहुत से किशोर छूट रहे है क्योकि ये आर्टिकल बहुत बड़ा हो जायेगा। हमारा काम ये है की आपको बता सके की परिवर्तन हो रहा है और आजकल के किशोर भी बहुत वेल अवेयर है हर तरह के आने वाली समस्या से। और आने वाली पीढ़ी हर तरह की जिम्मेदारी उठा सकती है। अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आ रहे है तो हमे समर्थन दे।

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