कौनसे देश में हुई थी शतरंज की खोज?

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हम बात करते है एक दिल्चस्पी खेल की जो बहुत मशहूर भी है और इसमें दिमाग की कसरत हो जाती है उस खेल का नाम है “शतरंज” | हमारे यहाँ से उसका जन्म भी हुआ है I वो आज से 1500 वर्षा पुराना खेल है | इस खेल का छथि शताब्दी में भारत में जन्म हुआ और इसका पुराना नाम चतुरंग थाI ये खेल भारत से फारस { इस समय के ईरान में पंहुचा } और जब अरबों ने फारस को जीता तो वो नार्थ यूरोप में पंहुचा I पुराने समय में इस खेल के नियम और कैयेदे कुछ अलग थे और इस समय में इसके नियम कुछ अलग है | पहली प्रतियोगिता जो हुई वो फेडरेशन ऑफ़ इंटरनेशनल ऑफ़ चैस| भारत के पहले शतरंज खेल दुनिया में बहुत खेलने वाला खेल है ऐसे खेलने से बौद्धिक क्षमता बढ़ती है और मस्तिष्क तेज़ होता है क्युकी ये खेल दो लोगों में खेला जाता है | इसमें कुल ६४ खाने होते है इसमें २ रंग के मोहरे होते है एक सफ़ेद और एक काला और सभी मोहरों की अपनी चाल होती है | ये शाह और मात का खेल होता है | समय तो निर्धारित नहीं होता |इस खेल में कभी ये ३० घंटे में ख़तम हो जायेगा, नहीं तो कभी कभी ये खेल ६ घंटे भी चलता है किसी समय ये खेल कुलीन वर्ग का बहुत ही पसंदीदा खेल हुआ करता था | विश्व में इस खेल का नियत्रण फेडरेशन इंटरनेशनल दी एचएस {फिडे} द्वारा किया जाता है | सभी प्रतियोगिता फिडे के एकादिकार में है | भारत में इस खेल का नियंत्रण अखिल भारतीय महासंघ करता है जिसकी स्थापना १९५१ में हुई थी |


भारत का पहला खिलाड़ी मीर सुल्तान खान थे | उन्होंने १९२८ में ९ अंक में से ८.५ अंक प्राप्त करके अखिल भारतीय प्रतियोगिता जीती | अगले ३ साल उन्होंने ब्रिटिश प्रतियोगिता जीती और वो बहुत दिन तक शिखर पर रहे|

उन्होंने १९३० में हमबर्ग , और १९३१ में प्राग और १९३३ में फोख्स्टन ओलम्पियाड भी खेला | मैन्युल एरोन १९६१ में पहली एशिया प्रतियोगिता जीती और वो भारत के पहले इस खेल के अर्जुन पुरस्कार विजेता बने | बाद में कई खिलाडियों ने इस खेल को आगे बढ़ाया लेकिन फिर एक खिलाड़ी का उदय हुआ जिसका नाम था विश्वनाथन आनंद जिन्होंने अंतरास्ट्रीय तोर पर बहुत उपलब्धि दिलाई | १९८७ में उन्होंने पहला जूनियर प्रतियोगिता जीतकर विश्व विजेता बने| वो पांच बार विश्व विजेता बने विश्वनाथन आनंद ने २००० में और २००७ में और २००८ में और २०१२ में विश्व ख़िताब जीता और इनको १९९८ और १९९९ में प्रतिष्ठ पुरस्कार आस्कर में नामित भी किया गया इसके लिए इन्हे भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री और राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार दिया और बहुत सारे खिलाडी हमे इस खेल में आगे ले जा रहे है और बहुत आगे भी ले जायेंगे | हमने पुरे विश्व को एक बहुत ही चर्चित खेल दिया है |विश्वनाथन आनंद को “मद्रास का टाइगर” कहा जाता है |
“मैंने विश्वनाथन आनंद से बहुत कुछ सीखा हैं लेकिन अब मेरी बरी हैं उनको सीखने की” ऐसा माग्नुस कार्लसन ने कहा |

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