“गुरु नानक जयंती ” की सचाई

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गुरु नानक जयंती

“गुरु नानक जयंती ” की सचाई  क्या है?

ये एक पर्व है जो सिखों के बीच बहुत लोकप्रिय है | ये पर्व सिख के पहले गुरु गुरु नानक के जन्मदिन के रूप में बनाया जाता है | ये गुरु ने जो सिख धर्म के विश्वास को एक आकर दिया है | इस दिन को लोग गुरुपर्व के रूप में मनाते है | गुरुनानक जी को सिख धर्म के संस्थापक भी कहा जाता है | ये पर्व सभी सिख के लिए सामान है | इनको सूफी संत भी कहा जाता है | इन्हे ननकाना साहेब भी कहा जाता है | इनका जन्म कुछ विद्वान १५ अप्रैल १९४९ को तलवंडी नामक गांव में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था | लेकिन प्रचलित गुरुपूर्णिमा को ही माना जाता है जो की दिवाली के १५ या २० दिन में आता है |

गुरु नानक की पारिवारिक संरचना

इनके पिता का नाम कल्याणचंद या मेहता कालू जी था, माता का नाम तृप्ता देवी था। तलवंडी का नाम आगे चलकर नानक के नाम पर ननकाना पड़ गया। इनकी बहन का नाम नानकी था। बाल्य अवस्था से ही इनका मन सांसारिक क्रियाओं में नहीं लगता था | और इन्होने ज्यादा से ७ -८ तक ही पढ़ाई की लेकिन ये बहुत ही प्रखर बुद्धि की थे | इनका विवाह १६ वर्ष की आयु में हो गया था | इनकी पत्नी का नाम सुलखनी था |और ३२ वर्ष की आयु में इनका पहले लड़के को श्रीचंद का जन्म हुआ |चार वर्ष के पश्चात लखमीदास नाम का दूसरा पुत्र हुआ है | १५०७ ईस्वी में ये अपने घर -परिवार को छोड़कर मरदाना निकल पड़े | ये घूम -घूम कर उपदेश देने लगे और फारस और पाकिस्तान , और अफगानिस्तान भ्रमण कर लिया है | और इन जगह को पंजाबी में’ उदासिया’ कहा जाता है | उन्होंने हिन्दू धर्म के फैली कुरीतियों का हमेशा सख्त विरोध किया है |

गुरु नानक के उपदेश

इनके उपदेश का सार यही होता था कि ईश्वर एक है उसकी उपासना हिंदू मुसलमान दोनों के लिये हैं। मूर्तिपुजा, बहुदेवोपासना को ये अनावश्यक कहते थे। हिंदु और मुसलमान दोनों पर इनके मत का प्रभाव पड़ता था | अपने अंतिम दिनों में इनका विचार परिवर्तन हुआ और ये अपने परिवार के साथ रहने लगे | उन्होंने करतारपुर नगर भी बसाया हैं | जो भारत से पाकिस्तान अलग हुआ उसमे अब आता है | मृत्य से पहले वो अपने शिष्य भाई लहना को उत्तराधिकारी घोषित किया है | जो बाद में गुरु अंगद देव नाम से जाना जाता है |

सिख धर्म के गुरुओ के नाम

और जो गुरु हुए उनके नाम -१-गुरु नानक देव

२-गुरु अंगद देव
३-गुरु अमर दास
४-गुरु राम दास
५-गुरु अर्जुन देव
६-गुरु हरगोबिन्द
७-गुरु हर राय
८-गुरु हर किशन
९-गुरु तेग बहादुर
१०-गुरु गोबिंद सिंह
११-गुरु ग्रन्थ साहिब

और हमारी ओर से गुरुपर्व की बहुत -बहुत ही बधाई |

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