गूगल ने क्या ऐसा खोजा जिसकी स्पीड के सामने सुपरकम्प्युटर भी बच्चा है ?

0
674
सुपरकम्प्युटर

गूगल ने क्या ऐसा खोजा जिसकी स्पीड के सामने सुपरकम्प्युटर भी बच्चा है ?

अभी तक कंप्यूटर लैंग्वेज ० और १ पे ही काम करते आ रहे है | जब कंप्यूटर नहीं बना था | उस दौर के हाथों पे गढ़ना करते थे | धीरे -धीरे हम विकास करते गये | और कुछ न कुछ उसमे जुड़ता गया | लेकिन २३ अक्टूबर बुधवार गूगल ने क्लेम किया की उन्होंने ‘ क्वांटम सुपरमासी’ खोज निकला है या उसको प्राप्त कर लिया है |ये कंप्यूटर के स्पीड में एक बहुत बड़ा परिवर्तन हो जायेगा |

उन्होंने बताया की हम १९८० से ही इस काम में लगे हुए थे |जो भी पुराने टेक्नोलॉजी पे काम करने वाले कंप्यूटर है वो कभी भी क्वांटम कंप्यूटर की स्पीड को नहीं पा सकते | आप समझ सकते हो की सुपरकम्प्युटर जो कैलकुलेशन १०००० साल में करेगा इस टेक्नोलॉजी के आने के बाद कोई भी डिवाइस उस कॅल्क्युलेशन को केवल ३ मिन्ट्स २० सेकंड में कर देगा | इसके सामने सुपरकम्प्युटर भी एक खिलौना है | इसका सबसे ज्यादा लाभ आर्टिफीसियल इंटेलीजेन्स में पूरी दुनिया को मिलेगा |

सुपरकम्प्युटर

राइट ब्रदर्स ने कौन सा पॉइंट सत्यापित किया –

वैज्ञानिकों ने इस घोषणा के साथ राइट ब्रदर्स के पहली प्लेन उड़ाने की घटना को भी कोट किया | और कहा की कुछ है जो वास्तव में हो सकता है यहाँ तक कई साल बाद आप इसमें कुछ जोड़ सकते है | उनका साफ़ कहना है की जो राइट ब्रदर्स ने प्लेन उडाया वो उतना उपयोगी नहीं था |लेकिन टेक्सास के कंप्यूटर वैज्ञानिक ने गूगल के पेपर पब्लिश करने से पहले अपना मत दिया की वो डिज़ाइन बना के अपना पॉइंट सत्यापित करना चाहते थे | जो उन्होंने कर दिखाया |

लेकिन कुछ रिसर्चर जो उत्तेजित होने के बजाये सावधान मुद्रा में है क्योकि लैब में इसके लिए ज्यादा से ज्यादा काम करने की जरुरत है |क्वांटम कम्प्यूटर्स के आने से पहले उन्हें पहले क्वांटम मशीन लैब में जाना होगा | और तो और जिसकी वैल्यू मिलियन ऑफ़ डॉलर्स में है |

लेकिन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के बड़े नाम -जैसे – माक्रोसॉफ़्ट , इंटेल , आए बी ऍम ,सब लामबंद है क्वांटम कम्प्युटीं के लिए और तो और कई उद्योगपति इसमें पैसा लगाने को तैयार है |जिस से इसके स्टार्टअप में हो सके और ज्यादा से ज्यादा खोज हो सके |

चीन पहले से ही ४०० मिलियन डॉलर्स नेशनल क्वांटम लैब में खर्च कर रहा है | और तो और पिछले सालों में क्वांटम पेटेंट में दोगुना पेटेंट करा रहा है अमेरिका के तुलना में |और इसी को देख कर अमेरिका ने भी क्वांटम रिसर्च में १.२ बिल्लिअन डॉलर खर्च करेगा |

कैसे अलग है क्वांटम कंप्यूटर –

जब कई सालों तक रिसर्च होता है तब क्वांटम फिजिक्स में तब जाके परिणाम स्वरूप हमे क्वांटम मशीन मिलती है | ये सामन्तः कम्प्यूटर्स से एकदम अलग है | जहा तक बात इस समय के कंप्यूटर की है | वो गढ़ना बिट इनफार्मेशन में करते है प्रत्येक बिट में इनफार्मेशन या तो १ या ० के रूप में होती है |क्वांटम मशीन में वैज्ञानिक क्वांटम बिट पे काम करेंगे | जो की १ और ० के सयुक्त इनफार्मेशन को स्टोर करेगा | और इससे २ कूबिट्स ४ वैल्यू एक समय में स्टोर करेंगे और जैसे हम कूबिट्स बढ़ाएंगे वैसे ही कंप्यूटर की पावर तेज़ी s क्वांटम फिजिक्स का मानना है की एक अकेला ऑब्जेक्ट एक समय में दो अलग -अलग ऑब्जेक्ट की तरह व्यवहार करता है या तो वो बहुत -बहुत छोटा हो या बहुत -बहुत ठंडा हो |

आप इसे पढ़ना भी पसंद कर सकते हैं:नाविक -भारत का जीपीएस –

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here