चन्द्रमा पर आखिर हम क्या छोड़ आये है ?

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चन्द्रमा

चन्द्रमा पर हम क्या छोड़ आये है –

चन्द्रमा पर मानव बहुत पहले ही अपने पाँव रख चूका है लेकिन ऐसा तो नहीं है की कोई भी एक प्रयास में ही पहुंच गया होगा।चन्द्रमा पर पहुंचने पर कई वर्षों तक का अथक परिश्रम और विज्ञानं की मेहनत लगी है।पहले पहले आप इस आर्टिकल के टाइटल को देखेंगे तो आप को ये एक शायर के कलम से निकला हुआ लगेगा।लेकिन आपको हम यहाँ ख्वाब में टहलाने नहीं आये है आपको सच में ये बताने आये है की की आखिर हमने क्या -क्या चाँद पर छोड़ दिया है।छोड़ी ही चीजें को जानकार आप जान पायेंगे की आखिर यूँ ही इतिहास नहीं बदलते उसके लिए कई चीजें को छोड़कर और कई चीजों को अपनाकर आगे बढ़ना पड़ता है।और कई लोगों को इसमें खुद ही इतिहास बनना पड़ता है।आये जानते है मानव के पहले कदम से अब तक हमने चाँद पर क्या छोड़ आये।

चाँद पर क्या -क्या छूटा है –

नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन ने जब चन्द्रमा पर पाँव रखा है तब जुलाई महीना 1969 था।ऐसा 5 क्रू मिशन हुआ और ये जाकर 1972 में खतम हुआ।और बिना मनुष्य वाले तो कई मिशन हुए।जब तक रसिया लूना दुर्घटनाग्रषित नहीं हुआ था ये बात 1959 की है।आप सोच कर भी ये आश्चर्य होगा की मानव दवरा निर्मित कम से कम 500000 पौंड तक बनी वस्तुए चाँद के सतह पर है।और क्या -क्या है ये जान कर आप और आश्चर्य में पड़ जायेंगे।

जो बिना जाने आप अंदाज़ा लगा सकते है वो है स्पेस क्राफ्ट है कम से कम 70 स्पेसक्राफ्ट व्हीकल्स है। उनका चन्द्रमा पर रह जाने कए भी कारण वो बहुत भारी होते है और उनको वापस पृत्वी पर लाने का कोई फायदा नहीं है।कुछ ऐसी भी चीजें भी है जो अंतरिक्षयात्री जब चाँद की सतह पर पहुंच जाने के बाद उनके लिए प्रयोग लायक नहीं थे।जैसे फ़ूड पैकेजिंग और यूरिन के 100 पैकेट जो ख़राब हो चुके थे।

छह अमेरिकी झंडे और गोल्फ की दो गेंदे के आलावा और क्या –

अपोलो वाले अंतरिक्ष यात्री तो अपने टेलीविज़न तक वहाँ छोड़ दिया था।क्योकि वे अपने कमांड मॉड्यूल से वजन कम कर रहे थे ताकि वे चंद्रमा की सतह से पृथ्वी पर वापस ला सकने वाले नमूनों की अधिकतम मात्रा बढ़ा सके।अपोलो मिशन चंद्रमा की चट्टानों और चंद्र मिट्टी के 850 पाउंड वापस लाने में सक्षम थ।आपको पता ही होगा की नील आर्मस्ट्रांग ने चन्द्रमा के सतह पर अमेरिका के झंडे लगाये थे जिससे ये यादगार हो जाये।चंद्रमा की सतह पर छह अमेरिकी झंडे लगाए गए हैं।अब वे संभवतः फीके पड़ गए हैं, जैसा कि वह तस्वीर है जो चार्ल्स ड्यूक ने अपने परिवार के साथ खुद को पीछे छोड़ दिया था।वहाँ दो गोल्फ के बॉल भी होंगी जिनको एलन शेपर्ड द्वारा कम गुरुत्वाकर्षण में डालने के लिए अपना हाथ आजमाने के बाद वही छोड़ दिया।

एक पट्टिका भी है जिसपे शांति का सन्देश लिखा है –

अपोलो 11 का लैंडिंग मॉड्यूल अभी भी वहाँ है, एक पट्टिका के साथ चिह्नित है जिसपे लिखा है – “यहां ग्रह पृथ्वी के पुरुषों ने पहली बार चंद्रमा जुलाई 1969 को पैर रखा थ” हम सभी मानव जाति के शांति के लिए यहाँ आए है ।इस संदेश ने पूरे मानव जाति के लिए चंद्र लैंडिंग की विजय को प्रदर्शित किया, मानवता को नए मोर्चे पर उभारा- संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध के बावजूद, जिसने पहले स्थान पर चंद्रमा के लिए दौड़ को जन्म दिया था।इसी भावनाओं के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों ने दो पदक छोड़े जो सोवियत संघ के दिवंगत कॉस्मोनॉट्स यूरी गगारिन और व्लादिमीर कोमारोव को दिए गए थे, जो अंतरिक्ष यात्री दुखद दुर्घटनाओं में मारे गए थ।

अमेरिका मिशन को पुनर्जीवित करने और चीन भी चाँद पर पहुंचने में लगे है –

गागरिन और कोमारोव चंद्रमा पर अमर होने वाले अंतिम लोग नहीं थे।1998 में ज्योतिषविद् जीन शोमेकर की राख को चंद्रमा पर एक खोज मिशन के लिए भेजा गया था, जहां वे अब चंद्र धूल के बीच झूठ बोलते हैं।केवल 50 वर्षों में मानव पदचिन्ह ने निश्चित रूप से चंद्र सतह पर एक से अधिक तरीकों से एक छाप छोड़ी है।चंद्रमा की सबसे प्रसिद्ध छवियों में से एक बज़ एल्ड्रिन के अपने पदचिह्न की तस्वीर है।वस्तुतः कोई वातावरण (और इसलिए मिट्टी को नष्ट करने के लिए कोई हवा नहीं), वही पदचिह्न शायद अभी भी वहाँ है।

जैसा कि नासा 2024 तक चंद्रमा पर अपने चालक दल के मिशन को पुनर्जीवित करने के लिए देखता है, मनुष्य आने वाले वर्षों में और अधिक पैरों के निशान छोड़ने के लिए लगभग निश्चित ह। हमारा काम है की आपको वो बातें बताये जिन्हे आप खुद जानना चाहते है अगर आपको हम थोड़ा भी स्वतंत्र कर पाए इसका आशय है आपके दिल को थोड़ा भी प्रभावित कर पाये तो हमे समर्थन दे।

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