जिम कॉर्बेट पार्क का नाम आखिर जिम कॉर्बेट क्यों पड़ा ?

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जिम कॉर्बेट

जिम कॉर्बेट पार्क भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान –

जिम कॉर्बेट पार्क भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है |साल 1936 में लुप्त होते बाघों को बचाने के लिए ये उद्यान बनाया गया था |ये उत्तराखंड राज्य में स्थित है | ये पर्यटकों को पसंदीदा जगह में से एक मानी जाती है | और साल सैकड़ों पर्यटक यहाँ आते है | यहाँ हर तरह के जीव-जंतु पाये जाते है | यहाँ शेर , भालू , चीता, निल गाय, सुअर , हिरन पाये जाते है |इस पार्क में पर्यटकों का घूमने का समय नवंबर से मई तक होता है |

जिम कॉर्बेट (2)

अब आते है इतने पुराने उद्यान का नाम आखिर जिम कॉर्बेट क्यों पड़ा ? हुआ ये की जिम कॉर्बेट एक इंसान थे |वो आयरिश मूल के भारतीय लेखक और दार्शनिक थे |उन्हें बहुत अच्छा शिकारी भी माना जाता था |इन्होने उत्तराखंड के गढ़वाल जिले में कई आदमखोर बाघ को मारा था |कहा जाता था अगर ये शिकार पे निकल जाये तो क्या मजाल की शिकार करके न आये | इन्होने चम्पावत में 436 लोगों के शिकार करने वाली बाघिन से जिम कॉर्बेट ने ही छुटकारा दिलाया था | लेकिन मन पलटने से ये भारतीय बाघों की संख्या की कमी को लेकर बहुत ही चिंतित देखे गये और शिकार छोड़कर केवल चित्रकारी में लग गये |

जिम कॉर्बेट (3)

जिम कॉर्बेट का जीवन और उनके नाम पे उद्यान का नाम –

जिम कॉर्बेट जा जन्म 25 जुलाई 1875 उत्तराखंड में हुआ था | ये बचपन से ही बहुत ही निडर थे | इनकी प्राम्भिक पढाई नैनीताल के सेंट जोशेफ स्कूल में हुई थी लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से इन्हे पढाई बीच में छोडके बिहार में रेलवे में नौकरी करने जाना पड़ा |जिम कार्बेट आजीवन अविवाहित रहे। उन्हीं की तरह उनकी बहन ने भी विवाह नहीं किया। दोनों भाई-बहन सदैव साथ-साथ रहे और एक दूसरे का दु:ख बाँटते रहे।

जिम कॉर्बेट (4)

कुमाऊँ तथा गढ़वाल में जब कोई आदमखोर शेर आ जाता था तो जिम कार्बेट को बुलाया जाता था। जिम कार्बेट वहाँ जाकर सबकी रक्षा कर और आदमखोर शेर को मारकर ही लौटते थे| उनको भारत से बहुत प्रेम था और वो हमेशा भारत का यशगान करते रहते थे | ऐसे कुमाऊँ – गढ़वाल के हमदर्द व्यक्ति के नाम पर गढ़वाल-कुमाऊँ की धरती पर स्थापित पार्क का होना उन्हें श्रद्धा के फूल चढ़ाने के ही बराबर है। अत: जिम कार्बेट के नाम पर यह जो पार्क बना है |जिम कार्बेट के प्रति यह कुमाऊँ-गढ़वाल और भारत की सच्ची श्रद्धांजलि है|

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