डिएगो माराडोना और हैंड ऑफ़ गॉड

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डिएगो माराडोना

डिएगो माराडोना फुटबाल का हीरा –

डिएगो माराडोना एक ऐसी शख्सियत जिसको मानने हर देश में होंगे | उनके जाने से फुटबाल जगत में एक शून्य से हो गया है | एक छोटे से कद के फुटबॉलर का कद यूँ ही इतना बड़ा नहीं हुआ | डिएगो माराडोना का पूरा नाम -डिएगो आर्मैन्ड़ो माराडोना था माराडोना का जन्म लानुस में एक गरीब परिवार में हुआ, जो कोरिएंटेस प्रॉविंस में स्थानांतरित हो गई, लेकिन उनका पालन पोषण विला फ़िओरिटो में हुआ, जो ब्यूनस आयर्स के दक्षिणी बाहरी भाग में बसी एक झोपड़पट्टी है। तीन बेटियों के बाद वे पहले पुत्र थे। उनके दो छोटे भाई हैं, ह्यूगो (एल टरको) और एडूअर्डो (लालो), वे दोनों भी पेशेवर फ़ुटबॉल खिलाड़ी ही थे।गरीबी में पले-बढ़े माराडोना के बीच उनकी आर्थिक स्थति ने रुकावट तो बेशक पैदा की लेकिन उनका रास्ता न रोक सकी|

माराडोना उनके पेशेवर खेल की शुरुआत-

डिएगो माराडोनाजब वो एक बार फुटबाल खेल रहे थे तब वहां पे एक स्काउट के टीचर ने उन्हें खेलते देखा और उनकी प्रतिभा को पहचान लिया |और उन्हें जूनियर टीम में एक बॉल बॉय के तौर पर नियुक्ति मिली और जिसमे वो खाली समय में अपने करतब से लोगों का मनोरंजन भी करते थे |20 अक्टूबर 1976 में, माराडोना ने अपनी सोलहवीं सालगिरह से दस दिन पहले अर्जेंटिनोस जूनियर्स के साथ पेशेवर शुरूआत की।धीरे -धीरे वो प्रगति करते गए |1982 के विश्व कप के बाद, जून में, माराडोना उस समय के विश्व रिकॉर्ड कीमत 5 मिलियन पाउंड पर स्पेन में बार्सिलोना के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया| 1983 में कोच सीज़र लुइ मेनोटी की देख-रेख में बार्सिलोना और माराडोना ने रियल मैड्रिड को हरा कर कोपा डेल रे (स्पेन की वार्षिक राष्ट्रीय प्रतियोगिता) जीता और एथलेटिक डे बिलबाओ को हरा कर स्पेनिश सुपर कप जीता।

डिएगो माराडोनाबार्सिलोना के साथ उनके सम्बन्ध अच्छे नहीं रहे | उनका बार्सिलोना के निदेशक और टीम के अध्यक्ष से हमेशा टकराव होता और इसका असर उनके खेल पर भी पड़ने लगा | जिससे उन्होंने 1984 में उन्होंने कैम्प नोऊ से हटाए जाने की मांग की। वे इटली के सेरी A के नापोली में फिर एक रिकॉर्ड शुल्क 6.9 मिलियन पाउंड के साथ स्थानांतरित किए गए।नापोली में माराडोना अपने पेशेवर कॅरियर के शीर्ष पर पहुंचे। वे जल्द ही क्लब के प्रशंसकों के बीच एक बहुत ही पसंदीदा खिलाड़ी बन गए और अपने समय में उन्होंने टीम को उसके इतिहास के सबसे सफल दौर में पहुंचा दिया।इटली में वो अपने व्यक्तिगत समस्या से घिरे भी रहे है और उनको यहाँ कोकीन की लत भी लग गयी |और तो और उन्हें कोकीन के कारन 15 माह का खेल पर रोक को भी झेलना पड़ा |

माराडोना का हैंड ऑफ़ गॉड-

1986 में इंग्लैंड और अर्जेंटीना फीफा विश्व कप के क्वार्टर फाइनल मैच के दौरान जब आमने -सामने हुए तो ये एक ऐसा मैच था जिसको कोई फैन शायद ही भूल पाया होगा |मैच में एक ऐसा गोल हुआ जो सदी का सबसे विवादस्पद गोल माना जाता है |इस गोल ने इंग्लैंड के विश्व विजेता बनने के सपने को चूर -चूर कर दिया |और उस गोल को ही हैंड ऑफ़ गॉड का नाम दिया गया | ये गोल उस समय अर्जेंटीना की कप्तानी कर रहे माराडोना दवरा मारा गया था |

डिएगो माराडोना

इस गोल को विवादस्पद इसलिए कहा गया क्योकि डिएगो माराडोना ने हेड करने की कोशिश की लेकिन हेड से पहले फूटबाल उनके हाथ से लगकर इंग्लैंड के गोलपोस्ट में चली गयी |और एक समय तो अर्जेंटीना के खिलाडी जश्न भी बना रहे थे और इंग्लैंड के खिलाडी रेफरी से बहस कर रहे थे लेकिन रेफरी ने उसे गोल करार दे दिया |उन्हें व्यापक रूप से आज तक का सबसे बेहतरीन फ़ुटबॉल खिलाड़ी माना जाता है|उनके समर्थक भारत में भी बहुत ज्यादा है जिसकी वजह से भारत के कई चर्चित लोगों ने उनके जाने पर दुःख प्रकट किया है |

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