ड्रोन क्या है ?

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ड्रोन

ड्रोन या UAV –

ड्रोन शब्द वैसे तो आप बहुत पहले सुनते आ रहे होंगे |लेकिन इसका बेसिक नेचर क्या है और ये कैसे काम करता है | इसके बारे में हमे अभी कम ही नॉलेज है |आज उसी नॉलेज को बढ़ाने का प्रयास रहेगा |ड्रोन को UAV भी कहा जाता है जिसका पूरा नाम है -उनमैंनेड एरियल वेहिकल है जिससे आशय ये है की एक तरह के रोबोट्स होते है जो उड़ने की क्षमता रखते है |जिन्हे रिमोट कण्ट्रोल से नियंत्रित किया जाता है |आर्मी या फ़ौज को इनको UAVs के नाम से ही जाना जाता है | लेकिन आम बोलचाल में इन्हे ‘ड्रोन ‘ कहा जाता है |ड्रोन का प्रयोग आर्मी के लिए मुफीद रहता है जहा भी इंसान की पहुंच मुश्किल होती है या कहे रिस्की होती है ये वह आसानी से पहुंच सकते है |

फ़ूड डिलीवरी भी ड्रोन से –

लेकिन तकनिकी का जब भी विकास होता है तो धरातल स्तर पर भी इसका प्रभाव पड़ता है | इसका साफ़ मतलब है की ये आम जनमानस के लिए बहुत ही उपयोगी है | धीरे -धीरे हर क्षेत्र में इसका उपयोग बड़ा है | फिल्म इंडस्ट्री में इस दौर इसका उपयोग सबसे ज्यादा है | कई -बेहतरीन शूट आजकल drone कैमरों से ही फिल्माया जाता है |कई यूटूबर भी इसका प्रयोग कर रहे है | और भविष्य में हो सकता है की फ़ूड डिलीवरी भी ड्रोन दवरा हो इसमें कोई संदेह नहीं है |ये 24 घंटे तक निगरानी कर सकते है वो भी पुरे हफ्ते भर तक |साथ में ये रियल टाइम इमेजनेरी इमेज भी भेज सकते है |इसलिए इन्हे कई नामो से नवाजा जा सकता है जैसे ‘ऑय ऑफ़ स्काई’ या ‘आसमान की आँख ‘ |ड्रोन टेक्नोलॉजी में हर दिन नये-नये इनोवेशन हो रहे है |

ड्रोनड्रोन उड़ते कैसे है –

drone में चार प्रोपेलर होते है जिन्हे आप इनके हाथ ही समझ लीजिये |ये प्रोपेलर फिक्स्ड और वर्टीकल ओरिएंटिड होते है |प्रत्येक में एक वेरिएबल और एक इंडिपेंडेंट स्पीड होती है |जिससे ये पूरी तरह आसानी से मूव कर सके |अलग -अलग ड्रोन के अलग -अलग मूवमेंट होते है |ये उनके प्रोपेलर के डिफरेंट टाइप के कॉम्बिनेशन की वजह से होता है |ये हेलीकाप्टर की तरह नहीं होते है जो नियंत्रित होते है प्रोपेलर ब्लेड से |इसलिए ये हेलीकाप्टर से पूरी तरह से जुदा है |इनमे क्वाडकॉप्टर्स का इस्तेमाल होता है जो की एक फ्लाइंग ड्रोन डिज़ाइन है |इसमें लिफ्ट करने और प्रोपेल करने चार रूटर्स का इस्तेमाल होता है |

ड्रोन
ड्रोन कैसे काम करते है-

इसे आप एक मानव रहित एयरक्राफ्ट भी कह सकते है |जिसका भार बहुत कम रखा जाता है इसका मतलब इसको बनाना में हल्का कम्पोज़िट मटेरियल प्रयोग में लाया जाता है |जिससे वेट को कम किया जा सके और नियंत्रण बढ़ाया जा सके |इन मटेरियल की वजह से ये बहुत अच्छी उड़ान भार सकते है जिससे आर्मी को इससे बहुत सुविधा हो जाती है |drone में कई तरह की टेक्नोलॉजी जुडी रहती है |जैसे -इंफ्रारेड कैमरा ,लेज़र, ग्लोबल पोजीशन सिस्टम ,इत्यादि | खास बात ये है की अगर आप कोई भी drone ले जिसका चाहे प्रयोग -कमर्शियल या आर्मी या कंस्यूमर के लिए हो |drone को कंट्रोल ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम से किया जाता है |unmanned aerial vehical system के दो भाग है एक ड्रोन खुद और दूसरा कंट्रोल सिस्टम |

ड्रोनड्रोन के प्रकार –

1 – रोटरी ड्रोन
2 – फिक्स्ड विंग ड्रोन

1 – रोटरी ड्रोन – इसमें भी कई प्रकार के ड्रोन होते है |
जैसे –
1 -सिंगल रोटर – इसमें केवल एक सिंगल रोटर होता है वही पीछे एक टेल रोटर होता है |जो इसे कंट्रोल और स्टेबिलिटी प्रदान करता है |
2 -त्रिकोप्टर – इसमें तीन शक्तशाली मोटर्स होते है |और तीन कंट्रोलर होते है चार गायरो और एक सर्वो मोटर भी होता है |

ड्रोन
3 -क्वाडकॉप्टर्स – सबसे ज्यादा प्रचलित इसमें चार रोटर ब्लेड का इस्तेमाल होता है |इसमें डीसी मोटर का इस्तेमाल होता है |इसमें दो मोटर क्लॉक वाइज घूमते है और दो मोटर एंटी -क्लॉक वाइज घूमते है |
4हेक्साकॉप्टर – इसमें 6 रोटर ब्लेड का इस्तेमाल किया जाता है इसमें तीन मोटर क्लॉक -वाइज और दूसरे तीन एंटी -क्लॉक वाइज घूमते है |इनकी लैंडिंग सबसे सेफ सुरक्षित होती है |
5 – ओक्टाकोप्टर – जैसा की नाम से समझ आता है इसमें 8 मोटर के साथ इतने प्रोपेलर लगे होते है |इसकी खासियत ये होती है की ये उड़ने की सबसे ज्यादा ऊचा क्षमता रखता है और स्टेबिलिटी भी बहुत अच्छी होती है |

फिक्स्ड विंग ड्रोन –

इस तरह का drone बहुत ही अलग होता है |इसकी डिज़ाइन भी मल्टी रोटर डिज़ाइन एकदम अलहदा होती है |इसमें आप विंग्स दे सकते है इसमें स्टेबिलिटी की समस्या होती है |और हवा में इनके मूवमेंट पर ग्रैविटनेशनल फ़ोर्स का बहुत असर दिखाई देता है |और ज्यादा भार भी उठाने सक्षम नहीं होते है |

रिटर्न होम ड्रोन टेक्नोलॉजी क्या है –

ड्रोन के क्षेत्र में दिनों दिन विकास हो रहा है |इसमें कई तरह की टेक्नोलॉजी का प्रयोग भी हो रहा है और जैसे रिटर्न होम ड्रोन टेक्नोलॉजी -इसमें drone के रिटर्न के तरीके को कई कैटगरी में बांटा गया है |ज्यादातर ड्रोन में तीन टेक्नोलॉजी का प्रयोग होता है |पहला जो पायलट दवरा इनिशिएट किया गया है जिसमे रिटर्न तो होम बटन अप्प में दबाते है |

दूसरा बैटरी लौ होने पर ड्रोन खुद ही होम पॉइंट लोकेशन उड़ के आ जायेगा |तीसरा अगर ड्रोन और कंट्रोलर के बीच लॉस ऑफ़ ट्रांसमिशन हो जाता है तब भी drone अपने होम पॉइंट लोकेशन के पास उड़के चला आएगा |इसलिए हमे तैयार रहना चाहिए टेक्नोलॉजी के इस बढ़ते विकास के दौर में कभी हमने घर के समान मंगाया हो ऑनलाइन और घंटी बजे और दरवाजे पर ड्रोन खड़ा हो |हमारे ये उद्देश्य यही रहता है आपको मनोरंजन के साथ कुछ अच्छी जानकारी भी दे सके |

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