दुनिया में सबसे कम उम्र में शांति का नोबेल पाने वाली महिला –

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नोबेल

दुनिया में सबसे कम उम्र में शांति का नोबेल पाने वाली महिला-

एक ऐसी लड़की जी मात्र १७ साल की उम्र में नोबेल पुरस्कार पाती है | जो की दुनिया तीसरे कोने से आती है | जिस उम्र लड़किया साईकिल चलाना सीखती है और उससे स्कूल जाती है उस उम्र में वो अपने घर शांति को नोबेल ले आती है | वो और कोई नहीं पाकिस्तान की मलाल यूसफज़ई है | इनका जन्म १२ जुलाई १९९७ को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में हुआ था | इनके अंदर पहले से ही शिक्षा के प्रति झुकाव था क्योकि फॅमिली बैकग्रॉउंड भी उस तरह का था | इनके फादर ज़िआउद्दीन यूसफज़ई पाकिस्तानी डिप्लोमैट और सामाजिक कार्यकर्ता थे और शिक्षा के लिए लड़ते थे |

जब पाकिस्तान के इस इलाके में तालिबान का दखल बढ़ा तो वहाँ के सब लोगों के जीवन पे इसका असर देखने को मिला | स्कूल बंद हो रहे थे और वो तरह -तरह के फतवे जारी कर रहे है | और इन ज्यादती के खिलाफ वो ब्लॉग लिखती रही और फेसबुक पे पोस्ट डालती रही है | और कई चैनल को इंटरव्यू भी देती रही | और उसे जान से मारने की धमकिया मिलती रही की आप इंटरव्यू में मत आयो | लेकिन वो बिना डरे इस चीज को करती रही |

मलाला यूसफज़ई पे हमला-

एक दिन  ९ अक्टबर २०१२ को मलाला स्कूल से घर लौट रही थी | एक चेहरे पे मास्क पहना आदमी गन के साथ बस को रोकता है और मलाला को पहचानता है और उसके सर पे फायर करता है | जिससे मलाला जख्मी हो जाती है बहुत ही गंभीर रूप से क्योकि गोली बहुत ही नजदीक से चलायी गयी थी | और उसे तुरंत एयरलिफ्ट करके पेशावर के मिलेट्री हॉस्पिटल ले जाया जाता है और ५ घंटे ऑपरेशन के बाद उसके बॉडी से बुलेट निकली जाती है |और तब ये खबर वायरल हो जाती है और कई देश उसका अच्छा ट्रीटमेंट हो सके अपने देश के लिए ऑफर करते है इस बहादुर लड़की को और पेशावर से ये क्वीन एलिज़ाबेथ हॉस्पिटल इंग्लैंड में इसको ले जाया जाता है | और ७ दिन बाद ये कोमा से वापस आती है | और ये सोचती की भगवान का धन्यवाद की मैं मरी नहीं हूँ ये अपने को अनचाहे सहर में पाती है जहा की भाषा इसको नहीं समझ आती और तो और आधे चेहरे पे परायलसिस हुआ है |

नोबेल

बहादुर लड़की मलाला-

गर्ल की शिक्षा के लिए ये लड़की अपनी जान तक पे खेल गयी | और इसकी बहादुरी की तारीफ बराक ओबामा ने की और इसके फोडेशन को ऐंजिलिना जोली ने २ लाख डॉलर दान भी किया लड़कियों की शिक्षा के लिए  |  और मरने का अनुभव लेने के बाद कई लोग अपने काम को छोड़ देते है लेकिन मलाला ऐसी नहीं थी | और १२ जुलाई २०१३ को अपने १६ वर्ष की उम्र में वो भाषण यूनाइटेड नेशन में दे रही थी | ये कहानी एक बहादुर लड़की की है | और सबसे कम उम्र में शांति को नोबेल पाने के लिए हक़दार हुई |

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