नया साल1जनवरी से ही क्यों ?

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नया साल

नया साल और जूलियस सीजर

नया साल के बारे में आपने कभी इस बात पे विचार किया या आपके मन में ये सवाल नहीं कौंधा की हर बार या नया साल 1 जनवरी को ही क्यों होता है। यूरोप और दुनिया के अधिकतर देशों में नया साल 1 जनवरी से शुरू माना जाता है लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था और अभी भी दुनिया के सारे देशों में 1 जनवरी से नए साल की शुरुआत नहीं मानी जाती है।500 साल पहले तक अधिकतर ईसाई बाहुल्य देशों में 25 मार्च और 25 दिसंबर को नया साल मनाया जाता है।1 जनवरी से नया साल मनाने की शुरुआत पहली बार 45 ईसा पूर्व रोमन राजा जूलियस सीजर ने की थी।रोमन साम्राज्य में कैलेंडर का चलन रहा था।

पहला कैलेंडर 10 महीने क्यों होता था –

पृथ्वी और सूर्य की गणना के आधार पर रोमन राजा नूमा पोंपिलुस ने एक नया कैलेंडर लागू किया और यह कैलेंडर 10 महीने का था क्योंकि तब एक साल को लगभग 310 दिनों का माना जाता था और तब एक सप्ताह भी आठ दिनों का माना जाता था।नूमा ने मार्च की जगह जनवरी को साल का पहला महीना माना।जनवरी नाम रोमन देवता जैनुस के नाम पर है जैनुस रोमन साम्राज्य में शुरुआत का देवता माना जाता था जिसके दो मुंह हुआ करते थे।

आगे वाले मुंह को आगे की शुरुआत और पीछे वाले मुंह को पीछे का अंत माना जाता थ।मार्च को पहला महीना रोमन देवता मार्स के नाम पर माना गया था।लेकिन मार्स युद्ध का देवता था नूमा ने युद्ध की जगह शुरुआत के देवता के महीने से साल की शुरुआत करने की योजना की।हालांकि 153 ईसा पूर्व तक 1 जनवरी को आधिकारिक रूप से नए साल का पहला दिन घोषित नहीं किया गया।

जुलाई महीने का नाम कैसा पड़ा –

46 ईसा पूर्व रोम के शासक जूलियस सीजर ने नई गणनाओं के आधार पर एक नया कैलेंडर जारी किया।इस कैलेंडर में 12 महीने थे। जूलियस सीजर ने खगोलविदों के साथ गणना कर पाया कि पृथ्वी को सूर्य के चक्कर लगाने में 365 दिन और छह घंटे लगते हैं इसलिए सीजर नेरोमन कैलेंडर को 310 से बढ़ाकर 365 दिन का कर दिया।साथ ही सीजर ने हर चार साल बाद फरवरी के महीने को 29 दिन का किया जिससे हर चार साल में बढ़ने वाला एक दिन भी एडजस्ट हो सके।

साल 45 ईसा पूर्व की शरुआत 1 जनवरी से की गई।साल 44 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर की हत्या कर दी गई।उनके सम्मान में साल के सातवें महीने क्विनटिलिस का नाम जुलाई कर दिया गया। ऐसी ही आठवें महीने का नाम सेक्सटिलिस का नाम अगस्त कर दिया गया।10 महीने वाले साल में अगस्त छठवां महीना होता था।रोमन साम्राज्य जहां तक फैला हुआ था वहां नया साल एक जनवरी से माना जाने लगा। इस कैलेंडर का नाम जूलियन कैलेंडर था।

रोमन साम्राज्य का पतन के बाद ईसाई धर्म के लोग नए साल के लिए अड़ गए –

पांचवी शताब्दी आते आते रोमन साम्राज्य का पतन हो गया था। यूं तो 1453 में ओटोमन साम्राज्य द्वारा पूरे साम्राज्य के राज को खत्म करने तक रोमन साम्राज्य चलता रहा लेकिन पांचवी शताब्दी तक रोमन साम्राज्य बेहद सीमित हो गया।रोमन साम्राज्य जितना सीमित हुआ ईसाई धर्म का प्रसार उतना बढ़ता गया। ईसाई धर्म के लोग 25 मार्च या 25 दिसंबर से अपना नया साल मनाना चाहते थे।

ईसाई मान्यताओं के अनुसार 25 मार्च को एक विशेष दूत गैबरियल ने ईसा मसीह की मां मैरी को संदेश दिया था कि उन्हें ईश्वर के अवतार ईसा मसीह को जन्म देना है।25 दिसंबर को ईसा मसीह का जन्म हुआ था।इसलिए ईसाई लोग इन दो तारीखों में से किसी दिन नया साल मनाना चाहते थे।25 दिसंबर को क्रिसमस मनाया जाता है इसलिए अधिकतर का मत 25 मार्च को नया साल मनाने का था।

जूलियन कैलेंडर समय की गणना में खामी-

लेकिन जूलियन कैलेंडर में की गई समय की गणना में थोड़ी खामी थी. सेंट बीड नाम के एक धर्माचार्य ने आठवीं शताब्दी में बताया कि एक साल में 365 दिन 6 घंटे ना होकर 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड होते हैं।13वीं शताब्दी में रोजर बीकन ने इस थ्योरी को स्थापित किया इस थ्योरी से एक परेशानी हुई कि जूलियन कैलेंडर के हिसाब से हर साल 11 मिनट 14 सेकंड ज्यादा गिने जा रहे थे।इससे हर 400 साल में समय 3 दिन पीछे हो रहा था।ऐसे में 16वीं सदी आते-आते समय लगभग 10 दिन पीछे हो चुका था|

समय को फिर से नियत समय पर लाने के लिए रोमन चर्च के पोप ग्रेगरी 13वें ने इस पर काम किया।1580 के दशक में ग्रेगरी 13वें ने एक ज्योतिषी एलाय सियस लिलियस के साथ एक नए कैलेंडर पर काम करना शुरू किया।इस कैलेंडर के लिए साल 1582 की गणनाएं की गईं।इसके लिए आधार 325 ईस्वी में हुए नाइस धर्म सम्मेलन के समय की गणना की गई।इससे पता चला कि 1582 और 325 में 10 दिन का अंतर आ चुका था।ग्रेगरी और लिलियस ने 1582 के कैलेंडर में 10 दिन बढ़ा दिए।साल 1582 में 5 अक्टूबर से सीधे 15 अक्टूबर की तारीख रखी गई।

ग्रेगोरियन कैलेंडर में सभी त्रुटियों को दूर कैसे किया –

साथ ही लीप ईयर के लिए नियम बदला गया।अब लीप ईयर उन्हें कहा जाएगा जिनमें 4 या 400 से भाग दिया जा सकता है सामान्य सालों में 4 का भाग जाना आवश्यक है।वहीं शताब्दी वर्ष में 4 और 400 दोनों का भाग जाना आवश्यक है ऐसा इसलिए है क्योंकि लीप ईयर का एक दिन पूरा एक दिन नहीं होता है उसमें 24 घंटे से लगभग 46 मिनट कम होते हैं।

जिससे 300 साल तक हर शताब्दी वर्ष में एक बार लीप ईयर ना मने और समय लगभग बराबर रहे लेकिन 400वें साल में लीप ईयर आता है और गणना ठीक बनी रहती है। जैसे साल 1900 में 400 का भाग नहीं जाता इसलिए वो 4 से विभाजित होने के बावजूद लीप ईयर नहीं था जबकि साल 2000 लीप ईयर था।इस कैलेंडर का नाम ग्रेगोरियन कैलेंडर है इस कैलेंडर में नए साल की शुरुआत1 जनवरी से होती हैइसलिए नया साल 1 जनवरी से मनाया जाने लगा है।

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