नीम को क्यों पेटेंट कराने चला था अमेरिका ?

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नीम

नीम को क्यों पेटेंट कराने चला था अमेरिका ?

नीम का पेड़ हमारे गांव में बहुत ही पहले से हुआ करते है हर घर के पास एक पेड़ नीम का होता ही था चाहे और किसी पेड़ का हो या नहीं |लोगों के पहले से पता था ये कितना गुड़कारी था | इसकी महत्ता हमारे यहाँ कई वर्षों से चली आ रही थी | नीम का उपयोग अनेक रोगों के समाधान के लिए किया जाता था | नीम के फल और बीज से तेल निकला जाता है | और इस तेल का उपयोग त्वचा सम्बन्धी बीमारी के विशेष रूप से किया जाता है |

नीम के पत्ते एक्ज़िमा और सोरायसिस जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं से निजात दिलाते हैं। इसी प्रकार नीम की छाल का उपयोग अनेक चुरणों में किया जाता है|भारत में नीम का उपयोग चार हज़ार वर्षों से अधिक होता आ रहा है। वेदों में नीम को “सर्वरोग निवारिणी” भी कहा जाता है। इसका अर्थ यह होता है कि नीम हमारे शरीर की सभी प्रकार के रोगों से रक्षा करता है।

नीम कैंसर रोग के लिए भी लाभदायक है –

नीम की पत्तियाँ प्रोस्टेट कैंसर की संभावनाओं को कम करती हैं। नीम की पत्तियों में कैंसर बनाने वाली कोशिकाओं के विरुद्ध कार्य करने की क्षमता पायी जाती है।नीम में पाए जाने वाले तत्व चिकित्सा एजेंट कहलाते हैं। ये कोशिकाओं के विभाजन के समय चेक प्वाइंटस को खराब होने से बचाते हैं।इस प्रकार कोशिकाएँ अनियंत्रित होकर बटने नहीं पाती हैं और शरीर कैंसर से बच जाता है।

मुहासों को ठीक करता है –

नीम की पत्तियों में अर्क पाया जाता है जो मुहासों को ठीक करने के लिए उपयोग में लाया जाता है | एक लेटर पानी में नीम को ३० पत्तियां उबालों | तब तक जब तक पानी हरा ना हो जाये | इसको फिर एक बॉटल में रख लो और हर रात रुई के साथ इसको अपने चहरे पे लगाओ | ये रोम छिद्र को खोलने का काम करता है जिससे मुहासों ठीक हो जाते है |

ये पेट में पाचन सम्बन्धी समस्या को दूर करता है –

नीम के पत्तियों में अर्क होता है जिससे ये हमारे पेट में अम्ल के स्तर मैंटेन करता है और ये गैस की समस्या को भी दूर करता है | इसीलिए कहा गया है -नीम एक गुण अनेक |

अस्थमा के उपचार में नीम बहुत सहायक होता है –

नीम का तेल अस्थमा के उपचार में चमत्कारिक रूप से सहायता प्रदान करता है।यदि आप को कफ, बुखार और खाँसी की समस्या हो रही है तो नीम के तेल की कुछ बूंदों का प्रतिदिन सेवन करने से इन सबसे राहत मिलती है।एक बात का आवश्यक रूप से ख्याल रखना चाहिए कि नीम के तेल की बूंदें अधिक मात्रा में नहीं लेनी चाहिए बल्कि धीरे धीरे करके उनकी मात्रा को बढ़ाना चाहिए।

मधुमेह में भी नीम ये बहुत गुणकारी है –

नीम प्राकृतिक रूप से कड़वा और कसैला होता है।एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि नीम में हाईपोग्लाइसेमिक गुण पाए जाते हैं। ये रक्त में पाए जाने वाले शुगर के कणों को घटाकर मधुमेह की सम्भावनाओं को कम करते हैं।इसके अतिरिक्त नीम मधुमेह के कारण होने वाले तनाव को भी कम करने की क्षमता रखता है।एक अध्ययन में नीम के एंटीडायबिटिक प्रभावों को देखा गया जोकि मधुमेह की रोकथाम व उपचार में सहायक होते हैं।

नीम को अमेरिका ने कोशिश की कराने की पेटेंट –

नीम इतने गुण है की कोई भी इससे आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता है जबकि हम इसका प्रयोग वर्षों से करते आ रहे है | लेकिन ३० सितम्बर १९९७ को एक अंग्रेज ने इसे पेटेंट कराने पंहुचा | इससे पुरे देश में हड़कम मच गया और इंडियन वैज्ञानिक ने इसका विरोध किया | और उन्होंने उनके पेटेंट को अस्वीकार कर दिया | फिर जाके बाद में दलील देने के बाद यूरोप पेटेंट ऑफिस ने अपना फैसला वापस ले लिया |

आप सोचिये की जो चीज हम वर्षों से प्रयोग करते आ रहे है उसके लिए भी कोई दूसरा देश ये कह दे की ये हमने खोजा है और हम इसे पेटेंट करेंगे | लेकिन हमने अपने नीम को फिर से पा लिया जो की हमारा ही था | इसलिए कहते है अपनी चीजें को कदर करना चाहिए |

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