पानी का जन्म और पानी के कमी का प्रभाव –

0
796
पानी (2)

पानी हमारी नैसर्गिक जरुरत –

पानी एक शब्द ही नहीं हमारी नैसर्गिक जरुरत है और इसलिए जब विज्ञानं के माध्यम से हम किसी ग्रह को खोजने निकलते है तो सबसे पहले उस ग्रह पे पानी खोजते है |हमने इस समय कई प्रगति की हम मंगल गए हम चन्द्रमा को भी छुआ लेकिन वहाँ भी हम पानी ही खोजते रहे है | आखिर हो भी क्यों ना पानी एक रासायनिक संगठन से मिलकर बना है जिसका अणु दो हाइड्रोजन परमाणु और ऑक्सीजन परमाणु से बना है और ऑक्सीजन तो मनुष्य की जीने के लिए ही सहायक है | इसीलिए लोगों का कहना है ‘जल है तो जीवन है ‘|वैसे तो हर जीव जीवन का आधार है | आम तौर में लोग जल शब्द का प्रयोग द्रव्य अवस्था के लिए करते है लेकिन ये ठोस और गैसीय अवस्था में भी पाया जाता है |

जल का रासायनिक और भौतिक गुण-

पानी (6)

जल को अच्छे से समझने के लिए उसके भीतर के विज्ञानं को समझना बहुत ही आवश्यक है | यहाँ आपको हम उसके हर गुण से अवगत कराएँगे | आये समझते है की रसायन विज्ञानं के माध्यम से जल कैसे बना है | जल एक रासायनिक पदार्थ है और उसका रासायनिक सूत्र -H2O है जल के एक अणु में दो हाइड्रोजन के परमाणु सहसंयोजक बंध के द्वारा एक ऑक्सीजन के परमाणु से जुडे़ रहते हैं।जल समान्य ताप में और दबाव में एक फीका और बिना गंध वाला तरल है|जल पारदर्शीय होता है और इसलिए जलीय पौधे इसमें जीवित रहते है क्योंकि उन्हे सूर्य की रोशनी मिलती रहती है। केवल शक्तिशाली पराबैंगनी किरणों का ही कुछ हद तक यह अवशोषण कर पाता है।

बर्फ जल के ऊपर तैरता क्यों है –

जल एक बहुत प्रबल विलायक(घुलने वाला ) है, जिसे सर्व-विलायक भी कहा जाता है। वो पदार्थ जो जल में भलि भाँति घुल जाते है जैसे लवण, शर्करा, अम्ल, क्षार और कुछ गैसें विशेष रूप से ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड उन्हे हाइड्रोफिलिक (जल को प्यार करने वाले) कहा जाता है, जबकि दूसरी ओर जो पदार्थ अच्छी तरह से जल के साथ मिश्रण नहीं बना पाते है जैसे वसा और तेल, हाइड्रोफोबिक (जल से डरने वाले) कहलाते हैं|जल का घनत्व अधिकतम 3.98 °C पर होता है। जमने पर जल का घनत्व कम हो जाता है और यह इसका आयतन 9% बढ़ जाता है। यह गुण एक असामान्य घटना को जन्म देता जिसके कारण बर्फ जल के ऊपर तैरती है और जल में रहने वाले जीव आंशिक रूप से जमे हुए एक तालाब के अंदर रह सकते हैं |

पानी (5)क्योंकि तालाब के तल पर जल का तापमान 4 °C के आसपास होता है।शुद्ध जल की विद्युत चालकता कम होती है, लेकिन जब इसमे आयनिक पदार्थ सोडियम क्लोराइड मिला देते है तब यह आश्चर्यजनक रूप से बढ़ जाती है|जल का जो वाष्प बनने की प्रक्रिया में वायुमंडलीय दबाव बहुत करक है जहा वायुमंडलीय दबाव कम होता है वहाँ जल कमसेंटीग्रेट पे ही उबाल जाता है जबकि जहा वायुमंडलीय दबाव ज्यादा होता है वहाँ सैकड़ों सेंटीग्रेट पे भी द्रव्य ही बना रहता है |जल का ये गुण भी बहुत ही अजीब है |लेकिन जल को समझना जरुरी होता है |

जल की उत्पति –

अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार पानी, पृथ्वी के जन्म के समय से ही मौजूद है। उनका कहना है कि जब सौर मण्डलीय धूल कणों से पृथ्वी का निर्माण हो रहा था, उस समय, धूल कणों पर पहले से ही पानी मौजूद था। यह परिकल्पना, उसी स्थिति में ग्राह्य है जब यह प्रमाणित किया जा सके कि ग्रहों के निर्माण के समय की कठिन परिस्थितियों में सौर मण्डल के धूल कण, पानी की बूँदों को सहजने में समर्थ थे।

पानी (3)लेकिन कुछ वैज्ञानिक ये नहीं मानते उनका कहना है की पृथ्वी के जन्म के समय के कुछ दिन बाद पानी से सन्तृप्त करोड़ों धूमकेतुओं तथा उल्का पिंडों की वर्षा हुई। धूमकेतुओं तथा उल्का पिंडों का पानी धरती पर जमा हुआ और उसी से महासागरों का जन्म हुआ|
खगोलीय वैज्ञानिक का मानना है की पृथ्वी पर पानी का आगमन ४०० करोड़ साल पहले ही हुआ होगा | वो ऊपर दी हुई दोनों सोच को लेकर चलते है और आधुनिक खोज के साथ ये बताता है की पृथ्वी के जन्म के समय पानी मौजूद होगा लेकिन कम मात्रा में और फिर कुछ समय बाद पानी से सन्तृप्त करोड़ों धूमकेतुओं तथा उल्का पिंडों की वर्षा हुई जिससे महासागरों का जन्म हुआ |हाड्रोजन और ऑक्सीजन के संयोग से पानी का जन्म हुआ इसका साफ़ मतलब है की ये प्रक्रिया धरती के ठन्डे होने के बाद ही हुई होगी | ढेर सारी जानकारियों के बावजूद अभी भी आधुनिक विज्ञानं पानी की उत्पति के सही जगह सही समय के लिए उधेड़बून में ही है |

पानी की समस्या और उसका प्रभाव-

पानीदुनिया के भू वैज्ञानिक पहले से सबको सचेत करते आ रहे है जल का अत्यधिक दोहन से बचे |नहीं तो जिस रफ़्तार से आबादी बढ़ रही है और अद्योगीकरण के कारण पानी की समस्या विकराल रूप ले लेगी |कहा तो ये भी जाता है की अगला विश्व युद्ध पानी को लेकर होगा लेकिन कभी -कभी ये भी कहा जाता है की अगला विश्व युद्ध तेल को लेकर होगा | पानी की समस्या तो पुरे विश्व में है लेकिन भारत में ये समस्या तीव्र गति से बढ़ रही है | वैसे तो कहा जाता है की पृथ्वी 71 % पानी से घिरी है |उसमे महासागरों का जल भी शामिल है |

भारत में जल के दो माध्यम है –

1-नदिया 2– भूमिगत जल
इन दोनों में इनदिनों भरी गिरावट आयी है |कई अनुमान पे आकड़े दिए गए है जिस प्रकार लोग पानी का दोहन कर रहे है और आबादी बढ़ रही है भारत में तो पानी की जो मांग है 2025 पहुंचते -पहुंचते 735 बी. सी. ऍम .(बिलियन क्यूबिक मीटर) तक पहुंच जाएगी और ये स्थिर नहीं क्योकि कभी डिमांड ज्यादा भी हो जाती है तो ये 795 बी. सी. ऍम .(बिलियन क्यूबिक मीटर)तक भी पहुंच सकती है जो 90 से पहले कम थी और हमारे देश की आबादी भी कम थी | इधर हम चीन को होड देने में लगे है की हम कब जनसंख्या में उसके ऊपर हो जाये |

पानी (8)

अब देखते है हमारे जल संसाधनो में कितना बिलियन क्यूबिक मीटर पानी है जो हमे हमारी नदियों से मिलता है | गंगा ,सिंधु ,ब्रह्मपुत्र ,गोदावरी ,कृष्णा ,कावेरी , महानदी ,स्वर्णरेखा ,नर्मदा ,ताप्ती ,साबरमती ,इन सबके पिने योग्य पानी अगर मिला दिया जाये तो हमारे पास 1100 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद है | ये इससे बढ़ेगा नहीं घटेगा ही | इसलिय विचार हमे करना है न की कोई और करेगा |

पानी (9)भारत एक कृषि प्रधान देश है यहाँ की आधी आबादी कृषि पे निर्भर है और कृषि का कम् सिचाई दवरा होता है और भारतीय किसान भूमिगत जल का प्रयोग इसमें लाते है | भूमिगत जल का आकलन करना थोड़ा कठिन है क्योकि ये पानी जो सतह का है उससे रिस -रिस के ही नीचे पहुँचता है |ये पानी भी नदियों के सामान नीचे बहता है | अगर नीचे इसका मार्ग रुकता है तो ये खारा हो जाता है और पीने योग्य नहीं होता है |भूमिगत पानी का उपयोग समान्यता जनता करती है और इधर बीच इसका जलस्तर घटता ही जा रहा है और तो और पानी की गुणवत्ता में कमी आ रही है |

इधर भारत में वाटर प्योरिफायर और RO बढ़ता प्रयोग –

पानी (10)

लोगों अपने घरों में ऑरो लगा रहे है |पानी को शुद्ध करके पीने के लिए |वाटर प्योरिफायर बनाने वाली कंपनी कई तरह के वाटर प्योरिफायर बना रही है कोई अल्ट्रा वाटर प्योरिफायर बना रहा है | ये भी पानी को शुद्ध करने का तरीका है |रिवर्स ओसमोसिस प्रक्रिया ( REVERSE OSMOSIS ) इसको शार्ट में RO कहा जाता है ये ही क्रिया सबसे ज्यादा प्रचलित है |इसमें जल को एक प्रेशर के तहत एक झिल्ली से आर -पार भेजा जाता है और जल में उपस्थित अधिक सांद्रता वाले पदार्थ झिल्ली में ही रह जाते है |और शुद्ध जल झिल्ली के पार चला जाता है |एक RO का प्रयोग में 5 वर्षों तक कर सकते है |इस पूरी प्रक्रिया में RO जल से हर तरह के गंदलापन , अकार्बनिक आयनों को जल से अलग कर देता है |इस तकनीक में बहुत पैसा लगता है और पानी की बर्बादी भी होती है |लेकिन पानी अगर शुद्ध नहीं है तो लोग उसे पीने योग्य बनाने के लिए विवश है |

भारत के बड़े शहरों पानी की बिकरालता की दस्तक –

पानी (7)

इसलिए भारत के लोगों और यहाँ की सरकारों को इस बारे में सोचना ही होगा नहीं तो ये बिकराल समस्या कब आके आपके बगल में खड़ी हो जाएगी आपको पता भी नहीं चलेगा |भारत के कई बड़े शहरों में ये समस्या आम हो चुकी है उनका यहाँ का जलस्तर बहुत ही नीचे जा चूका है कई लोग अपने घरों समरसेबल लगा के काम चला रहे है तो जिसके पास ये व्यवस्था नहीं है वो पूरी तरह से सरकार के पानी के टैंक पे निर्भर है |ऐसा ही महारष्ट्र के शहरों का हाल है लॉक डाउन में भी कई जगह से ट्रेनों में पानी भरकर उन जिलों और राज्यों में पहुंचाया गया |

स्लोगन -‘जल है तो कल है ‘- पे गौर फरमाए –

और इसलिए अगर समस्या दर पे खड़ी है तो उसको नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए |सबसे पहले हमे अरब देशों से सीखना चाहिए की पानी को कैसे बचाये |और कम से पानी की बर्बादी करे | नहीं तो आबादी बढ़ने से वातारण भी अनियंत्रित हो रहा है और उसका हमारे एको-सिस्टम पे बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ रहा है |हम पेड़ों को काट कर रहने के लिए जगह बना रहे है लेकिन अगर पानी ही न हुआ तो उस जगह का आप क्या करेंगे |इसलिए मेरा कहना है -‘जल है तो कल है ‘ इस स्लोगन का आप ध्यान रखे और दूसरों को भी ध्यान दिलाये|

आप इसे पढ़ना भी पसंद कर सकते है:-एमएफ हुसैन-भारत का सबसे महंगे पेंटर ने जूते पहनना क्यों छोड़ दिया ?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here