पेगासस कैसे करता है जासूस का काम –

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पेगासस

पेगासस और भारत

पेगासस को इसराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ने तैयार किया है।बांग्लादेश समेत कई देशों ने पेगासस स्पाईवेयर ख़रीदा है।इसे लेकर पहले भी विवाद हुए हैं।मेक्सिको से लेकर सऊदी अरब की सरकार तक पर इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं। व्हाट्सऐप के स्वामित्व वाली कंपनी फ़ेसबुक समेत कई दूसरी कंपनियों ने इस पर मुकदमे किए हैं।जैसा की अभी खबरे आ रही है की इसी की मदद से भारत में कई पत्रकार और राजनेता की जासूसी की गयी है। इसलिए हमने भी सोचा की आपको ये बताया जाये की आखिर ये क्या बला है और ये कैसे काम करता है और ये आपके ही फ़ोन से आपकी की जासूसी कैसे करता है।

Pegasus है क्या –

पेगासस एक स्पाइवेयर है जिसे इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ ने बनाया है।ये एक ऐसा प्रोग्राम है जिसे अगर किसी स्मार्टफ़ोन फ़ोन में डाल दिया जाए, तो कोई हैकर उस स्मार्टफोन के माइक्रोफ़ोन, कैमरा, ऑडियो और टेक्सट मेसेज, ईमेल और लोकेशन तक की जानकारी हासिल कर सकता है। पेगासस आपको एन्क्रिप्टेड ऑडियो सुनने और एन्क्रिप्टेड संदेशों को पढ़ने लायक बना देता है।एन्क्रिप्टेड ऐसे संदेश होते हैं जिसकी जानकारी सिर्फ मेसेज भेजने वाले और रिसीव करने वाले को होती है।जिस कंपनी के प्लेटफ़ॉर्म पर मेसेज भेजा जा रहा, वो भी उसे देख या सुन नहीं सकती है।पेगासस के इस्तेमाल से हैक करने वाले को उस व्यक्ति के फ़ोन से जुड़ी सारी जानकारियां मिल सकती हैं।

2016 में संयुक्त अरब अमीरात के इसकी पहली शिकायत –

इससे से जुड़ी जानकारी पहली बार साल 2016 में संयुक्तअरब अमीरात के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर की बदौलत मिली।उन्हें कई एसएमएस प्राप्त हुए थे, जो उनके मुताबिक संदिग्ध थे। उनका मानना था कि उनमें लिंक गलत मकसद भेजे गए थे।उन्होंने अपने फोन को टोरंटो विश्वविद्यालय के ‘सिटीजन लैब’ के जानकारों को दिखाया।उन्होंने एक अन्य साइबर सुरक्षा फर्म ‘लुकआउट’ से मदद ली। मंसूर का अंदाज़ा सही था।अगर उन्होंने लिंक पर क्लिक किया होता, तो उनका आइफ़ोन मैलवेयर से संक्रमित हो जाता।इस मैलवेयर को पेगासस का नाम दिया गया।

लुकआउट के शोधकर्ताओं ने इसे किसी “एंडपॉइंड पर किया गया सबसे जटिल हमला बताया ” गौर करने वाली बात ये है कि आमतौर पर सुरक्षित माने जाने वाले एप्पल फ़ोन की सुरक्षा को ये प्रोग्राम भेदने में कामयाब हुआ।हालांकि एप्पल इससे निपटने के लिए अपडेट लेकर आया था।मेक्सिको की सरकार पर पेगासस की मदद से मोबाइल की जासूसी करने वाला उपकरण बनाने का आरोप लगा।

2017 में सका इस्तेमाल मेक्सिको में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और भ्रष्टाचाररोधी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ किया जा रहा था। मैक्सिको के जानेमाने पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी सरकार पर मोबाइल फोन से जासूसी करने का आरोप लगाते हुए इसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया है। पेगासस सॉफ्टवेयर मैक्सिको की सरकार को इसरायली कंपनी एनएसओ ने इस शर्त पर बेचा थी कि वो इसका इस्तेमाल सिर्फ़ अपराधियों और चरमपंथियों के ख़िलाफ़ करेंगे।इस सॉफ्टवेयर की खासियत यह है कि यह स्मार्टफोन और मॉनिटर कॉल्स, टेक्स्ट्स और दूसरे संवादों का पता लगा सकता है।यह फोन के माइक्रोफोन या कैमरे को एक्टिवेट भी कर सकता है।

आरोप और जवाब

एक सऊदी पत्रकार की हत्या में इसका इस्तेमाल किया गया है इसका आरोप है औरकंपनी पर सऊदी सरकार को सॉफ्टवेयर देने का भी आरोप है, जिसका कथित तौर पर पत्रकार जमाल खशोग्जी की हत्या से पहले जासूसी करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। इन आरोपों पर कंपनी का कहना है की एनएसओ कंपनी हमेशा से दावा करती रही है कि ये प्रोग्राम वो केवल मान्यता प्राप्त सरकारी एजेंसियों को बेचती है और इसका उद्देश्य “आतंकवाद और अपराध के खिलाफ लड़ना” है।वह कभी भी अपने स्पाइवेयर का उपयोग नहीं करती है – केवल संप्रभु सरकारें करती हैं। इसलिए कहा जाता है की आपके फ़ोन ही आपकी कब जासूसी करने लगेंगे आपको हवा भी नहीं लगेगी।

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