फ्रांसीसी मैगज़ीन ने क्यों फिर छापा विवादित कार्टून –

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फ्रांसीसी मैगज़ीन

फ्रांसीसी मैगज़ीन क्यों फिर छापा विवादित कार्टून –

हा हम फ्रांसीसी मैगज़ीन शार्ली ऐब्डो की बाद कर रहे है यही कार्टून छपने की वजह से 7 जनवरी 2015 में इसी मैगज़ीन के कार्यालय में दो बन्दूक धारी घुस आया और ताबतोड़ फायरिंग करने लगे जिसमे 12 लोगों की जान चली गयी | जिसमें फ़्रांस के पेरिस में व्यंग्य पत्रिका शार्ली ऐब्डो के दफ़्तर पर दो हमलावरों ने हमला कर 12 लोगों को जान से मार दिया| ये हमलावर इस्लाम समर्थित नारे लगा रहे थे |फ्रांस की ये व्यंग पत्रिका उसके बाद से बहुत चर्चा में आ गयी थी |

बात फरवरी 2006 की है जब इस फ्रांसीसी मैगज़ीन का नाम पैगंबर मुहम्मद का कार्टून छापने को लेकर चर्चा में आया था, जिसे इस्लाम में ईशनिंदा माना जाता है|लेकिन ये कार्टून मूल रूप से सबसे पहले डेनिश अख़बार ने छापा था |उसके बाद इस मैगज़ीन ने छापा |इस कार्टून को लेकर मुस्लिम जगत में रोष छा गया था| नस्लवाद रोधी कानूनों को लेकर अदालत में घसीटे जाने के बावजूद साप्ताहिक अखबार ने पैगंबर के कार्टून को प्रकाशित करना जारी रखा। इससे पहले संपादक स्टीफन को जान से मारने की धमकियां मिली थी और उन्हें पुलिस हिफाज़त मुहैया करायी गई थी|

फ्रांसीसी मैगज़ीन

इन कार्टूनों का दुबारा ऐसे समय में छपना जब एक दिन बाद ही 7 जनवरी 2015 हुए हमले में मदद करने वाले 14 लोगों के खिलाफ ट्रायल शुरू होने वाला है | मैगज़ीन ने कहा है की “-ना हम कभी झुके थे न कभी झुकेंगे ” इसपर फ्रांस के राष्ट्रपति की कमेंट आया है उन्होंने कहा है की – “हमारे देश के प्रेस की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और इसपे मैं कोई कमेंट नहीं करूँगा “.

मैगज़ीन पे हमले का अध्याय-

बात फरवरी 2006 की है जब इस मैगज़ीन का नाम पैगंबर मुहम्मद का कार्टून छापने को लेकर चर्चा में आया था, जिसे इस्लाम में ईशनिंदा माना जाता है|लेकिन ये कार्टून मूल रूप से सबसे पहले डेनिश अख़बार ने छापा था |उसके बाद इस मैगज़ीन ने छापा |इस कार्टून को लेकर मुस्लिम जगत में रोष छा गया था| नस्लवाद रोधी कानूनों को लेकर अदालत में घसीटे जाने के बावजूद साप्ताहिक अखबार ने पैगंबर के कार्टून को प्रकाशित करना जारी रखा। इससे पहले संपादक स्टीफन को जान से मारने की धमकियां मिली थी और उन्हें पुलिस हिफाज़त मुहैया करायी गई थी|

फ्रांसीसी मैगज़ीन (2)

इन कार्टूनों का दुबारा ऐसे समय में छपना जब एक दिन बाद ही 7 जनवरी 2015 हुए हमले में मदद करने वाले 14 लोगों के खिलाफ ट्रायल शुरू होने वाला है | मैगज़ीन ने कहा है की “-ना हम कभी झुके थे न कभी झुकेंगे ” इसपर फ्रांस के राष्ट्रपति की कमेंट आया है उन्होंने कहा है की – “हमारे देश के प्रेस की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और इसपे मैं कोई कमेंट नहीं करूँगा ”

मैगज़ीन की कार्टून छापने अपनी दलील है –

मैगज़ीन की भी इस कार्टून को दुबारा छापने की अपनी दलील है उनका कहना है की 2015 के हमले के बात लोग उस कार्टून को प्रकशित करने की मांग करते रहे है |लेकिन हमने ऐसा करने से इंकार किया -इसलिए नहीं की ये प्रतिबंधित है ,कानून हमे ऐसा करने की इज़ाज़त देता है लेकिन इसके पीछे अच्छी वजह होनी चाहिए | जो की आज के दिन हमे लगी | इसपे एक स्वस्थ बहस होनी चाहिए | फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, “किसी पत्रकार या न्यूजरूम की संपादकीय पसंद को लेकर किसी तरह की प्रतिक्रिया देना राष्ट्रपति के लिए उचित नहीं है., कभी नहीं .क्योंकि हमारे यहां प्रेस की स्वतंत्रता सबसे ऊपर है. हालांकि, उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी नागरिक एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाएं और नफरत फैलाने वाले संवाद से बचें|

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