बलूचिस्तान की क्या है समस्या ?

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बलूचिस्तान

बलूचिस्तान: इतिहास के पन्ने से –

बलूचिस्तान के बारे में सुनते आये है |और आखिर बलूचिस्तान की समस्या क्या है जो बार -बार उठ खड़ी होती है | भारत भी बलूचिस्तान के मामले अपनी राय रखता है | क्या है जो पाकिस्तान से भी बलूचिस्तान संभल नहीं रहा है | बलूचिस्तान को समझने के लिए सबसे पहले हमे इतिहास के पन्नो को एक बार फिर झाकना होगा | चलिए आपको ले चलते है |बात ये है जैसा की आप जानते है पुराने दौर में यहाँ तक कहा गया की ब्रिटिश शासन का सूर्यास्त नहीं होता है |

इसका सीधा से मतलब था की उनका शासन उतर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक था |लेकिन कुछ ऐसे भी देश कहे या रियासते थी जहाँ पर ब्रिटिश का सीधे हस्तक्षेप नहीं था |और उनमे से ही एक बलूचिस्तान था |जिनको ये अधिकार था की वो अपने आंतरिक फैसले खुद ले सकती थी |जब 1947 में भारत और पकिस्तान का बटवारा हो रहा था |तो ये कुछ रियासते थी जिनको ये अधिकार था की ये चाहे तो भारत में या पाकिस्तान में शामिल हो सकती थी या खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर सकती थी |बलूचिस्तान में काळात ,खरान, मकरान ,लासबुरा ये इलाके शामिल थे |

बलूचिस्तान को क्या एक स्वतंत्र राज्य बनना था ?

बलूचिस्तान4 अगस्त 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन और जिन्ना जो बलूचों के वकील थे |सबने एक कमीशन बैठाकर बलूचिस्तान को स्वतंत्र घोषित कर दिया |इसके मुताबिक बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनना था | इसकी घोषणा 11 अगस्त 1947 को हुई जबकि पाकिस्तान 14 अगस्त और भारत 15 अगस्त को आज़ाद हुआ |वादे के मुताबिक उसे एक अलग राष्ट्र बनना था 1 अप्रैल 1948 को पाकिस्तानी सेना ने कलात पर अभियान चलाकर कलात के खान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। बाद में 27 मार्च 1948 को पाकिस्तान ने संपूर्ण बलूचिस्तान को अपने कब्जे में ले लिया।

बलूचिस्तान क्षेत्र और राष्ट्रवाद –

बलूचिस्तान का क्षेत्र बड़ा है और यह ईरान (सिस्तान व बलूचिस्तान प्रांत) तथा अफ़ग़ानिस्तान के सटे हुए क्षेत्रों में बँटा हुआ है। यहां की राजधानी क्वेटा है। यहाँ के लोगों की प्रमुख भाषा बलूच या बलूची के नाम से जानी जाती है। 1970 के दशक में एक बलूच राष्ट्रवाद का उदय हुआ जिसमें बलोचिस्तान को पाकिस्तान से स्वतंत्र करने की माँग उठी।कई बलूची नेता पाकिस्तान से स्वतंत्रता मांग करते रहते है |जिससे उनके अपने देश को छोड़कर दूसरे देशों में राजनीतिज्ञ शरण लेनी पड़ती है |


बलोच राष्ट्रवादी नेता अकबर खान बुगती की पाकिस्तानी सेना द्वारा 2006 में हत्या कर दी गई थी। इस अभियान का आदेश जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने दिया था जो तब देश के सैन्य प्रमुख और राष्ट्रपति दोनों थे। कालांतर में मुशर्रफ का शासन समाप्त होने के बाद अगली सरकार द्वारा 13 जून 2013 को इस हत्या के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।सत्तर के दशक में यहाँ पाकिस्तानी शासन के खिलाफ मुक्ति अभियान भी चला था जिसे कुचल दिया गया|

बलूची भाषा पर वैदिक संस्कृत की झलक –

बलूचिस्तानबलूची भाषा में प्राचीन अवस्ताई भाषा की झलक नज़र आती है, जो स्वयं वैदिक संस्कृत के बहुत करीब मानी जाती है।पाकिस्तान में इसे अधिकतर बलोचिस्तान प्रान्त में बोला जाता है|बलूची लोग खुद को भाषा और बोली के मामले में पाकिस्तान से खुद को अलग मानते है |और यही बहुत से कारणों में एक कारण देते है पाकिस्तान से अलग होने के लिए |भारत बलूची लोगों के लिए आवाज उठाता रहता है |

बलूचिस्तान में तिरंगा क्यों लहराया गया –

बलूचिस्तानवर्तमान में पाकिस्तान में हिन्दुओं की आबादी लगभग 25 लाख है जबकि कुल आबादी 13 करोड़ है। सिंध और बलूचिस्तान में हिन्दू आबादी क्षेत्र माने जाते थे। इस क्षेत्र का हिंगमाला माता मंदिर बलूचिस्तान में प्रसिद्ध है |मगर तालिबानी कहर और धार्मिक कट्टरवाद के चलते यहाँ से भी उनका लगभग सफाया हो गया।बलूचिस्तान में आजादी समर्थकों ने पाकिस्तान के खिलाफ जबर्दस्त प्रदर्शन किया है। बलूचिस्तान में न केवल भारत का राष्ट्रीय ध्वज लहराया गया है बल्कि आजादी समर्थकों ने बलूचिस्तान के शहीद माने जाने वाले मरहूम नेता अकबर बुगती के साथ पीएम मोदी की तस्वीर भी लहराई है। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के झंडे को कुचलते हुए तस्वीर भी साझा की है।बलूचिस्तान संघर्ष में बलूचिस्तान मराठा का रोल में महत्वपूर्ण है |

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