बार्ड ऑफ़ ब्लड वेब सीरीज देखे या क्यों न देखे ?

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बार्ड ऑफ़ ब्लड

बार्ड ऑफ़ ब्लड वेब सीरीज देखे या क्यों न देखे ?

बार्ड ऑफ़ ब्लड ये वेब सीरीज वैसे तो जासूस की जिंदगी और उनके पर्सनल लाइफ और राजनीति पे आधारित है | ये एक बिलाल सिद्दीक़ी के नावेल पे आधारित है |किस तरह देश जो उनके अनसुलझे मसले है उनको जासूसी के स्तर से हल करने की कोशिश करते है और उनको किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है | और किस तरह अपने लोग कभी दुश्मन देशों की सहायता करने लगते है | क्युकी सभी लोग इंसान है और जो भी बीमारिया हमारे अंदर आ रही है | वही हर इंसान के अंदर आती है | और इससे डिफेन्स और किसी भी देश कोई भी संस्था अछूती नहीं है |

इस वेब सीरीज में ये सब से अवगत कराया गया है | और ये भी बताया गया है की जासूस एजेंसी भी किस तरह किसी भी देश के अंदर के अंतर्विरोध को अपने फायदे के लिए प्रयोग करती है | ये हर जगह हो रहा है | वहाँ के लोगों की असलियत में किसी को भी नहीं पड़ी है | और जासूस का भी प्रयोग कैसे लोग अपने फायदे के लिए कर रहे है ये भी इस वेब सीरीज में दिखाया गया है |

बार्ड ऑफ़ ब्लड

बार्ड ऑफ़ ब्लड वेब सीरीज-के पात्र –

अब बात करते है इस बार्ड ऑफ़ ब्लड वेब सीरीज की -सबसे पहले इस वेब सीरीज में पात्रों से अवगत कराते है | इमरान हाश्मी – पात्र का नाम -कबीर आनंद – भारतीय जासूस

विनीत कुमार सिंह -वीर सिंह

सोभिता -ईशा खन्ना

दानिश हुसैन -मुल्ला खालिद

जयदीप अहलावत – तनवीर शेह्ज़ाद ( पाकिस्तानी एजेंट )

राजित कपूर -सादिक़ शेख

कीर्ति कुल्हारी -जन्नत

सोहम -शाह -विक्रमजीत

इस को डायरेक्ट किया है ऋभु दासगुप्ता ने और प्रोडूस  शाहरुख़ खान और गौरी खान और गौरव वर्मा ने किया है |

बार्ड ऑफ़ ब्लड वेब सीरीज- इमरान के कंधे-

इस पूरी इमरान हासमी ( कबीर आनंद )  ने अपने कंधे पे उठा रखी है | वो एक अंडर कवर एजेंट है और इस समय भारत ने एक अधयापक के काम कर रहे है | पूरी फिल्म बलुचसितान पे आधारित है | वहाँ से तालिबान समर्थक लोग इंडियन स्पाई के वोकल को रेकार्ड करके भारत के ४ जासूस को पकड़ लेते है | वो चारों जासूस भारत के कोई इनपुट सेंड करने वाले होते है की गिरफ्तार कर लिए जाते है |

बार्ड ऑफ़ ब्लड

अब इस इंसिडेंट के बाद भारतीय एजेंसी उनके लिए क्या कर सकती है इसपे विचार होता है | इस एजेंसी के प्रमुख सादिक़ शेख ( राजित कपूर ) अपने एजेंसी के मेंबर से डिसकस करते है | की उनको कैसे बचाया जाये | इस सब में उनकी मेंबर ईशा खन्ना ( सोभिता ) इन्वॉल्व है | और बार -बार कबीर आनंद के नाम आते है क्युकी पहले ही एक ऑपरेशन में कबीर आनंद ( इमरान हासमी ) ५ साल तक काम कर चुके है | लेकिन इस दौरान उन्होंने अपने एक बहुत अच्छे दोस्त को खो दिया है | इसलिए उनकी सद्दीक़ शेख ( राजित कपूर ) से अनबन हो चुकी है |

सादिक शेख का क़त्ल –

सादिक़ शेख कबीर आनंद से इस नए इनपुट के बारे में बात करते है लेकिन कबीर आनंद मना कर देता है इस ओप्रशन में शामिल होने के लिए | लेकिन तभी सादिक़ का क़त्ल हो जाता है | और जब कबीर आनंद उनके घर पहुँचता है तो उनके कंप्यूटर का हार्ड डिस्क खाली रहता है | तब कबीर आनंद को शक होता है | की अपनी एजेंसी का कोई शख्स है जो दूसरे के लिए काम कर रहा है | लेकिन तभी पुलिस आ जाती है और कबीर आनंद को पकड़ लेती है मौके वारदात पे लेकिन वो कुछ साबित नहीं कर पाती की कबीर आनंद ने सादिक़ का क़त्ल किया है और कबीर आनंद को छोड़ देती है |

और इंटरनेशनल लेवल पे इंडिया और चीन का सम्मिट होने वाला होता है | और भारतीय एजेंसी अपने ४ एजेंट को बचाना का कोई भी कोशिश नहीं करना चाहती है | लेकिन कबीर आनंद को लगता है की कुछ तो बड़ा होने वाला है | और उसकी प्राथमिकता अपने ४ एजेंटों की जिंदगी बचाने की रहती है | और इसलिए वो अपनी गैंग बनाता है जिसमे सोभिता ( ईशा खन्ना ) और एक और एजेंट वीर सिंह ( विनीत कुमार सिंह ) को शामिल करता है | और बलूच पहुंचकर उन ४ एजेंटों को छुड़ाने का प्रयास करना चाहता है |वो भी बिना एजेंसी की मदद के | ये हिस्सा इस फिल्म में हेरोइस्म को बढ़ावा देता है |

तालिबानी प्रमुख मुल्ला और तनवीर –

और उस तरफ जो तालिबानी होते है वो सरेआम भारतीय जासूस को क़त्ल करने के लिए उनके एक जगह लाते है | तालिबान का प्रमुख मुल्ला खालिद (दानिश हुसैन ) इसको अमल में लाने का आदेश देता ही है की पाकिस्तानी जासूस तनवीर शहज़ाद वहाँ पहुंच जाता है और उससे इनको न मारने की गुहार करता है | और सौदा कर लेता है |क्युकी मुल्ला को अपनी सालमियत के लिए तनवीर की जरुरत होती है | इसमें साफ़ दिखाया है सबको एक दूसरे की जरुरत है और वो एक दूसरे को इसलिए जिन्दा रखे हुए है |

अब आते है बलूचिस्तान पे यहाँ स्थिति थोड़ी अलग है कुछ लोग है जो बलूचिस्तान को अलग एक देश बनाना चाहते है और उसके लिए संघर्ष कर रहे है | उसको लीड करने वाला नुशरत एक युथ है | उसकी अलग सोच है बलूचिस्तान को लेकर – यहाँ सबकी खुद की महत्वाकांछाये है जिसको पूरा करने चाहते है | नुसरत की एक बहन भी है जिसका नाम जन्नत ( कृति कुल्हारी ) और उसका पती क़ासिम वो दूसरे नंबर का नेता है इस पार्टी का |

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अब आते है कबीर आनंद और उनकी गैंग जो की फ़र्ज़ी पासपोर्ट बनाके दुबई के रस्ते बलूचिस्तान पहुंचते है और वहाँ वीर सिंह ( विनीत कुमार सिंह ) उन्हें लेने आता है | असली ड्रामा यहाँ से शुरू होता है | ये फिल्म आपकी कही कही कमजोर दिखाई देती है | वीर सिंह एक गुमनाम एजेंट हो चूका था | उसे अपने देश लौटने की बहुत जल्दी है |और वो कबीर का साथ इसलिए ही देता है की वो अपने घर जा सके | लेकिन एक चेक पोस्ट पे इनका सामना आर्मी से हो जाता है और वहाँ से ये किसी तरह निकलते है | लेकिन ये मशहूर हो जाता है और इनकी तलाश वहाँ पे सबको होती है |

कबीर आनंद ( इमरान हासमी ) ये जान जाता है की बिना नुशरत की मदद के वो अपने ४ एजेंट को छुड़ा नहीं सकता है | और मुल्ला एक तालिबानी आतंकवादी है जिसे इस सरजमीं पे रखा गया है जिससे नुसरत को भी अपने आंदोलन में और अपनी महत्वकांछा पूरी करने में कबीर मदद कर सकता है और नुसरत इसके लिए तैयार हो जाता है | क्युकी भारतीय एजेंसी इस समय कबीर की कोई मदद नहीं कर रही थी |

और जब कबीर ५ साल पहले यहाँ आया था तो उसको नुसरत  से प्यार हो गया था और नुसरत को भी | लेकिन नुसरत का जब पता चला की ये भारतीय जासूस है और हमारा प्रयोग कर रहा है | तब उसने दुरी बना ली थी और कबीर को जल्दी बलूचिस्तान छोड़ना पड़ा था | कबीर आनंद ( इमरान हासमी ) नुशरत ( कृति कुल्हारी ) से प्यार करता है और उसकी जरुरत भी है | अपने इस मिशन को पूरा करने में | कबीर आनंद ने एजेंट को कैसे छुड़ाना है और कैसे इस ओप्रशन को करना सोच लिया था बस समस्या ये थी की ये लोग बलूचिस्तान से निकलेंगे कैसे ?|

फिर ये लोग अमेरिकन फोर्सेज से निकलने की डील करते है | यहाँ भी सौदा होता है वो भी मुल्ला खालिद का अमेरिकन को मुल्ला चाहिए | इस फिल्म में ये बहुत ही साफ़ दिखाया है की अंतरास्ट्रीय में कोई भी इस तरह की डील बिना कुछ लिए बिना कुछ दिए नहीं होती | फिर ये लोग नुसरत की मदद से मुल्ला खालिद को मार देते है लेकिन मुल्ला के यहाँ इनको अपने ४ साथी नहीं मिलते |

क्युकी उन चार साथी को तनवीर शहज़ाद अपने क़ैद में रखता है | सौदे के लिए क्युकी आप अगर जासूस है तो कभी भी आपकी सरकार भी आप से हाथ खींच सकती है | कबीर मुल्ला की लाश को वीर सिंह और ईशा खन्ना के साथ अमेरिकन फोर्सेज के यहाँ भेज देता जिससे वो बलूचिस्तान से निकल सके | क्युकी वो अपने ४ साथी को बिना छुड़ाए नहीं जा सकते थे | किसी तरह तनवीर का एड्रेस ट्रैक हुआ और कबीर अपने साथियों को छुड़ाने में सफल हो जाते है | और कबीर उन साथियों को लेकर अमेरिकन बेस पहुंच जाता है और चॉपर से वो अपने देश लौट आ जाते है |

लेकिन कबीर आनंद को एक चीज खटक रही थी की कौन वो शख्स है जो भारतीय एजेंसी से धोखा कर रहा है | और वो अपने दोस्त के मौत के गम में था और उसके लिए ही करने के लिए उसने सब कुछ किया | लेकिन एक कॉल आती है ये कॉल तनवीर के फ़ोन थी | जिससे इनके क्लू मिलता है लेकिन ये जब उस आदमी से मिलना चाहते थे तभी इनके सामने ही उस आदमी को क़त्ल कर दिया गया | और जब कबीर आनंद क़त्ल करने वाले आदमी के पीछे जाते है तो वो शख्स विक्रमजीत ही निकला | ये एक रहस्य तो जो खुल गया है |

ये सीरीज अगर आप एक्शन देखने के लिए देखना चाहते है तो आप को निराशा हाथ लगेगी | और पात्रों ने एक्टिंग उतनी अच्छी नहीं है | लेकिन इमरान हासमी , कृति कुल्हारी और विनीत कुमार ने अच्छा प्रदर्शन किया है |इस वेब सीरीज से आपको अंतरास्ट्रीय राजनीति में समझ बढ़ सकती है | और दुनिया की तमाम एजेंसी कैसे काम करती है | कैसे दूसरे देशों के अन्दुरुनी मामलों में अप्रत्यछ रूप दखल देते है | ये सब इस वेब सीरीज में आपको मिलेगा |

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