बाज़ारीकरण और बाज़ार में क़ैद होते युवा ?

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बाज़ारीकरण

बाज़ारीकरण और बाज़ार में क़ैद होते युवा ?

बाज़ार शब्द पर्सियन शब्द है | पहले भी बाजार लगा करता थे जब मुद्रा का चलन नहीं था |इस बारे में बात करने का मेरा केवल एक मकसद है | बाज़ारीकरण को थोड़ा बहुत समझाना जिससे की आप उसकी गिरफ्त से कुछ हद तक बच सके | विशेष रूप से महिलाये जो ज़्यदा प्रभावित होती है | प्रकृति ने कुछ चीजें हमे मुफ्त में दी कह सकते है | जैसे -पानी(वाटर ) , वायु (एयर ), भूमि ( लैंड ) इत्यादि |

भूमि तो हमने पहले ही बाट ली | वक़्त आगे बढ़ता गया और पानी भी बोतल बंद डिब्बों में बिकने लगा | नए -नए कंपनी लेबल के साथ | आप दुर्गम से दुर्गम जगह जायेंगे आपको वहाँ पानी मिले या न मिले कोला जरूर मिल जायेगा |और ये आप पे बहुत ही जल्दी हावी होने वाला है | बाजार का कोई धर्म -ईमान नहीं है वो हर धर्म मनाता है और चाहता है की आप भी मनाओ इसलिए नहीं की आप एक बने या एकता दिखाओ -सिर्फ इसलिए की उनका टर्नओवर बढ़ता रहे |

जानिए कैसे वैलेंटाइन डे पूरा बाज़ारीकरण से प्रभावित दीखता है ?


बाज़ारीकरण

भारत में वैलेंटाइन डे का ज़्यदा क्रेज नहीं था | लेकिन ऐड दिखा कर इसको बढ़ाया गया और तो और उसमे ७ दिन और जुड़ गए -टेडी डे , फ्लावर डे , कार्ड डे इत्यादि .और ये मार्किट आज के दौर में करोड़ में पहुंच गया है | आप पुरे साल चाहे कितने भी नफरत करो इस सातों दिन प्यार करो -और करोड़ में कंपनी को फायदा पहुचाओ |

क्या आपको लगता है की केवल इस सात दिन ही आप अपनी प्रेमिका को , पत्नी को प्यार करोगे , या गिफ्ट देना या लेना ही प्यार है ? क्या हर दिन प्यार नहीं होना चाहिए | लेकिन ये बाजार को मंजूर नहीं है | वो हमारे त्योहारों को अपना त्यौहार बनाता चला जा रहा है और हमे पता भी नहीं चल रहा है |वो ‘राखी ‘ को भी बदल रहा है -जहा लडू हुआ करते थे वहाँ चॉकलेट ला रहा है |जबकि राखी तो त्यौहार वचन का है रक्षा का है समर्पण का है |

आपको जानकर हैरानी होगी की ब्यूटी मार्किट पूरा बाज़ारीकरण पे टिका है ?

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बाज़ारीकरण का दौर इतना है क्या -गोरी करने वाली क्रीम भी यहाँ बिकती है | और इसमें लड़कियों को ही टारगेट किया जाता है और एक महिला ही इसका ऐड भी करती है | ब्यूटी मार्किट तो पूरा इसी पे टिका है और मिस वर्ल्ड , मिस इंडिया , यही कंपनी कराती है | इनका केवल मकसद अपना प्रोडक्ट बेचना होता है | इसलिए सूंदर होना इनका मापदंड है |
जहाँ इनको ९० में भारत में अपना मार्किट बनाना था तो उन्होंने उस समय भारत से चुना और जब पूरा मार्किट कवर कर लिया | तो इस समय भारत से कोई नहीं चुना जा रहा है तीसरी दुनिया के देश वेनिजुला या कोई और से मिस वर्ल्ड बन रही है | भावनाओं की भी कीमत लगा दी है | उसी तरह जिम्म का कल्चर भी इस समय क्रिएट किया जा रहा है | बड़े -बड़े हीरो इसे प्रचार कर रहे है | पहले तो खेल के मैदान कम बन रहे है , पार्क भी कम बन रहे है |
लेकिन आप वातानुकूलित कमरे में मेहनत करते है | भारत में वायु पर्दूषण भी जयदा है ये आपको पता है की क्यों बड़ी है लेकिन उसका उपाय निकलने के आलावा कंपनी महंगे -महंगे मास्क बाजार में ला दिया है | आप इसे खरीदो इसकी कोई भी वार्रन्टी भी नहीं है की ये आपको सेफ रखेगा की नहीं | बाजार तो यही है |

 

जानिए चीन में कैसे एयर की बोली लगी? बाज़ारीकरण हर जगह है 

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चीन में जब प्रदूषण बढ़ गया तो चीन के एक सहर में रेस्त्रो ने ऑक्सीजन स्टेशन लगा रखा था और सबके के बिल में १ युयान लेने लगा था | लेकिन वहाँ के सरकार इस पे बन लगाया की इसका पैसा आप नहीं ले सकते | लेकिन चीन के लोग कनाडा के फ्रेश एयर कैन खरीदने लगे थे | आप सोचिये एक दिन ऐसा भी आ सकते है की वायु (ऑक्सीजन ) का पैसा देना पड़े | जो भी नेचर से मिला है उसकी भी कीमत लगाएंगे एक दिन ऐसा आएगा | इसलिए सोचना तो बनता है आप भी एक बार सोचियेगा जरूर |

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