बुलेटप्रूफ जैकेट में क्या है जो रोक देती मौत को –

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बुलेटप्रूफ जैकेट

ऐसा दौर जब बुलेटप्रूफ जैकेट का जब विचार ही आया था-

बुलेटप्रूफ जैकेट में ऐसा क्या है जो गोलियों से चलनी होने से शरीर को बचाता है |आजकल आप हर आर्मी मैन को देखते हो या जो VIP लोगो की सुरक्षा में लगे होते है अलग तरह की जैकेट पहले होते है | वही होती बुलेट प्रूफ जैकेट होती है | पहले जब ज्यादा तकनिकी का अविष्कार नहीं हुआ था जब लोग जंगलों में रहा करता थे | तब लोगों को अपने शरीर को ढकने को बचाव के लिए कपडे की जरुरत होती थी तब वो जानवरों की खाल से अपना बचाव करते थे और इसी से कवच का विचार आया है लोगों का मानना है की 15 वी सदी से ये विचार आया |

कहा जाता है की 1538 में एक इटेलियन राजा ने फिलिप्पो नेगरोली को बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने के चुना था | जो की मिलान के सबसे स्किल वाले कवच बनाने वाले थे |कवच ऐसा हो गन फायर को रोक सके |लोगों इस क्षेत्र में काम चलता रहा है और 1961 ऑस्ट्रिया राजा ने भी इसको आगे बढ़ाया ये विचार तो जो धीरे -धीरे आगे बढ़ रहा था |

बुलेटप्रूफ जैकेटगोली कवच को पार नहीं कर सकती थी बल्कि उससे टकराकर अपनी दिशा बदल देती थी। इससे जैकेट पहने इंसान पर गोलियों का कोई असर नहीं होता लेकिन वे कवच आग्नेयास्त्रों के लिए प्रभावी नहीं थे। फिर 18वीं सदी में जापान में सिल्क से कवच बनाया गया। वे कवच असरदार तो थे लेकिन महंगे थे|1901 में अमेरिकन राष्ट्रपति की हत्या हो गयी फिर अमेरिकन सरकार को लगा की अब कवच जो हल्का और असरदार बनाना चाहिए |सिल्क से बने कवच कम वेग से आने वाली गोलियों से बचाने में असरदार तो थे लेकिन नयी सदी के बन्दूक और तोपों को नहीं झेल सकते थे और इसी कारन वो ज्यादा दिन तक उपयोगी नहीं रह सके |

केवलर फाइबर की खोज -संपर्क में आने वाली ऊर्जा को सोख लेता है –

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान फ्लैक जैकेट का आविष्कार हुआ। उनको बनाने में बैलिस्टिक नाइलॉन फाइबर का इस्तेमाल होता था। वे जैकेट गोलाबारूद से बचाने में सक्षम था । ये जैकेट काफी भारी होती थी। ज्यादा असरदार भी नहीं थी। 1960 में केवलर नाम के नए फाइबर को खोजा गया जिससे बुलेटप्रूफ जैकेट को बनाना संभव हो पाया।केवलर की खोज पहले ये सोच कर की गयी थी की इससे टायर का निर्माण किया जायेगा |

बुलेटप्रूफ जैकेट (2)

लेकिन जब इसको प्रयोग किया गया था ये सोच से कही ज्यादा मजबूत निकला |केवलर एक तरह से प्लास्टिक ही होता है बीएस ये बहुत लचीला होता और यही गन इसे ताकतवर बनाता है |इसके अलावा यह अपने संपर्क में आने वाली ऊर्जा को सोख लेता है और उसको छिन्न भिन्न कर देता है। अपने इन गुणों के कारण केवलर किसी इंसान की तरफ आने वाली गोली को रोकने और उसकी ऊर्जा को सोखकर बेअसर करने में काफी सक्षम है।

जैकेट कैसे बनती है जो हमे गोलियों से बचाती है –

सबसे पहले केवलर के रसायनो को एक घोल में कताई करते है उसके बाद धागे की बड़ी सी रील तैयार की जाती है। फिर उस धागे से बैलिस्टिक शीट (चादर) की कई परत तैयार की जाती है।उन सब परतों को आपस में अच्छे से सिलकर कई प्लेट या पैनल बनाये जाते है |फिर उन पैनलों को एक जैकेट में फिट किया जाता है |जैकेटों में बैलिस्टिक पैनलों को फिट करने के लिए जेब होती हैं| और इस तरह आपकी बुलेटप्रूफ जैकेट बनके तैयार हो जाती है |

बुलेटप्रूफ जैकेट (3)
बुलेटप्रूफ जैकेट कैसे काम करती है –

जब भी कोई शख्स किसी दूसरे शख्स को गोली मारता है और दूसरे शख्स ने ये बुलेटफ्रूफ जैकेट पहन रखी होती है तब होता ये है की जब गोली इन प्लेटों से टकराती है तो उसकी रफ्तार कम हो जाती है और वह छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर जाती है। फिर गोलियों की भेदने की क्षमता कम हो जाती है और उसे पहने हुए इंसान के शरीर के संपर्क में नहीं आ पाती है। जब गोली टुकड़ों में बिखर जाती है तो उससे बड़ी मात्रा में निकलने वाली ऊर्जा को बैलिस्टिक प्लेट की दूसरी परत सोख लेती है। इससे बुलेटप्रूफ पहने इंसान को कम नुकसान पहुंचता है|

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