ब्रह्माण्ड का केंद्र:वो जगह जहा दीवारों के कान नहीं होते –

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ब्रह्माण्ड का केंद्र

सेण्टर ऑफ़ यूनिवर्स या ब्रह्माण्ड का केंद्र –

ब्रह्माण्ड का केंद्र या संसार में कोई भी वस्तु जो हमें पता है उसका केंद्र जरुर होता है।वस्तु चाहें बड़ी हो या छोटी हर किसी का एक खास केंद्र होता ही है और ये केंद्र ही उसके अस्तित्व के लिए जरुरी कारक होता है।जब हम अपने ब्रह्माण्ड की बात करते हैं तो इसे दो तरह से देखा जाता है, एक ब्रह्मांड वो है जो हमें प्रकाश के कारण दिखाई देता है तो एक ब्रह्मांण ऐसा भी है जिसे हम आजतक नहीं देख सके हैं क्योंकि वहां तक अभी भी प्रकाश हमारे पास नहीं पहुंचा है।

अब हम बात करते हैं इसके केंद्र कि,वैज्ञानिकों की माने तो हमारे ब्रह्माण्ड का कोई भी केंद्र है या नहीं इसके बारे में कोई पुख्ता जानकारी तो नहीं है लेकिन ऐसा कहा जाता है की ब्रह्माण्ड का केंद्र अमेरिका के ओक्लाहोमा राज्य के तुलसा शहर डाउनटाउन में है | क्योंकि यह हर जगह से समान रुप में फैलता जा रहा है।

हमारा ब्रह्माण्ड इतना विशाल है कि इसके बारे में हम इतना ही जान सके हैं।जैसा हमलोग दीवारों के कान होते है ये मुहावरा सुनते आ रहे है।इस टाइटल यहाँ क्यों प्रयोग किया गया है ये आगे आप जान जायेंगे।अमेरिका के ओक्लाहोमा राज्य के तुलसा शहर डाउनटाउन में है|ब्रह्माण्ड का केंद्र सुनने में तो एक बड़ी सी जगह लगती है पर यह बस एक गोल घेरा ही है जो एक 30 इंच व्यास (diameter) का एक गोला है जो की कंक्रीट का बना हुआ है |इसकी गोलाई में एक और गोला है जो की लगभग 13 ईंटो से बना हुआ है जिसका व्यास लगभग 8 फीट है।

इस गोले के अंदर का इंसान बाहर नजदीक में खड़े व्यक्ति की आवाज नहीं सुन सकता –

नाम सुन के ऐसी जगह को देखने का मन करता है पर जब इस जगह आप जायेंगे तो बस यहाँ एक छोटा सा गोला है |दिखने में सिर्फ ये बस एक गोला ही है पर जब इसके बारे जानने को मिलता है तो पता चलता है की एक बहुत ही रहश्यमयी जगह है जिसके ऊपर बहुत सारे वैज्ञानिक शोध कर रहे है |पर वो भी नहीं बता पाए की इस जगह पर ऐसा कारनामा क्यों होता है जो की विज्ञान को पूरी तरह नकार देता है |जिसपे विज्ञान का कोई सा कानून लागु नहीं होता है।

केंद्र के गोल घेरा पे जा कर जब कोई भी व्यक्ति कुछ बोलता है तो वह आवाज सिर्फ उसी व्यक्ति को सुनाई देती है जो की उस घेरे में खड़ा होता है और वो भी काफी तेज़ ध्वनि में गूंजती है और जो लोग बाहर खड़े होते है उन्हें घेरे के अन्दर खड़े व्यक्ति की आवाज सुनाई नहीं देती है |हाँ बाहर वाले लोगो की आवाज घेरे में खड़े व्यक्ति को सुनाई देती है पर वो भी बहुत ही बिगड़े हुए तरीके से, जिससे घेरे में खड़े व्यक्ति को आवाज़ सुनने और समझने में दिक्कत होती है |

दिवार के कान क्या दिवार ही नहीं है –

वैज्ञानिक आज भी इसकी शोध में लगे हुए है की आखिर ऐसा कैसे होता है, न ही सामने कोई दिवार है औरआस पास में भी ऐसे कोई स्तम्भ भी नहीं लगे है जिसकी वजह से ऐसा होता हो |कुछ वैज्ञानिकों का मानना है की ये ब्रह्माण्ड का केंद्र है तो यहाँ ब्रह्माण्ड की सारी उर्जा यहाँ मिलती है जिस वजह से ऐसा होता है |पर इस धटना से जो विज्ञान के काननों का खंडन होता है उस पर वैज्ञानिक आज भी काम कर रहे है |वैज्ञानिकों का ऐसा भी मानना हैं की यह ध्वनि के प्रभाव की वजह से है जो जगह के हिसाब से बदलती है उस कारण ऐसा होता है और कुछ कहते है की यह परवलयिक परावर्तन (Parabolic Reflectivity) की वजह से होता है | हमारा उद्देश्य ये रहता है की आप तक वैसे खबरे पहुचाये की आप चौक जाये।

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