भाषा:एक शख्स जो 30 भाषाएँ बोलता है –

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भाषा

भाषा और विविधता-

भाषा लोगों के बीच की एक कड़ी होती है लोग कहते है की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए लफ़्ज़ों की जरुरत नहीं होती है लेकिन क्या ऐसा है कभी कभी जब आप भावनाओं को लफ़्ज़ों में पिरोकर प्रस्तुत करना भी पड़ता है।हम भारत के लोग है यहाँ तो भाषा इतनी बोली जाती है की गिनती करना भी बड़ा काम है लेकिन आज हम आपको इसी बारे में आपको बताते है। जैसा कि हम सभी जानते है कि हमारा देश इंडिया अनेकता में एकता के लिए जाना जाता है।

इसके अलावा भारत अपनी विविधताओं के दुनिया भर में प्रसिद्ध है। जिस प्रकार भारत में विभिन्न धर्म के लोग रहते है उसी तरह यहाँ कई सारी भाषा बोली जाती है। उदाहरण के तौर पर जैसे उत्तर और मध्य भारत में मुख्यता हिन्दी भाषा सुनी जा सकती है। वहीं दक्षिण भारत की मुख्य लैंग्वेज कन्नड़, तेलुगु और तमिल है।पश्चिम में गुजराती, राजस्थानी, पंजाबी और हरयाणवी भाषाओं को सुना जा सकता है। पूर्वी भारत की बात करे तो यहाँ इनकी अपनी अलग भाषा है कुल मिलाकर भारत अनेक भाषा का देश है।

हिज़यानिइस इकोनोमुस जो 30 भाषा बोलता है –

आये जानते है उस शख्स के बारे में जिसका जिक्र हमने टाइटल में किया है। इनका नाम -हिज़यानिइस इकोनोमुस है जिस उम्र में बच्चे खेलना कूदना पसंद करते हैं उस उम्र में ग्रीस के क्रिट द्वीप के रहने वाले हिज़यानिइस इकोनोमुस को एक अलग ही शौक़ चढ़ा। हिज़यानिइस इकोनोमुस जहा रहते है वो क्रिट द्वीप है जो एक पर्यटक स्थल है और यहाँ कई देशों के लोग आते रहते है हिज़यानिइस इकोनोमुस से जब ये पर्यटक टकरा जाते थे तो उनको उनकी बातें समझ नहीं आती थी और एक दिन उन्होंने ठाना की वो इन भाषाओं को सीख रहेंगे।सात साल की उम्र में ही उन्हें इन भाषाओं को समझने और बोलने की रुचि जगी।इकोनोमुस ज्यादातर यूरोपीय भाषाएं बोल लेते हैं और उसके अलावा वे मैंडरिन, अरबी, तु्र्की और फ़ारसी समेत 30 भाषाएं जानते हैं और तो और वे यूरोपीय कमीशन में काम भी करते थे।

जब दुश्मन के भाषा को बोलने की इच्छा जाहिर की –

इकोनोमुस के परिवार में लोग केवल ग्रीक्लिश भाषा बोलते हैं जिसमें अंग्रेज़ी ग्रीक लहजे में बोली जाती है साथ ही उन्हें एक निजी स्कूल में अंग्रेज़ी भाषा सीखने के लिए भेजा जाता था । जब वो तुर्की भाषा सिखने की इच्छा अपने माता -पिता से जाहिर की थी तो उनके माता -पिता बहुत गुस्सा हो गए थे क्योकि उस ज़माने में तुर्की लोगों को ‘दुश्मन’ समझा जाता था लेकिन मुझे बचपन से सिखाया गया कि कोई दुश्मन नहीं होता सब दोस्त होते हैं और तुर्की भी तो इंसान ही हैं|

मेरे माता-पिता यहां हर साल होने वाले विरोध प्रदर्शन में जाते थे जिसमें तुर्की शरणार्थी और नेता भाग लेते थेउन्होंने इस प्रदर्शन में जाकर पूछा कि हमारा बेटा तुर्की सीखना चाहता है एक ग्रीक होने के कारण तुर्की भाषा सीखना विवादस्पद तो था ही उस समय। इकोनोमुस के मुताबिक़ उन्हें भाषाएं सीखने के बाद देशों के लोगों, उनकी परंपराओं और भोजन के बारे में जानने में आसानी हुई है उनके दौर इंटरनेट का चलन नहीं था अब के दौर में तो भाषाओं को सीखना आसान है।

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