मंगल ग्रह को और जानने के लिए रोबोट पर्सिवियरेंस की चहल कदमी-

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मंगल ग्रह

मंगल ग्रह को लाल ग्रह क्यों कहा जाता है –

मंगल ग्रह सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है। इसके तल की आभा रक्तिम है,जिस वजह से इसे “लाल ग्रह” के नाम से भी जाना जाता है।सौरमंडल के ग्रह दो तरह के होते हैं -‘स्थलीय ग्रह’ जिनका तल आभासीय होता है और ‘गैसीय ग्रह’ जो अधिकतर गैस से निर्मित हैं। पृथ्वी की तरह,मंगल भी एक स्थलीय धरातल वाला ग्रह है। इसका वातावरण विरल है। इसकी सतह देखने पर चंद्रमा के गर्त और पृथ्वी के ज्वालामुखियों, घाटियों, रेगिस्तान और ध्रुवीय बर्फीली चोटियों की याद दिलाती है।सौरमंडल का सबसे अधिक ऊँचा पर्वत, ओलम्पस मोन्स मंगल पर ही स्थित है।साथ ही विशालतम कैन्यन वैलेस मैरीनेरिस भी यहीं पर स्थित है।अपनी भौगोलिक विशेषताओं के अलावा, मंगल का घूर्णन काल और मौसमी चक्र पृथ्वी के समान हैं। इस ग्रह पर जीवन होने की संभावना को हमेशा से परिकल्पित किया गया है।

मार्श के दो चद्र्मा है –

मंगल, पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है। यह पृथ्वी से कम घना है, इसके पास पृथ्वी का 15 % आयतन और 11 % द्रव्यमान है। इसका सतही क्षेत्रफल, पृथ्वी की कुल शुष्क भूमि से केवल थोड़ा सा कम है। हालांकि मंगल, बुध से बड़ा और अधिक भारी है पर बुध की सघनता ज्यादा है।फलस्वरूप दोनों ग्रहों का सतही गुरुत्वीय खिंचाव लगभग एक समान है।मंगल ग्रह की सतह का लाल- नारंगी रंग लौह आक्साइड (फेरिक आक्साइड) के कारण है, जिसे सामान्यतः हैमेटाईट या जंग के रूप में जाना जाता है ।

मंगल के दो चन्द्रमा, फो़बोस और डिमोज़ हैं, जो छोटे और अनियमित आकार के हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह 5261 यूरेका के समान, क्षुद्रग्रह है जो मंगल के गुरुत्व के कारण यहाँ फंस गये होंगे।मंगल को पृथ्वी से नंगी आँखों से देखा जा सकता है। इसका आभासी परिमाण -2.9 तक पहुँच सकता है और यह् चमक सिर्फ शुक्र, चन्द्रमा और सूर्य के द्वारा ही पार की जा सकती है, यद्यपि अधिकांश समय बृहस्पति, मंगल की तुलना में नंगी आँखों को अधिक उज्जवल दिखाई देता है।

पर्सिवियरेंस की पिक्चर और तकनिकी का कमाल-

अभी हाल में अमेरिकन एजेंसी नासा ने एक रोबेट भेजा जो मंगल के सतह पर एक सुरक्षित लैंडिंग की और खास बात ये भी है की उसने कई ऐतिहासिक पिक्चर भी भेजी जिसे देखकर दुनिया पूरी तरह से चकित हुई। जो रोबोट ने ये पिक्स भेजी उसका नाम -पर्सिवियरेंस है। पर्सिवियरेंस की मेमोरी में बहुत सारा डेटा है, जिसे वो धीरे-धीरे धरती पर भेज रहा है ।आप समझ सकते हो की रोबर के मंगल के सतह पर उतरने के समय की भी ये हमे पिक्स भेज रहा है जिसमे पैरासूट के लाइन साफ़ दिखाई दे रही है।

इसे एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि के तौर पर भी देखा जा रहा है क्योंकि उपग्रह- मार्स रिकौनसंस ऑर्बिटर- उस वक़्त पर्सिवियरेंस से क़रीब 700 किलोमीटर दूर था और तीन किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ़्तार से ट्रैवल कर रहा थ।आप समझ सकते हो की तकनीक से किस ओर बढ़ रहे है।नासा ने कहा है कि वो आने वाले कुछ दिनों में और भी कई चीज़ें जारी करेगा, जिनमें प्रवेश, उतरने और लैंड करने के दौरान की शॉर्ट मूवी शामिल होगी, जिसमें साउंड भी होगा।

लाल ग्रह पर अतीत में कभी जीवन था इसका पता लगाने गया है रोबर –

पर्सिवियरेंस, भूमध्यरेखीय मार्टियन क्रेटर पर लैंड हुआ है,जिसे जज़ैरो क्रेटर कहा जाता है वहां वो ये पता लगाने की कोशिश करेगा कि क्या मंगल ग्रह पर अतीत में कभी जीवन था। वैज्ञानिक ये बता रहे है की पर्सिवियरेंस ठीक अवस्था में है लेकिन हम चेक करेंगे की उसको कोई नुकशान तो नहीं पंहुचा है।पर्सिवियरेंस अब अपना नेविगेशन का डंडा बाहर निकालेगा,जिस पर मुख्य वैज्ञानिक कैमरे लगे हुए हैं, इसके बाद जज़ैरो क्रेटर की सबसे विस्तृत तस्वीरें सामने आएंगी। ये तस्वीरें अगले हफ़्ते सामने आ सकती हैं।

अंतरिक्ष में भेजा गया ये बहुत ही एडवांस रोवर है पर्सिवियरेंस की लैंडिंग तकनीक ने इसे टारगेटेड टचडाउन ज़ोन में पहुंचा दिया,जो प्राचीन डेल्टा नदी के अवशेषों के दक्षिण पूर्वी ओर क़रीब दो किलोमीटर दूर है। ये रोबोट मंगल पर भेजा गया नासा का पांचवां रोवर है, इसपर 2.7 अरब डॉलर का खर्च आया है इसका मिशन मंगल के वर्ष के हिसाब से एक वर्ष तक चलेगा।हमे ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है की उस समय तक पृत्वी में 2 वर्ष बीत जायेंगे। मंगल पर वैसे कई रोबर्स है जो या तो असफल हो गए है या जिनका मिशन पूरा होने पर निष्क्रिय हो चुके है।

लाल ग्रह और पृत्वी की समानता –

मंगल ग्रह का अक्षीय झुकाव 25.18 डिग्री है, जो कि पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के बराबर है।परिणामस्वरूप, मंगल ग्रह की ऋतुएँ पृथ्वी के जैसी है, हालांकि मंगल ग्रह पर ये ऋतुएँ पृथ्वी पर से दोगुनी लम्बी है।मंगल पर सौर दिवस एक पृथ्वी दिवस से मात्र थोड़ा सा लंबा है सौर दिवस की गणना सूर्य को गतिहीन मानकर पृथ्वी द्वारा उसके परिक्रमण की गणना के रूप में की जाती है।पृत्वी की सौर दिवस 24 घंटे है जबकि मंगल की सौर दिवस 24 घंटे -39 मिनट औऱ 35.244 सेकण्ड है । मंगल पर हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा धूल तूफ़ान है।

यह विविधता लिए हो सकता है, छोटे हिस्से पर से लेकर इतना विशाल तूफ़ान कि समूचे ग्रह को ढँक दे। सूर्य से अपेक्षाकृत अधिक से अधिक दूर होने से मंगल के वर्ष, लगभग दो पृथ्वी-वर्ष लम्बाई जितने आगे हैं।मंगल सतह का तापमान भी विविधतापूर्ण है चूँकि मंगल पर महासागर नहीं है, इसलिए कोई ‘समुद्र स्तर’ भी नहीं है ।अब देखिये खोज की दिनों दिन प्रगति हो रही है ये रोबर्स कितनी सम्भावनाये तलाशता है रही बात विज्ञानं की तो वो दिनों दिन आगे बढ़ रहा है। हमारा काम है कुछ नयी जानकारी जुटा के आप तक पहुचाये। हमे अपना समर्थन दे।

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