मध्यलिंगता:एक महिला को 25 साल बाद पता चला की वो पुरुष है –

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मध्यलिंगता

मध्यलिंगता की पहचान में लगता है समय –

मध्यलिंगता एक लैंगिक विकृति है। यह वह स्थिति है जब कोई प्राणी किसी एक लिंग की ओर विकसित होते-होते सहसा, किसी कारणवश, दूसरे लिंग को भी धारण कर ले।लेकिन ज्यादातर मामले में इसका ज्ञान बचपन में लग जाता है।लेकिन कभी कभी पहचान होने बहुत साल लग जाते है। क्योकि कुछ ज्यादा अंतर नहीं होने पर कभी आपके शरीर के बहरी हिस्सों में ये दीखता प्रतीत न हो लेकिन आप सही माने में अंदर से आपका लिंग परिवर्तित है।

ऐसी एक घटना चीन में देखने को मिली है एक चीनी महिला की शादी हो गयी थी और वो एक साल से गर्भवती होने में लगी थी लेकिन बच्चा नहीं हो रहा था।इसलिए वो डॉक्टर के पास गयी तो वहाँ जाँच हुई तो वो अचंभित हुई क्योकि डॉक्टर उसे बताया की वो जन्म से पुरुष है। उसे बताया गया की वो माध्यलिंगी है लेकिन महिला का हैरत में इसलिए भी है क्योकि उसके शरीर के बाहरी हिस्से में महिला के प्रजनन अंग है। लेकिन डॉक्टर ने कहा है की उस महिला के दोनों ऑप्शन है वो लिंग परिवर्तन करके पुरुष या महिला कुछ भी बन सकती है लेकिन अभी तक उस महिला का कोई जवाब नहीं आया है।

महिला के अंदर पुरुष का कारण-

आनुवंशिकविज्ञान के अनुसार ऐसी अवस्था का कारण तीन कायिक, या दैहिक क्रोमसोम समूह के साथ दो एक्स (X) क्रोमोसोमों का होना है। (गोल्डश्मिट्)। इस अनुपात के कारण मक्खियों की बाहरी आकृति नर तथा मादा का मिश्रण होती है, यद्यपि जनन से उनके शरीर में नर तथा मादा ऊतक (tissues) नहीं पाए जाते। वे आकृति में या तो नर ही होंगी, या मादा ही। ऐसे प्राणी वंध्या होते हैं। ब्रैवेल ने बतलाया है किअंतर्लिगी की जनन ग्रंथियाँ तो एक ही प्रकार की होती हैं, किंतु कुछ या सभी सहायक अंग तथा गौण लक्षण दूसरे लिंग का निर्णय मात्र कर देते हैं उनका वास्तविक विकास हार्मोनों के प्रभाव से ही होता है।

सन् 1923 में क्रिउ ने कुछ घरेलू पशुओं (बकरे, सूअर, घोड़े, चौपाए, भेड़ तथा ऊँट) की जाँच की और पाया कि उनमें मिथ्या मध्यलिंगता (pseudo-intersexuality) थी, अर्थात् कुछ में तो नारी जननांग अत्यंत संकुचित थे, कुछ में सीधे और स्पष्ट, किंतु अनपेक्षित लंबे थे, तथा कुछ में स्पष्टत: नर के समान, किंतु अपूर्ण नलिकायुक्त थे।मनुष्यों में मध्यलिंगता की स्थिति में पुरुष एवं स्त्री का भेद करने वाले शरीरांगों एवं लक्षणों का विचित्र मिश्रण पाया जा सकता है।

मेडिकल विज्ञानं के तहत समझते है –

मध्यलैंगिकता के कई प्रकार और चिंहक (markers) हैं और यह हमारे शरीर में गुणसूत्र (chromosome) नामक संरचना की वजह से है।गुणसूत्र एक धागे जैसी संरचना है जो मानव के लिंग को निर्धारित करने की कुंजी हैं। गुणसूत्र दो प्रकार के होते हैं– X और Y। यह इन दो गुणसूत्रों का संयोजन है जो हमारे लिंग को निर्धारित करता है। XY गुणसूत्रों का संयोजन हमें पुरुष देता है,और XX का संयोजन औरत देता है।

गुणसूत्र युवावस्था, यौनरुचि और शरीर के बाल संबंधी चीजों के लिए भी जिम्मेदार होते हैं।जैसे पुरुषों और महिलाओं को निर्धारित करने में गुणसूत्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, वैसे ही मध्यलिंगी व्यक्तियों की सेक्स विशेषताओं के निर्धारण में भी इनकी अहम भूमिका होती है। एक व्यक्ति मध्यलिंगी है या नहीं, ये तीन संकेतकों के माध्यम से निर्धारित किया जा सकता है – उसके जननांग, प्रजनन अंग और / या लैंगिक विशेषतायें।गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब महिला जननांग के उदाहरण हैं, जबकि वृषण और प्रोस्टेट पुरुष जननांग के।

कई मध्यलिंगी व्यक्तियों में, अविकसित जननांगता की संभावना होती हैं, कभी–कभी कुछ भाग अवयव नहीं होते हैं और कभी–कभी उनमें अस्पष्ट जननांगों की उपस्थिति भी पायी गई है।लेकिन यौन अंगों की अस्पष्टता हमेशा जन्म के समय से ही ज्ञात नहीं होती है। कई इंटरसेक्स लोगों को यह तब तक पता नहीं होता है जब तक वे यौवन तक नहीं पहुंचते हैं और जब तक वो नोटिस नहीं करते हैं कि उनके यौन अंग और शरीर के वो हिस्से जो हार्मोनल विकास से प्रभावित हैं, वे दूसरों के समान नहीं दिखते हैं।

ट्रांसजेंडर और मध्यलिंगी एक होते है क्या ?

ट्रांसजेंडर लोग वो होते हैं जिनकी अपनी पहचान ( यानी आदमी/ औरत/ नॉन बाइनरी, यानी इन दो आधारों से अलग पहचान ) उस जेंडर पहचान से अलग होती है, जो उन्हें जन्म के समय दी गयी थी l ट्रांसजेंडर होने का मतलब उस जेंडर को अपनाना है जिससे वो अपनी पहचान बनाना चाहता है, जबकि मध्यलिंगी होना एक अलग, संपूर्ण लिंग के बारे में है। एक मध्यलिंगी व्यक्ति स्वयं को ट्रांसजेंडर के रूप में प्रस्तुत कर सकता है लेकिन वह असल में ट्रांसजेंडर नहीं होता है। इन दोनों में कुछ मिलता जुलता हो सकता है, पर ये एक नहीं हैं l दोनों की अलग अलग पहचान हैं l हमारे काम है की आप तक हर तरह की खबर पहुचाये। आप को अच्छा लगे तो हमे समर्थन दे।

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