मनुष्य और मशीन कौन ज्यादा शक्तिशाली है ?

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मनुष्य और मशीन

मनुष्य और मशीन में कौन बेहतर है ?

मनुष्य और मशीन इनकी तुलना अक्सर होती रहती है।ये बात आपको इसलिए बता रहा हूँ की क्योकि आज से 25 साल पहले एक मैच हुआ था।विश्व के सर्वात्तम ग्रांडमास्टर गैरी कास्परोव औरआई बी ऍम के सुपर कंप्यूटर डीप ब्लू के बीच हुआ और ओपनिंग गेम में ही सुपर कंप्यूटर ने गैरी कास्परोव को हरा दिया और ये इतिहास के पहली घटना थी जब दुनिया के सबसे तेज़ शतरंज के माहिर खिलाडी को एक मशीन से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन गैरी ने चालाकी से अपनी खेलने की स्टाइल को बदला मशीन की क्षमताओं को देखते हुए और पूरा टूर्नामेंट 4 -2 से जीत लिया।ये जीत भी इतिहास याद रखेगी।

क्योकि मनुष्य और मशीन कितनो भी शक्तिशाली हो जाये लेकिन मशीन को इंसानो ने ही बनाया है।ये घटना फरबरी 1997 महीने की है।गैरी उस समय केवल 22 साल के थे और उन्हें एक ख़िताब और मिला सबसे कम उम्र में सुपर कंप्यूटर डीप को हराया।लेकिन मशीन कहे या आई बी ऍम के सुपर कंप्यूटर डीप ब्लू ने भी दुनिया के उस समय के महातम खिलाडी से इतनी भी आसानी से हार नहीं माना था।और 4 मैच के टूर्नामेंट में 2 मैच जीते थे।और पहला मैच जीतकर दुनिया को चौका दिया था। लेकिन आप समझ सकते है की सुपर कंप्यूटर को दुनिया के बेहतरीन खिलाडी ने हराया था।

कास्पारोव के शतरंज की शुरुआत-

कास्पारोव का जन्म बाकू, आज़रबाइजान,सोवियत संघ में 13 अप्रैल 1963 को हुआ था। वह 6 वर्ष की उम्र में शतरंज खेलने लगे थे । 13 वर्ष की उम्र होने से पहले वे सोवियत युव चैंपियन बन गए और अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट 16 वर्ष की उम्र में जीत गये थे।1982 के शतरंज उमेलम्पियाड में इन्होंने विश्व चैम्पियन कारपोव को चुनौती दी।1985 में इन्होंने कारपोव को 5 बाजियों में हराकर उनसे विश्व विजेता होने का खिताब छीन लिया। कास्पारोव से 1986 में कारपोव चुनौती देकर फिर हार गये ।

एक गेम ऐसा भी जिसमे खिलाडी अपना मानसिक संतुलन खो सकते थे –

सन् 1995 में कास्पारोव तथा कारपोव के बीच ऐसा संघर्षमय मुकाबला हुआ, जिसमें पहले कारपोव 5-0 की बढ़त लिये हुए थे।बाद में कारयारोव ने 17 अनिर्णीत बाजियों में 3 जीत हासिल कर स्कोर 5-3 कर दिया, किन्तु अत्यन्त रहस्यमय ढग से केंपोमेना के आदेश पर यह खेल यह कहकर रुकवा दिया गया कि यदि यह खेल नहीं रोका जाता, तो दोनों खिलाड़ियों में से एक अपना मानसिक सन्तुलन खो बैठता।

लेकिन इससे कास्पारोव भोखला गये थे।1995 में विश्वविख्यात शतरंज खिलाड़ी गैरी कास्परोव से व‌र्ल्ड चैंपियनशिप मुकाबला विश्वनाथन के कॅरियर के लिए मील पत्थर साबित हुआ था।भारत का भी इतिहास शतरंज जैसे खेल में समृद्ध रहा है लेकिन गैरी कास्पारोव अलग ही था।

गैरी कास्पारोव रूस के उन विश्व शतरंज चैम्पियनों में से थे, जो शतरंज जैसे दिमागी खेल में इतनी महारत हासिल कर चुके थे कि वे शतरंज की चालें व रण नीतियों में समय बर्बाद करने की बजाय सीधे खेल पर आ जाते थे।अपना खाली समय अंग्रेजी लिटरेचर पढने, संगीत सुनने, फुटबाल खेलने में देते थे।देखिये अगर आप तुलना ही करते हो दोनों तरफ से होती है अब जानते है सुपर कंप्यूटर डीप ब्लू में क्या खूबी थी।

सुपर कंप्यूटर डीप ब्लू की खासियत –

ये गणना-शक्ति तथा कुछ अन्य मामलों में सबसे आगे होते हैं।अत्याधुनिक तकनीकों से लैस सुपर कंप्यूटर बहुत बड़े-बड़े परिकलन और अति सूक्ष्म गणनाएं तीव्रता से कर सकता है। इसमें कई माइक्रोप्रोसेसर एक साथ काम करते हुए किसी भी जटिलतम समस्या का तुरंत हल निकाल लेते हैं।वर्तमान में उपलब्ध कंप्यूटरों में सुपर कंप्यूटर सबसे अधिक तीव्र क्षमता, दक्षता व सबसे अधिक स्मृति क्षमता वाला कंप्यूटर है।आधुनिक परिभाषा के अनुसार,वे कंप्यूटर, जो 500 मेगाफ्लॉप की क्षमता से कार्य कर सकते हैं,सुपर कंप्यूटर कहलाते है।मनुष्य और मशीन एक दूसरे पर इठलाते है।

सुपर कंप्यूटर एक सेकंड में एक अरब गणनाएं कर सकता है।इसकी गति को मेगा फ्लॉप से नापते है।इसका उपयोग खासकर ऐसे क्षेत्रों में किया जाता है,जिनमें कुछ ही क्षणों में बड़े पैमाने पर गणनाएं करने की जरूरत पड़ती है।लेकिन एक बात समझने योग्य है की पहला सुपर कंप्यूटर डेनियल स्लोटनिक ने विकसित किया था।मनुष्य और मशीन इसकी कार्य क्षमता 30 करोड़ परिकलन क्रियाएं प्रति सेकंड थी,अर्थात जितनी देर में हम बमुश्किल 8 तक की गिनती गिन सकते हैं, उतने समय में यह जोड़, घटाना, गुणा,भाग के 30 करोड़ सवाल हल कर सकता था।लेकिन अब तक तो मनष्य और मशीन की जंग में मनुष्य ही जीतते आ रहे है। लेकिन आगे क्या होगा या क्या होने वाला है इसका किसी को भी पता नहीं है। लेकिन हमारा काम आपके पास हमेशा एक अलग नजरिये के साथ आये।इसलिए हमे समर्थन दे।

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