महान धावक बोल्ट के जीत का राज क्या है –

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महान धावक

महान धावक उसैन बोल्ट-

महान धावक उसैन बोल्ट को कौन नहीं जानता है। इस समय टोकियो ओलिंपिक चल रहे है तो सोचा की ओलिंपिक के सबसे प्रतिष्ठित खेल के बारे में बात की जाये और उस खेल के महान खिलाडी उसैन बोल्ट के बारे में बात की जाये और आप को बताया जाये की वो कैसे दुनिया के सबसे तेज़ दौड़ने वाले इंसान है। क्योकि धावक के जितने में उसके शरीर की बनावट का भी बहुत योगदान है।

जैसे तैराकी में जब माइकल ने सभी प्रतोयोगिता जीत ली तो उनके शारीरिक बनावट के बारे में लोग जानने के इच्छुक थे।उसी तरह बोल्ट ने भी 100 मीटर, 200 मीटर और 4×100 मीटर रिले में स्वर्ण जीता। 2008 में बीजिंग में हुए ओलंपिक खेलों के बाद बोल्ट ने हर विश्व चैम्पियनशिप और ओलंपिक में जीत हासिल की है। आख़िर उनके इस बेहतरीन रिकॉर्ड का राज़ क्या है? क्या फ़र्राटा दौड़ में पैरों को प्रतिद्वंदियों से तेज़ चलाना ही जीत की गारंटी है।

आम इंसान और धावक के दौड़ने में अंतर-

जब कोई आम इंसान दौड़ना शुरू करता है तो वो बहुत तेज़ी से अपने पैर चलाने की कोशिश करता है। ऐसे में आपको लग सकता है कि बोल्ट भी यही करते होंगे, जबकि ऐसा नहीं है। विज्ञानिको का मानना है की ” जो शीर्ष धावक होते हैं वो आम लोगों के मुक़ाबले कोई बहुत तेज़ी से पैर नहीं चलाते।शीर्ष धावकों की शारीरिक बनावट इस तरह की होती है कि उनकी मांसपेशियां अधिक तेज़ी से चलती हैं।

ऐसे में वे बहुत ज़्यादा ताक़त पैदा करने में सक्षम होते हैं।ऐसे में यह होता है कि ये लोग दौड़ते वक़्त ज़मीन पर कम समय के लिए अपने पैर रखते हैं. इसलिए यह अधिक तेज़ी से आगे बढ़ने में सक्षम होते हैं।शीर्ष धावक एक क़दम से दूसरे क़दम के बीच 0.08 सेकेंड का समय लेते हैं जबकि एक आम आदमी 0.12 सेकेंड का समय लेता है। दौड़ते वक़्त धावक 60 प्रतिशत समय हवा में रहते हैं, वहीं एक आम आदमी 50 प्रतिशत समय ही हवा में गुज़ारता है।

बोल्ट की शारीरिक बनावट और रेस –

वैज्ञानिकों का कहना है कि महान धावक यूसैन बोल्ट के शरीर की पांच फ़ुट, छह इंच की लंबाई और उनकी शक्ति और ऊर्जा का समन्वय उनको सबसे तेज़ रफ़्तार वाला बेजोड़ महान धावक बनाता है।बोल्ट ने 2009 की बर्लिन विश्व चैंपियशिप में 100 मीटर की दूरी 9.58 सेकेंड में पूरा करने का रिकॉर्ड बनाया था जिसे आज तक कोई धावक नहीं तोड़ पाया। बोल्ट ने 9.58 सेकेंड में 100 मीटर का लक्ष्य अपनी रफ़्तार को 12.2 मीटर प्रति सेकेंड तक पहुंचाकर हासिल किया |यानी बोल्ट 27 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहे थे।

बोल्ट की रफ़्तार का विश्लेषण करने वाली टीम ने पाया कि बोल्ट में सर्वाधिक शक्ति तब पैदा हुई जब वह दौड़ में आधी रफ़्तार पर एक मीटर की दूरी सेकेंड से भी कम समय में तय कर रहे थे।इस प्रदर्शन से रफ़्तार में आने वाली बाधा का तात्कालिक प्रभाव देखा जा सकता है, जहां हवा का प्रतिरोध गतिशील वस्तुओं की रफ़्तार को धीमा कर देता है।वैज्ञानिकों के मुताबिक़ यूसैन बोल्ट के दौड़ने के दौरान मांसपेशियों से पैदा होने वाली ऊर्जा का केवल आठ फ़ीसद इस्तेमाल हो रहा था।बाकी ऊर्जा हवा द्वारा उत्पन्न प्रतिरोध में ख़त्म हो रही थी।

बोल्ट और भी तेज़ हो सकते है –

आजकल रिकॉर्ड तोड़ना काफी कठिन हो गया है।यहां तक कि सेकेंड के सौवें हिस्से से भी रिकॉर्ड तोड़ना बहुत बड़ी बात है।धावक की बढ़ती रफ़्तार के साथ विपरीत दिशा से लगने वाले अवरोध में तेज़ी से बढ़ोत्तरी होती है।इस कारण महान धावक को रिकॉर्ड बनाने या तोड़ने के लिए अवरोध से निपटने में सारी ताकत झोंकनी पड़ती है।ऐसा पृथ्वी के वातावरण की ‘भौतिक बाधाओं’ के कारण होता है।अगर बोल्ट किसी कम घने वातावरण वाले ग्रह पर दौड़ रहे होते, तो उनके रिकॉर्ड तुलनात्मक रूप से काफी बेहतर होते। बोल्ट की स्थिति के सटीक अध्ययन और दौड़ के दौरान उनकी गति ने धावकों पर अवरोध के असर का अध्ययन करने का शानदार मौका दिया है।

महान धावक बोल्ट का प्रतिक्रिया काल धीमा होता है –

रेस शुरू करने के लिए दागी गई गोली पर महान धावक बोल्ट का प्रतिक्रिया काल धीमा होता है अगर वे तेज़ शुरुआत करें तो लंबे डग भरने की वजह से उनकी रफ़्तार और बढ़ सकती है जैसा की लोग मानते है बोल्ट की मांसपेशियां काफी मज़बूत और तेज़ी से हरकत में आने वाली हैं वे लंबे डग भरने के कारण दौड़ को बेहद जल्दी पूरा कर सकते हैं।बोल्ट जेनेटिक रूप से बहुत लंबे हैं ऐसे में जब वो दौड़ना शुरू करते हैं तो उनके लिए छोटे क़दम लेना आसान नहीं होता।

लेकिन जब वो अपनी टॉप स्पीड पर पहुंचते हैं तो सभी को पीछे छोड़ देते हैं।आमतौर पर बोल्ट 100 मीटर की दौड़ 41 क़दमों में पूरा कर लेते हैं,जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी इस दूरी को कऱीब 45 क़दमों में पूरी करते हैं। क़दमों के बीच में जो फासला होता है वो शीर्ष धावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. इसी 100 मीटर की दौड़ को एक आम आदमी 50 से 55 क़दम में पूरा कर पाता है।

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