महाभियोग:अमेरिका में राष्ट्रपति पर क्यों लगता है महाभियोग ?

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महाभियोग

महाभियोग और परिस्थति –

महाभियोग एक प्रक्रिया है इसपे हमारी नज़र इन दिनों पड़ी जब ट्रम्प समर्थकों ने अमेरिका की संसद में हंगामा किया । फिर हमने सोचा क्यों न इसको पुरे विस्तार से समझे ।महाभियोग की प्रक्रिया से अमेरिका के कई राष्ट्रपति गुज़र चुके है ।महाभियोग की प्रक्रिया तब होती है जब अमेरिका में अमेरिका के राष्ट्रपति अभियुक्त हो और ये भी तय है की उनपे दोष किस तरह के हो जैसे -राजद्रोह , घुस लेने का आरोप , दुराचार और भी हाई क्राइम हो|ये आप यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका के सविधान आर्टिकल 2 सेक्शन -4 लिखा है ।

महाभियोगसंयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान के अनुसार उस देश के राष्ट्रपति, सहकारी राष्ट्रपति तथा अन्य सब राज्य पदाधिकारी अपने पद से तभी हटाए जा सकेंगे जब उनपर राजद्रोह, घूस तथा अन्य किसी प्रकार के विशेष दुराचारण का आरोप महाभियोग द्वारा सिद्ध हो जाए (धारा 2, अधिनियम 4)।। अमेरिका के विभिन्न राज्यों में महाभियोग का स्वरूप और आधार भिन्न भिन्न रूप में हैं। प्रत्येक राज्य ने अपने कर्मचारियों के लिये अभियोग संबंधी भिन्न भिन्न नियम बनाए हैं, किंतु नौ राज्यों में महाभियोग चलाने के लिये कोई कारण विशेष नहीं प्रतिपादित किए गए हैं अर्थात् किसी भी आधार पर महाभियोग चल सकता है।

महाभियोग का जन्म कहा हुआ –

महाभियोगमहाभियोग के जन्म से यहाँ मतलब इसकी शुरवात कहा से हुई या कहे की ये शब्द आया कहा से और किस देश में इसका पहला प्रयोग हुआ ।महाभियोग का मूल शब्द -अभियोग है ।और अभियोग का अर्थ होता है दोषरोपड़ या आरोप लगने से है । किसी भी देश में जहाँ लोकतंत्र है वहाँ देश सविधान के बनाये नियम -कानून से चलता है।देश न्यायपलिका , विधायिका , कार्यपालिका से ही चलता है ।इंग्लैंड में राजकीय परिषद क्यूरिया रेजिस के न्यासत्व अधिकार द्वारा ही इस प्रक्रिया का जन्म हुआ। जब किसी बड़े अधिकारी या प्रशासक पर विधानमंडल के समक्ष अपराध का दोषारोपण होता है तो इसे महाभियोग कहा जाता है।जब क्यूरिया या पार्लियामेंट का हाउस ऑफ लार्ड्स तथा हाउस ऑफ कामंस, इन दो भागों में विभाजन हुआ तो यह अभियोगाधिकार हाउस ऑफ़ लार्ड्स को प्राप्त हुआ।इंग्लैंड में कुछ महाभियोग इतने महत्वपूर्ण हुए हैं कि वे स्वयं इतिहास बन गये ।

इंग्लैंड के महाभियोग और अमेरिका के महाभियोग में अंतर –

महाभियोगजैसा की हम जानते है की महाभियोग की प्रक्रिया इंग्लैंड से ही जन्म ली है और कई देशों ने उसे अपनाये है लेकिन उसमे भी अपने कानून के हिसाब से मूल -चूल परिवर्तन किये है । सबसे पहला तो अभियोग सिद्ध हो जाने पर दंड से सम्बंधित है ।इंग्लैंड में महाभियोग की पूर्ति के पश्चात् क्या दंड दिया जायेगा, इसकी कोई निश्चित सीमा नहीं, किंतु अमरीका में संविधानानुसार निश्चित है कि महाभियोग पूर्ण हो चुकने पर व्यक्ति को पदभ्रष्ट किया जा सकता है तथा यह भी निश्चित किया जा सकता है कि भविष्य में वह किसी गौरवयुक्त पद ग्रहण करने का अधिकारी न रहेगा। इसके अतिरिक्त और कोई दंड नहीं दिया जा सकता। यह अवश्य है कि महाभियोग के बाद भी व्यक्ति को देश की साधारण विधि के अनुसार न्यायालय से अपराध का दंड स्वीकार कर भोगना होता है।

भारतीय सविधान में भी महाभियोग की प्रक्रिया –

भारतीय संविधान में इस प्रक्रिया को संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है। महाभियोग वो प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जजों को हटाने के लिए किया जाता है। इसका ज़िक्र संविधान के अनुच्छेद 61, 124 (4), (5), 217 और 218 में मिलता है।इसके तहत सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज पर साबित कदाचार और अक्षमता के लिए महाभियोग का प्रस्ताव लाया जाता है ।मुख्या न्यायधीश के खिलाफ किसी भी सदन में अभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है ।लेकिन लोकसभा में इसे पेश करने के लिए कम से कम 100 सांसदों के दस्तख़त, और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के दस्तख़त ज़रूरी होते हैं|

इसके बाद अगर उस सदन के स्पीकर या अध्यक्ष उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लें (वे इसे ख़ारिज भी कर सकते हैं) तो तीन सदस्यों की एक समिति बनाकर आरोपों की जांच करवाई जाती है।सिक्किम हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस पीडी दिनाकरन के ख़िलाफ़ भी महाभियोग लाने की तैयारी हुई थी लेकिन सुनवाई के कुछ दिन पहले ही दिनाकरन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया|2015 में ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस एसके गंगेल के ख़िलाफ़ भी अभियोग लाने की तैयारी हुई थी लेकिन जांच के दौरान उन पर लगे आरोप साबित नहीं हो सके|

आंध्र प्रदेश/तेलंगाना हाई कोर्ट के जस्टिस सीवी नागार्जुन रेड्डी के ख़िलाफ़ 2016 और 17 में दो बार महाभियोग लाने की कोशिश की गई लेकिन इन प्रस्तावों को कभी ज़रूरी समर्थन नहीं मिला|उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ 2018 में राज्य सभा में प्रस्ताव लाया गया जिसे उपराष्ट्रपति वैंकैया नायडू ने ख़ारिज कर दिया।भारत में आज तक किसी जज को अभियोग लाकर हटाया नहीं गया क्योंकि इससे पहले के सारे मामलों में कार्यवाही कभी पूरी ही नहीं हो सकी|

ट्रम्प पर दो बार महाभियोग क्यों लगा –

महाभियोगअमेरिका के इतिहास में ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं जिनके ख़िलाफ़ एक ही कार्यकाल में दो बार प्रस्ताव पारित किया गया है|ट्रंप पर पिछले सप्ताह अपने समर्थकों को कैपिटल हिल यानी अमेरिकी संसद परिसर पर हमला करने के लिए उकसाने का आरोप था| जिसे सदन में 197 के मुक़ाबले 232 वोटों से पारित कर दिया गया|दस रिपब्लिकन्स सांसदों ने अभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया|दिसंबर 2019 में भी उन पर महाभियोग लाया गया था क्योंकि उन्होंने यूक्रेन से बाइडन की जाँच करने का कहकर क़ानून तोड़ा था|हालांकि सीनेट ने उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया था|लेकिन उस समय एक भी रिपब्लिकन सांसद ने ट्रंप के ख़िलाफ़ वोट नहीं दिया था|हमारी कोशिश यही रहेगी की आपके मनोरंजन के साथ साथ आपको कुछ ज्ञान की बातें बता सके |

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