बिना ऑक्सीजन के 10 बार माउंट एवेरस्ट पे चढ़ने वाला शख्स –

0
133
माउंट एवेरस्ट (6)

माउंट एवेरस्ट विश्व की सबसे ऊंची चोटी-

पर्वत पे चढ़ना और उतरना मनो खेल बना दिया हो इस इंसान ने क्योकि पर्वत पे चढ़ना सीढ़ी चढ़ने जैसा आसान नहीं है |इस समय के तो लोग ज्यादा सीढ़ी हो तब लिफ्ट से ही ऊपर जाना पसंद करते है | माउंट एवेरस्ट को विश्व की सबसे ऊंची चोटी माना जाता है और विश्व भर लोग नेपाल में हर साल कई हजार पर्यटक माउंटेन को फतह करने आते है कई तो यहाँ से जिन्दा ही वापस नहीं जा पाते | और कई घायल अपने देश पहुंचते है | क्योकि समुद्रतल से इसकी उचाई 29002 फ़ीट है |वैज्ञानिक ये भी मान रहे है की माउंट एवेरस्ट की उचाई प्रतिवर्ष 2 सेमी के हिसाब से बढ़ रही है |

माउंट एवेरस्ट (3)

नेपाल के अंग रीता शेरपा 10 बार पर्वत जीता –

नेपाल में इसको सगरमाथा नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ होता है स्वर्ग का शीर्ष |ऐसे ही पर्वत पे 10 बार चढ़ना वो भी बिना ऑक्सीज़न के कमाल नहीं तो क्या है क्योकि पर्वत चढ़ना कोई आसान काम नहीं है कई तरह की चुनौतियाँ को सामना करना पड़ता है |बर्फीले तुफानो का सामना करना पड़ता है | इस शख्स का नाम अंग रीता शेरपा है जिनका आज ही देशांत हो गया है वो ७२ साल के थे | उनका नाम इसलिए गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड में भी दर्ज हुआ है |उनके जाने पे कई लोगों ने दुःख प्रकट किया है जिसमे नेपाल के प्रधानमंत्री ओली भी शामिल रहे है |

माउंट एवेरस्ट (2)

आये जानते है उनकी उपलब्धियों को एक पर्वतारोहण के नजरिये से –

पर्वतारोहण या पहाड़ चढ़ना शब्द का आशय उस खेल, शौक़ अथवा पेशे से है जिसमें पर्वतों पर चढ़ाई, स्कीइंग अथवा सुदूर भ्रमण सम्मिलित हैं। पर्वतारोहण की शुरुआत सदा से अविजित पर्वत शिखरों पर विजय पाने की महत्वाकांक्षा के कारण हुई थी और समय के साथ इसकी 3 विशेषज्ञता वाली शाखाएं बन कर उभरीं हैं: चट्टानों पर चढ़ने की कला, बर्फ से ढके पर्वतों पर चढ़ने की कला और स्कीइंग की कला. तीनों में सुरक्षित बने रहने के लिए अनुभव, शारीरिक क्षमता व तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है।पर्वतारोहण एक खेल, शौक या पेशा है|UIAA एक संस्था है जो पर्वतारोहण के लिए मान्य संस्था है | इसका पूरा नाम है -यूनियन इंटरनेशनल डेस एसोसिएशन एंड डी’एल्पिनिसमे |इस संस्था का काम पर्वतों पे जाने वाले पर्वतारोही को चिकित्सा समस्यायों, बर्फ पर चढ़ाई, नवयुवक आरोही तथा पर्वत व आरोही की सुरक्षा विषयो पर काम करना है |

एक पर्वतारोही को कैसे जूते और औजार अपने साथ रखने पड़ते है और क्यों ?

जब बात करते है हम माउंट एवेरस्ट की तो वो बर्फ से ढका है | ठोस बर्फ में पैदल चलना बहुत मुश्किल होता है |इसके लिए पर्वतरोही को अलग तरह के जूते प्रयोग करने होते है जिसमे स्पाइक होते है जो ठोस बर्फ पे चलने में बहुत सहायक होते है |ये बर्फ में चिपक जाते है जिससे खड़ी चढाई और उतराई उपयोगी होते है |और साथ में एक कुल्हाड़ी भी रखते है |ये सब बर्फ पे ही निर्भर करता है |गहरी बर्फ में चलने के लिए विशेष हिम-जूतों का प्रयोग किया जा सकता है। स्की का प्रयोग उन प्रत्येक स्थानों पर किया जा सकता है जहां हिमजूतों का प्रयोग किया जाता है और इसके अतिरिक्त उनका प्रयोग सीधे व ऊँचे स्थानों पर भी किया जा सकता है।

हिमनद और बर्फ की खाइआ में क्रैम्पोन और रसिया का प्रयोग

माउंट एवेरस्ट (7)

हिमनद पर चलते समय बर्फ की खाईयां सबसे अधिक खतरनाक होती हैं। बर्फ में यह विशाल दरारें अक्सर नज़र नहीं आतीं क्योंकि इन पर बर्फ की एक पतली परत जमने से एक स्नो ब्रिज सा बन जाता है। कई बार यह स्नोब्रिज केवल कुछ इंच ही मोटे होते हैं। पर्वतारोही रस्सियों की एक प्रणाली का उपयोग कर स्वयं को ऐसे खतरों से सुरक्षित रखते हैं। हिमनद यात्रा के लिए बुनियादी रूप में बर्फ की कुल्हाड़ी तथा क्रेम्पोन आवश्यक हैं। दो से पांच पर्वतारोहियों के दल एक रस्सी में समान दूरी पर बांधे जाते हैं। अगर एक पर्वतारोही गिरने लगता है तो अन्य सभी अपने स्थान पर स्थिर हो जाते हैं और सबकी शक्ति उसे गिरने से रोक लेती है। टीम के अन्य सदस्य गिरने वाले साथी को दरार से निकाल लेते हैं।

एक पर्वतारोही को कैसे खतरों का सामना करना पड़ता है –

पर्वतरोहियों को दो तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है एक जो नेचुरल और एक जो उनकी असावधानियों से बने | जैसे नेचुरल से मतलब प्राकृतिक से जैसे -जैसे चट्टानों का गिरना, हिमस्खलन और ख़राब मौसम|दूसरा खतरा जैसे -असावधानी के कारण उपकरण की खराबी और टूटना, थकान एवं अपर्याप्त तकनीक | लेकिन जब बर्फीले तूफ़ान आते है तो रास्ते बर्फों से ढक जाता है और उससे पर्वतरोही को अपना रास्ता बदलना पड़ता है ये खतरा सबसे बड़ा खतरा होता है |यही पे पर्वतरोही की परीक्षा होती की वो कितना कुशल है |

ऐटिटूड सिकनेस क्या है ?

माउंट एवेरस्ट (4)

हिमस्खलन ये सबसे बड़ा खतरा है लोगों का मानना है की लोग इससे बचने में सक्षम है लेकिन हर साल हिमस्खलन से 150 से 200 लोग मारे जाते है और इसमें तो कई सक्षम पर्वतारोही भी होते है |ऐटिटूड सिकनेस की समस्या आती जब हम ज्यादा उचाई पे पहुँचते है और सिकनेस के सामान्य लक्षणों में सख्त सिरदर्द, सोने की समस्या, मतली, भूख की कमी, सुस्ती और बदन दर्द है|और इसलिए पर्वतारोहि का नारा होता है -ऊंचे पर्वतों पे चढ़े और नीचे आके सोए |ये बीमारी बढ़ती है तो 24 घंटे के समय में पर्वतारोहि मर भी सकता है|

पर्वतारोहि को ऑक्सीजन सिलेंडर की जरुरत क्यों पड़ती है –

जब पर्वत पे आप ज्यादा उचाई पे पहुँचते है तो वायुमंडलीय दाब कम होता है और इस कारण से सांस के लिए ऑक्सिजन की कमी होती है और ऐटिटूड सिकनेस इसका आधारभूत लक्षण होता है | सामान्यता 7000 फ़ीट की उचाई पे पहुंचने पे पर्वतारोही बोतलबंद कृत्रिम आक्सीजन का प्रयोग कर लेते हैं|लेकिन कुछ विशेष पर्वतरोही होते है जो माऊंट एवेरस्ट पे भी बिना ऑक्सीज़न के चढ़ जाते है वो भी एक बार नहीं 10 बार और इसलिए अंग रीता शेरपा का नाम हमेशा इस उपलब्धि के लिए याद रखा जायेगा |जब भी लगा की मनुष्य हारता है या निराश प्रतीत होता है या पूरा का पूरा कृतिम चीजें पे निर्भर होता चला गया है तभी कई ऐसी घटना घटित होती है जो मानव की सीमाएं लाँघ सी जाती है | मेरा मतलब यहाँ उनके किये अचीवमेंट को बस बताना है |

माउंट एवेरस्ट (8)

सौर विकरण क्यों हो जाता है पर्वतों पे खतरनाक –

सौर विकरण – पर्वतों पे अधिक उचाई पे पहुंचने पे लोगों का शरीर झुलशने का खतरा रहता है |क्योकि वहाँ पे वायु मंडल पतला हो जाता है और सूर्य से आने वाली पराबैगनी किरणे कम अवशोषित करता है | जिसके कारण अंधेपन का खतरा भी 75 % बढ़ जाता है |इसलिए अंग रीता शेरपा को हमे सलाम करना चाहिए जिसने इन सब परिस्थितयों को झेलते हुए भी 10 बार माउंट एवेरस्ट पे फतह की |वो भी बिना ऑक्सीजन सिलिंडर के |

आप इसे पढ़ना भी पसंद कर सकते हैं:-नाओमी ओसाका :US Open 2020 जितने वाली 22 साल की युवती –

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here