मेक अप करना कब से शुरू हुआ ?

0
537
मेकअप

मेकअप और श्रृंगार-

मेकअप या श्रृंगार करना इस समय बहुत प्रचलित है और अब तो ज़माना ये आ गया है की पुरुष और महिलाये भी इस क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर चलते है।हर तरह का श्रृंगार करते है पुरुष हो या महिलाये।और इस क्षेत्र बड़ी –बड़ी कंपनी आ गयी है और उसका विज्ञापन भी फ़िल्मी हस्तियां करती है और करोड़ -अरबों रूपए इस क्षेत्र में लगा रखे है हेल्थ इंडस्ट्री के बाद ये सबसे बड़ी इंडस्ट्री बनके उभरी है।लेकिन क्या आपको पता है की आखिर ये मेक अप कब शुरू हुआ या कहे इसका इतिहास क्या है।इसको सबसे पहले किसने शुरू किया या किस देश या किस सहर में ये शुरू हुआ और इसकी जरुरत ही क्यों आन पड़ी।

शरीर और चेहरे पर मेक-अप और वनस्पति के रंगों के प्रयोग का साक्ष्य विभिन्न पांडुलिपियों और इतिहास पुस्तकों में दर्ज हैं। नव पाषाण युग में भी पुरूष और महिलाएं अपने शरीर को सजाने के लिए काया लेप और रंगों का प्रयोग करती थीं। उन दिनों मेक-अप का इस्तेमाल मौसम के अनुकूल त्वचा की रक्षा करने के लिए एक छद्मावरण उत्पाद के रूप में किया जाता था। मेक-अप का इस्तेमाल श्रृंगार,जनजातीय पहचान, सामाजिक स्तर और युद्ध व धार्मिक गतिविधियों की तैयारी के रूप में भी किया जाता था।क्लेयोपेट्रा के मेक-अप ने मिस्र की उत्तेजक आंखों को मशहूर कर दिया था।

श्रृंगार का सबसे पहले प्रयोग –

मेकअप प्रसाधनों के उपयोग का पहला पुरातात्विक सबूत प्राचीन इजिप्ट(मिस्र) में लगभग चार हजार ईसा पूर्व मिलता है। प्राचीन समय में ग्रीस और रोम में भी सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग होता था।प्राचीन मिस्रवासियों ने आँखों की बाहरी सजावट के लिए एक विधि ईजाद की थी जिसे सीसा, ताँबा और जले हुए बादाम व अन्य पदार्थों को मिलाकर तैयार किया जाता था।इसे कोल कहा जाता था।इसके बारे में मान्यता थी कि इसे लगाने से बुरी आत्मा का प्रकोप नहीं होता है और यह नजरों को तेज करता है।इसलिए इसका प्रयोग इजिप्ट में गरीब लोग भी करते थे।मिस्र की महारानी क्लियोपेट्रा के अप्रतिम सौंदर्य का राज उनके लिए विशेष प्रकार से तैयार की गई मेकअप सामग्री थी।

क्लियोपेट्रा की लिपस्टिक को एक विशेष प्रकार के लाल कीड़े से बनाया जाता था जो गहरे लाल रंग का होता था।इसमें चीटियों के अंडे भी मिलाए जाते थे।यहाँ सौंदर्य प्रसाधनों के प्रयोग का पहला पुरातात्विक सबूत 1931 में प्राप्त हुआ।सिंध प्रांत के चंहुदड़ो में सिंधुवासियों द्वारा उपयोग की जाने वाली लिपस्टिक मिली।एक उत्खनन कार्य ने एकाएक भारत के इतिहास को अधिक गौरवशाली बना दिया कि 2500 से 1750 ईसा पूर्व मानी जानी वाली यह भारतीय सभ्यता किसी भी मायने में मिस्र और रोम की सभ्यता से पीछे नहीं थी।

आधुनिक मेकअप को जन्म देने का श्रेय मैक्स फैक्टर को है।इनका जन्म पोलैंड के लॉड्ज में 1877 में हुआ। उनके व्यवसाय की शुरुआत 1902 में अमेरिका में हुई जब वे सेंट लुईस में हुए वर्ल्ड फेयर में परिवार सहित शामिल हुए। फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शुरुआत में उन्होंने बालों से संबंधित वस्तुएँ और त्वचा को चिकनाई देने वाली वस्तुएँ सेंट लुइस के स्थानीय रंगमंच कलाकारों को बेचना शुरू की। इस प्रकार उनकी शुरुआती छवि स्थापित हुई।

श्रृंगार में समय के साथ बदलाव –

एलिजाबेथ अर्डेन ने वर्ष 1910 में अपना पहला सैलून शुरू किया था और प्रसिद्ध काॅस्मेटिक श्रृंखला की प्रमुख बनी।
1 – यद्यपि मेक-अप का प्रयोग धीरे-धीरे प्रचलित हो रहा था किंतु अभी भी प्राकृतिक सुन्दरता का प्रचलन था।
2 – नेल पॉलिश का सृजन किया गया। यार्डले और हेलेना रूबेनस्टिन जैसी कंपनियां उभरीं।
3 – सन् 1930 में महिलाओं के चेहरे पर भारी मेक -अप हुआ करता था।सन् 1920 के अंत में पहली बार सुरक्षित संघटकों का उपयोग करते हुए मेक -अप तैयार किया गया।
4 – सन् 1923 में आईलेश कर्लर का आविष्कार हुआ।
5 – सन् 1910 में केवल वेश्याओं द्वारा ही मेक-अप का इस्तेमाल किया जाता था, किंतु सन् 1920 और 1930 की शुरूआत में अन्य महिलाओं ने भी इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया।

सन् 1930

1 – मैक्सफैक्टर ने 1936 में सौंदर्य प्रसाधन के सैलून की शुरूआत की। मैक्सफैक्टर ने पहली बार वाटर प्रफू केक फाउंडेशन व पैन-केक विकसित किया।
2 -चमकीले और गहरे रंगों की नेल पॉलिश का इस्तेमाल किया गया।
3 – इस समय सूर्य स्नान का प्रचलन था और जो प्राकृतिक त्वचा के रंग को अधिक रिफ्लेक्ट करता था।
4 – प्लास्टिक सर्जरी की शुरूआत हुई।

1940

सन् 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नियंत्रित वितरण करने के लिए मेक-अप का उपयोग कम किया गया। इस दौरान केवल लाल लिप्सटिक ही सरलता से उपलब्ध थी।इसके परिणामस्वरूप लाल लिप्सटिक 1940 का प्रतीक बन गयी।

सन् 1950

1– सन् 1950 के अंत तक ‘गुआनिन‘ युक्त कई नए मेक-अप की वस्तुएं आ गयीं जो पाउडर और पेंट में झिलमिल चमक देती थीं।
2-पेन-केक मेक-अप प्रसिद्ध हुआ और 1953 में 10 मिलियन से अधिक मेक-अप के सामानों की बिक्री हुई।

1960 –

1 – सन् 1960 के दौरान कई रूप आये और चली गयीं। 60 के दशक की शुरूआत में म्लान आकृति का प्रचलन था, किंतु दस वर्ष की अवधि के दौरान इस मेक-अप के आगमन से उस मेक-अप का प्रचलन समाप्त हो गया।
2 -मिनी स्कर्ट के उभरने से टांगों के मेक-अप की लोकप्रियता बढ़ी।
3 – इस दशक के अंत में चेहरे और शरीर पर पेंटिंग लोकप्रिय हुई।

सन् 1970 –

1 – डिस्को का प्रचलन हुआ और इसके परिणामस्वरूप चमकीले और इंद्रधनुषी रंगों की लोकप्रियता बढ़ी ।
2 -अराजक युवा को दर्शाता एक उग्र व्यक्ति जिसके बाल का रंग फ्लोरोसेंट और उसमें पिन जड़ा हो तथा वेधित चेहरा एवं युद्ध में भाग लेने वाले सैनिक की तरह पेंट वाले स्टाइल के साथ मेक-अप का प्रचलन शुरू हुआ ।

सन् 1980 –

1 – 1980 के मध्य तक विषम आकृति का प्रचलन था। पलकों पर विभिन्न रंग लगाए जाते थे।
2 – भौहों को आकार देना बंद कर दिया गया और इसे स्वाभाविक रूप में रखा जाता था।

सन् 1990 और वर्तमान-

1 -कुल मिलाकर एक प्राकृतिक त्वचा रंग जिसमें एक बेहतर प्राकृतिक परिसज्जा थी, फैशन में था। होठों पर लाल रंग लगाया जाता था। मैट इसकी कुंजी थी।
2 – 1990 के अंत के दौरान चमकदार, भड़कीले और चमकीली मेकअप की व्यापक वापसी हुई।
3 – प्लास्टिक सर्जरी तकनीक में सुधार होता रहा और समाज अब पूर्णरूपेण मेकअप चाहता था।
4 -1990 के अंत में मेंहदी के टेटू और बिंदी फैशन का अंग बन गया।

हम हमेशा इन मेक अप के प्रोडक्ट को कॉस्मेटिक प्रोडक्ट कहते है क्या आपको पता है की आखिर ये नाम ही क्यों दिया गया है इसको क्योकियहाँ पर सौंदर्य प्रसाधनों का आविष्कार विशेष रूप से दासियों के लिए किया गया। इन दासियों को यहाँ पर “कासमेट” कहकर बुलाया जाता था।क्योकि रोम में सौंदर्य प्रसाधनों का आविष्कार विशेष रूप से दासियों के लिए किया गया। इन दासियों को यहाँ पर “कासमेट” कहकर बुलाया जाता था।इसलिए इसका नाम कॉस्मेटिक पड़ा है। हमारा हमेशा ये उद्देश्य रहता है की आपको कुछ रोचक जानकारी लेकर आये। हमारे आर्टिकल अगर आपको पसंद आ रहे है तो हमे समर्थन दे।

आप इसे पढ़ना भी पसंद कर सकते है:-ब्रह्माण्ड का केंद्र:वो जगह जहा दीवारों के कान नहीं होते –

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here