यौन उत्पीड़न:जज के फैसले ने क्यों मचाया भूचाल –

0
429
यौन उत्पीड़न

यौन उत्पीड़न और एक फैसला –

यौन उत्पीड़न पर सभ्य समाज की जो भी परिभाषा है उसके इतर अगर न्यायपालिका के (यौन उत्पीड़न)फैसले आते है तो लोगों को गुस्सा जाहिर करना लाजमी है|लेकिन हमे ये कभी ये नहीं भूलना चाहिए की जो फैसले देने वाले है वो भी इस समाज से है |बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने अपने हालिया फै़सले में यौन उत्पीड़न को परिभाषित करते हुए कहा है कि वक्षस्थल को जबरन छू लेने मात्र को यौन उत्पीड़न की संज्ञा नहीं दी जा सकती|इस फैसले से आपको क्या लगता है की ये एक तार्किक फैसला है।अदालत ने ये फ़ैसला सुनाते हुए एक नाबालिग़ बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराए गए शख़्स की सज़ा में बदलाव कर दिया है|

यौन उत्पीड़नन्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने फैसले में क्या कहा –

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने अपने फ़ैसले में लिखा है, “सिर्फ वक्षस्थल को जबरन छूना मात्र यौन उत्पीड़न नहीं माना जाएगा, इसके लिए यौन मंशा के साथ स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट होना ज़रूरी है “बेंच ने कहा है कि “सिर्फ वक्षस्थल को जबरन छूना (ग्रोपिंग) यौन उत्पीड़न के तहत नहीं माना जाएगा “|

यौन उत्पीड़नऐसा कहा जा रहा है की दोषी पाए गए व्यक्ति ने लालच देकर 12 साल की एक लड़की को अपने घर बुलाया और जबरन उसके वक्षस्थल को छूने और उसके कपड़े उतारने की कोशिश की|ये फ़ैसला मूल रूप से ग़लत लगता है कि अपराध सिद्ध करने के लिए यौन मंशा के साथ त्वचा से त्वचा के बीच संपर्क होना ज़रूरी है|यौन अपराधों के मामले में क़ानून बिलकुल स्पष्ट हैं|

उत्पीड़न के साथ क्यों बदल रही है समाज की परिभाषा –

यौन उत्पीड़न इस समय समाज की गंभीर समस्या बनी हुई है |जिसके इस तरह परिभाषित किया गया है की कोई भी गतिविधि जिसमे आपकी सहमति न हो उसे ही यौन उत्पीड़न कहा गया है |ये पूर्ण रूप से आपके इच्छा के विरुद्ध की गयी यौन गतिविधि है |इसमें आपके साथ किसी भी शारीरिक संपर्क को रखा गया है |ये महिलाओं ,बच्चों और पुरषों के साथ भी हो सकता है |

 

यौन उत्पीड़नयौन उत्पीड़न हमारे समाज में दूषित मानसिकता वालों लोगों दवरा किया जाता है |जो समाज को भी दूषित करता है और इससे पीड़ित इंसान पर इसका असर बहुत दिनों तक रहता है |यौन उत्पीड़न आपके स्वास्थ पर कई तरह के प्रभाव डालता है |ये शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह से समस्या पैदा करता है |हमारे मकसद ये है की आप इस परिभाषा से खुद को रिलेट करे और सोचे की जज साहिबा ने जो फैसला सुनाया है क्या वो उचित है या इसका कोई दूसरा पहलु भी है |

भारत में यौन उत्पीड़न-

यौन उत्पीड़न को मानवता के जघन्य अपराधों में से एक है |बच्चे या बुड्ढे हो इस अपराध से किसी भी आयु वर्ग के लोग अछूते नहीं है |जागरूकता के आभाव में कई जगह तो इसके रिपोर्ट भी नहीं होती है |सम्मान और प्रतिष्ठा के कई लोग इन चीजें को उजागर करने से भी बचते है |कभी -कभी पीड़ित व्यक्ति इसके जाँच में होने वाली परेशानियों से बचने के लिए भी इसे रिपोर्ट करने से बचते है |

यौन उत्पीड़न

जबकि यौन उत्पीड़न का केस होने पर पुलिस और डॉक्टर और फरेसंसिक की टीम पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए मदद करते है |डाटा के हिसाब से भारत में हर एक घंटे तीन यौन उत्पीड़न के मामले होते है |कई लोग जज के फैसले से सहमत नहीं दिख रहे है और अपनी दलील दे रहे है | और तो और सोशल मीडिया इसकी चर्चा जोरों पर है | हमारा काम कोई भी खबर आप तक पहुँचाना है |उनके समझना और अपने विवेक का आप खुद इस्तेमाल करे |

आप इसे पढ़ना भी पसंद कर सकते है:-केसर इतना कीमती क्यों ?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here