हमारा राष्ट्रीय गीत और उसके रचयिता कौन थे ?

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2008
राष्ट्रीय गीत

राष्ट्रीय गीत और उसके रचयिता कौन –

वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है | इसके रचयिता बंकिम चन्‍द्र चटर्जी जी ने संस्कृत में किया था | बंकिम चन्‍द्र चटर्जी जी बंगाल के बहुत बड़े लेखक थे | ये रवीन्द्रनाथ  टैगोर के अलग स्थान रखते थे | इनका जन्म उत्तरी २४ परगना के कोथलपाड़ा के नोहाटी के एक बहुत समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ था | उनकी शिक्षा हुगली के प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता में हुई थी | प्रेसीडेंसी कॉलेज में बी ए की उपाधि लेने वाले वो पहले भारतीय थे | पड़ने के बाद इनकी नियुक्ति डिप्टी मजिस्ट्रेट के रूप में हुई | बंगाल सरकार में ये सचिव पद पर भी रहे |

 

 बंकिम चन्‍द्र चटर्जी की रचना –

 

पहले बंगाली लेखक या तो इंग्लिश या तो संस्कृत में लिखा करते थे | बंकिम चन्‍द्र चटर्जी जी ने अपनी पहली रचना इंग्लिश में ही है | जिसका नाम है राजमोहन वाइफ है | इनकी पहली बांग्ला कृत रचना दुर्गेशनंदनी थी | जो १८६५ में प्रकाशित हुई | उसके बाद इन्होने १८७२ में मासिक पत्रिका बंगदृशन का भी प्रकाशन किया | इनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ है जिससे एक पोलिटिकल उपन्यास माना जाता है | इनके ज्यादतर उपन्यास का लगभग हर भाषा में अनुवाद किया गया है |

 

राष्ट्रीय गीत के बोल –

आजकल इस गीत पे कई लोग विवाद करते है | इसे पहली बार १८९६ में नेशनल कांग्रेस सत्र में गया था | इसकी पहली अंतरा-

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!

सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,

शस्यश्यामलाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्!

शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,

सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,

सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

इसका अनुवाद भी प्रस्तुत है की

मैं आपके सामने नतमस्‍तक होता हूं। ओ माता,

पानी से सींची, फलों से भरी,

दक्षिण की वायु के साथ शान्‍त,

कटाई की फसलों के साथ गहरा,

माता!

उसकी रातें चाँदनी की गरिमा में प्रफुल्लित हो रही है,

उसकी जमीन खिलते फूलों वाले वृक्षों से बहुत सुंदर ढकी हुई है,

हंसी की मिठास, वाणी की मिठास,

माता, वरदान देने वाली, आनंद देने वाली।

ये अंग्रेजी अनुवाद का हिंदी अनुवाद है |

 भारत में राष्ट्रीय गीत को कब मिली मान्यता –

देश के आज़ादी के बाद इसे सविधान सभा में २४ जनवरी १९५० स्वीकार कर लिया गया | इस गीत भारत भूमि की वंदना की गयी | इस गीत को सुनने के बाद खुद बे खुद देशभक्ति की भवना अपने अंदर जागृत होती है | पहले इस गीत को ही अपना राष्ट्रगान बनाना पे विचार चल रहा था | लेकिन बाद में इसपे विचार छोड़ दिया गया | संविधान सभा को दिया गया वक्तव्य – शब्दों व संगीत की वह रचना जिसे जन गण मन से संबोधित किया जाता है, भारत का राष्ट्रगान है, बदलाव के ऐसे विषय, अवसर आने पर सरकार अधिकृत करे और वंदे मातरम गान, जिसने कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, को जन गण मन के समकक्ष सम्मान व पद मिले। मैं आशा करता हूं कि यह सदस्यों को संतुष्ट करेगा।”

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