वैलेंटाइन डे स्पेशल -आखिर प्यार है क्या ?

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वैलेंटाइन डे

वैलेंटाइन डे स्पेशल -आखिर प्यार है क्या ?

 

‘प्यार’  एक शब्द एक अहसास या उससे भी ज्यादा कुछ है | इसे शायरों ने व्यक्त किया है कोई भी शायर किसी भी जबान का हो उसने इसे अपने शब्दों में -अपनी भाषा में व्यक्त किया है | और फ़िल्मी दुनिया के लोगों ने इसे बड़े परदे पे दिखाया | और कई उद्द्योग  इसे ढूंढने ने में इसे अभियक्त करने में और इसे बनाये रखने में छोटे -छोटे से बहुत बड़े हो गये | जबकि प्रेम है क्या ? लोगों को समझना बाकि है | मेरी समझ ये कहती है की लगाव ही प्यार है जिसे हम जटिल शब्दों में ‘ भावनात्मक सम्बन्ध ‘ भी कह सकते है | प्यार एक तरह ‘ स्वतंत्रता ‘ भी है जिसे सब लोग समझ सकते है जैसे की एक व्यक्ति जेल में बंद है और उसे वहाँ सब सुख -सुविधा मिल रही है हर तरह के ऐसो -आराम , सेक्स , हर वो चीज जो चाहता उसे मिल रही है फिर भी वो एक चीज ढूंढ़ता है वो क्या है ‘ स्वतंत्रता ‘ तो कह सकते है की प्यार एक ‘स्वतंत्रता’ भी है |जैसे एक अनाथ बच्चा जिसने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है और फिर वो एक अच्छे मुकाम पे पहुँचता है वो एकदम स्वतंत्र है उसका कोई बंधन नहीं है वो हर चीज कर सकता है | लेकिन वो चीज जो ढूंढ़ता है वो है बंधन ( प्यार का बंधन ) जो उसने अपनी अबतक के जीवन में नहीं देखा है | इसलिए आप प्यार को एक तरह की ‘ परतंत्रता ‘ भी कह सकते है | प्यार एक ‘जिज्ञासा ‘ भी है जो लोगों के मन होती है जिस चीज को वर्जित किया गया हो देखने या जानने से वो हमेसा उस ओर प्रेम के नज़र ( जिज्ञासा ) से देखते है | जैसे आप कभी जंगलों में सैर करने गये हो और आप पेड़ -पौधों और फूल पे ध्यान दे सकते है | उससे चिपक -चिपक के सेल्फी लेते हो | इससे खुश होते हो | लेकिन तस्वीर का एक बड़ा हिस्सा आप से छूट जाता है क्योकि ग्रह पे जीवन का सड़ने -गलने के चक्र है जो वनो को जिंदगी दे रहे है | आपके पैरों के नीचे फंगस के जाल है जिन्होंने आस -पास के पेड़ -पौधों बांध रखा है | ये गज़ब की बात है | इसलिए हमे वर्जित चीजों के बारों में बात करनी चाहिए युवा लोगों के साथ ताकि उनकी जिज्ञासा (प्रेम ) शांत हो सके और उन्हें लगे की उन्हें भी बड़ी तस्वीर देखने की इज़ाज़त है |तो है ना प्यार एक जिज्ञासा भी है |प्यार को परिभाषित नहीं किया जा सकता है |माता -पुत्र का प्यार अलग है | दोस्त -दोस्त का प्यार अलग है और भाई -भाई -भाई -बहन का प्यार अलग है |लेकिन हम ऐसे दौर है की यहाँ पे हर चीज का बाज़ारीकरण हो जाता है केवल अपने फायदे के लिए | और तो और आपके हीरो -हीरोइन इसको पूरा बढ़ावा देते है | पूरा का पूरा माहोल बनाया जाता है |ऐसा लगता है की वैलेंटाइन डे  के दिन अगर कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका को उपहार ना दे | तो वो उससे प्यार नहीं करता है | और तो और पूरा का पूरा एक सप्ताह इस दिन को बना रखा है |एक दिन रोस डे , एक दिन चॉक्लेट डे , एक दिन टेडी डे बना रखा है | आप समझ सकते है की बाजार हमारे पे कितना हावी हो रहा है वो हमारे इमोशंस को भी मार्केट बना रहा है | वो निर्धारित कर रहा है आपके प्यार के पैरामीटर को | वो एक फीता लेकर खड़ा है | वो हमारे और आपके प्यार को आकर्षित बना रहा है और सजा रहा है केवल और केवल मार्केट में बेचने के लिए और फायदे कमाने के लिए |प्यार करने की लिए कोई दिन मुकर्रर किया जाता है क्या ? ये तो ‘एक एहसास’ है जो हर दिन और हर इंसान की अंदर होना चाहिए | सबका हरदिन वैलेंटाइन डे होना चाहिए | प्यार एक बंधन है जो हमे मुक्त करता है |हमे कुछ भी एक दूसरे कहने की लिए -कुछ भी सुनने की लिए -एक दूसरे को कुछ भी देने की लिए -एक दूसरे को अच्छे से समझने की लिए | प्यार हमें त्याग सिखाता है |

“कभी – कभी न आये तेरा ख्याल तो अच्छा है , कठिन है ये सवाल पर ये सवाल अच्छा है |”

‘ अनंत ‘

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