सफलता और असफलता क्या है ?

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असफलता

सफलता और असफलता क्या है ?

सफलता और असफलता केवल एक सोच है | मैं आपको बताना चाहता हूँ की हम अपने सोच से ही सफल और असफल होते है | कोई कितना सफल है और कोई कितना असफल है आप कैसे तय कर सकते हो |

आये जानते है की सफलता क्या है –  मैं इसकी शुरुआत महात्मा गाँधी से करना चाहूंगा -एक नवयुवक जो लंदन से बेरिस्टर की पढ़ाई की है और जो परिवार से सम्पन्य भी है वो बहुत ही अच्छा वकील बन सकता था और ढेर सारा पैसे कमा सकता था | और कई लोगों उस समय ऐसा किया भी होगा और वो सफल भी होंगे | कई लोग होंगे जो उस पढ़ाई का दुरपयोग करके भी सफल कहे गए होंगे लेकिन महात्मा गाँधी के लिए बेरिस्टर की पढ़ाई करना ही खुद के अधिकारों को समझना और दूसरों को समझाना था | और इसीलिए वो अपने ही नहीं दूसरे देशों में भी जाने जाते है | स्थिति क्या है उसपे सफलता और असफलता बहुत ही निर्भर करती है |

सफलता और असफलता के मायने

पानी –

आजकल पानी के लिए बहुत ही हो -हल्ला हो रहा है -पूरी पृथ्वी पे ७४ प्रतिशत पानी है फिर भी क्योकि हम उसमे से ज्यादा पानी प्रयोग नहीं कर सकते है | अगर हम रेगिस्तान में है और वह हमे बहुत जोर से प्यास लगी है और हमे कही से एक बून्द भी पानी मिलता है या हम कही से उसे निकालते है फिर वही हमारी सफलता है |फिर अगर हम ऐसी जगह पे है जहा पानी का भंडार हो और कोई भी शख्स वही पानी मिलता है वह उसका सफलता का कोई महत्व नहीं है | सफलता और असफलता पैमाना परिस्थिति और स्थिति पे निर्भर करता है | इसलिए आप किस पृष्ट्भूमि से आते है ये बहुत ही निर्भर करता है |

महिलाये –

हमारे देश में महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है और फ्रीडम कम है उनको क्योकि समाज ऐसा है | हमारे देश में कोई महिला अगर पढ़ती और नौकरी करती है तो उसका सफलता के पैमाने से जोड़कर देखते है | और पेपर में जगह भी मिलते है और वही विकसित देशों में लड़किया बहुत कुछ करती है लेकिन इस चीजों को पेपर में जगह नहीं मिलती है | सवाल सफलता का नहीं है उसकी परिस्तिथि का है |

निष्कर्ष:

इसलिए ही हम किसी की सफलता को कम करके नहीं आक सकते है | परिवर्तन समाज का नियम है और हम हर एक पल बदल रहे है | आप कई वीडियो में देखते होंगे की सफलता के १० मन्त्र या १० सूत्र ये सब बकवास बातें है | हम किसी से प्रेरणा ले सकते है लेकिन उसे कॉपी नहीं कर सकते है | क्योकि हम उसकी पृष्ट्भूमि से अवगत नहीं है | मैं आपको बस ये बताना चाहता हूँ की सफलता भी अस्थायी होती है |और ये समाज –पृष्ट्भूमि -स्थिति पे निर्भर करती है |और ये नहीं है की हम आप और सब इस पृष्ट्भूमि में जकड़े हुए है बस हो सकता है थोड़ा या ज्यादा |

इसलिए चुनाव बहुत जरुरी की हम क्या चुनते -सफलता और असफलता तो बाद में आयेगी|इसलिए आप सबसे पहले अपने पृष्ट्भूमि से बाहर निकलने और अपने सोचने की क्षमता को विकास को बढ़ाना चाहिए |

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