औरतों ने साड़ी कब पहनना शुरू किया और साड़ी का इतिहास क्या है ?

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साड़ी

कपडे से साड़ी तक विकास –

साड़ी हमारे देश में बहुत प्रचलित है | और हमारा देश कई राज्यों में बटा है इसलिए हर जगह की साड़ी का अलग -अलग नाम से जानी जाती है | परिधान तो वैसे शरीर को ढकने के काम आते है | सबकी पता है की समाज के विकास कैसे हुआ | विज्ञानं की धरणा अलग है और धर्म की अलग है | विज्ञानं कहता है की सबसे पहले एक कोशकीय जंतु आये और फिर जेक धीरे -धीरे मनुस्य का विकास हुआ |और हमारे पूर्वज बंदर कहे जाते है | और पहले हमारे शरीर बहुत बाल हुआ करते थे जो हमरी रक्षा करते थे | हर तरह के आपदा से बचने के लिए लेकिन धीरे -धीरे से हमने विकास किया और वो ख़त्म हो चले | मेरा अपना मत है की जैसे -जैसे हमने प्रगति की हमरे अंदर हर भावनाये आयी | हमरे अंदर लजा , शर्म . क्रुद्ध , दुःख सब तरह की भावनाये पैदा हुई | तो हमे अपने शरीर को ढकने के लिए भी सोचा | पहले कपडे का विकास नहीं हुआ था तो हम पेड़ के पत्तों से खुद को ढकना सीखा | और धीरे -धीरे समाज विकसित होता गया हमारा पहनेने का तरीका बदलता गया | सबसे पहले लोग कपडे खुद पे रख लिया करते थे और बाद वो सील कर मिलने लगी |

साड़ी का सबसे पहले उपयोग –
साड़ी

इस परिधान का उल्लेख ऋगवेद में मिलता है जब भी यग या हवन होता था तो महिलाओं को साड़ी ही पहन के उपस्थित रहना होता था |वैसे हमारे महाकाव्यों में महाभारत में भी साड़ी का उल्लेख है | इसलिए हम ये कह सकते है की महाभारत काल से ही हम साड़ी धारण करते हुए आ रहे है | एक वाकया है | जब द्रोपती का चिर हरण हो रहा था तो केसव ने उनकी साड़ी बहुत लम्बी कर दी थी जिससे वो ख़तम ही नहीं हो रही थी |’नारी विच साडी है की साडी ही की नारी है’ इसका अर्थ  है की नारी के बीच में साड़ी है की नारी ही साड़ी है

भारत में साड़ी पहनने के अलग -अलग तरीके –

भारत में ये बहुत प्रचलित है | हर जगह की साड़ी अलग होती है | ये विश्य के सबसे लम्बे परिधान है और ये भारतीयता का सूचक है | भारत के अलग हिस्सों में इसके अलग नाम है | भारत में विवाहित महिला रंगीन साड़ी पहनती है और विधवा जिसके पति नहीं रहते है वो सफ़ेद साड़ी पहनती है | भारत में साड़ी संस्कृति से जुडी है यहाँ के भगुलिक आधार पे साड़ी पहनना का तरीका है | उतर भारत में सभी लोग उल्टा पल्ला लेते है जबकि गुजरात में लोग सीधा पल्ला लेते है | दक्षिण भारत में साड़ी को लोग स्कर्ट जैसे पहनते है और एक चुन्नी लेते है | वही महराष्ट्र में महिलाये साड़ी को धोती के रूप में पहनते है |

भारत में हर राज्य की अलग साड़ी –

भारत में साड़ी हर राज्य की अलग नाम से जानी जाती है | मध्यप्रदेश के साड़ी – माहेश्वरी , चंदेरी  असम की मूंगा रस्म , उड़ीसा की बोमकई , राजस्थान के बंधेज , गुजरात की गठोडा ,बिहार की तसर , काथा, दिल्ली की रश्मि साड़ियां ,महारष्ट्र की पठाणी ,तमिलनाडु की कांजीवरम ,बंगाल की बालू क्षेरी, उत्तर प्रदेश की वाराणसी  | भारत में ये परिधान बहुत पहना जाता है | और विदेशी भी इससे बहुत आकर्षित होते है | और अब तो ट्रैंड ही बदल गया है एक से एक डिज़ाइनर साडिया बाजार में उपलब्ध है | जो बहुत महंगी ब्रांड की है |इसे भारतीय परिधान के रूप में ही जाना जाता है | ये पुरे वर्ल्ड में प्रसिद्ध है | इसको पहनने के बाद महिलाये बहुत ही सूंदर लगती है |

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