सेक्यूलरिज़्म:धर्मनिरपेक्षवाद या छलावा –

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सेक्यूलरिज़्म

सेक्यूलरिज़्म शब्द का सबसे पहले प्रयोग –

धर्मनिरपेक्षवाद या सेकुलरिज्म शब्द जैसा की नाम से ही जान पड़ता है |(सेक्यूलरिज़्म) शब्द का पहले-पहल प्रयोग बर्मिंघम के जॉर्ज जेकब हॉलीयाक ने सन् 1851 के दौरान, अनुभवों द्वारा मनुष्य जीवन को बेहतर बनाने के तौर तरीक़ों को दर्शाने के लिए किया था। उनके अनुसार, “आस्तिकता-नास्तिकता और धर्म ग्रंथों में उलझे बगैर मनुष्य मात्र के शारीरिक, मानसिक, चारित्रिक, बौद्धिक स्वभाव को उच्चतम संभावित बिंदु तक विकसित करने के लिए प्रतिपादित ज्ञान और सेवा ही धर्मनिरपेक्षता है|सेक्युलर (secular)जो शब्द है लैटिन शब्द सेकुलो से बना है जिसका अर्थ होता है -‘इन दी वर्ल्ड ‘ हुआ यूँ की इसका भी एक इतिहास है कैथोलिक ईसाइयों में संन्यास लेने की परम्परा प्रचलित है।इसके अनुसार संन्यासी पुरुषों को मौंक(Monk) और महिलाओं को नन (Nun) कहा जाता है।लेकिन जो भी व्यक्ति सन्यास लिए बिना ही समाज में रहते हुए सन्यासी के धार्मिक कार्यों में मदद करते थे उन्हें ही सेक्युलर कहा जाता था |

15 वी सदी में जो चर्चों के प्रमुख पोप हुआ करते थे और उन्हें असीमित अधिकार प्राप्त थे |उस समय किसी राजा को हटाना या नियुक्त करने का अधिकार पोप को होता था | उन्हें बहुत ताकतवर समझा जा सकता था | किसी को भी धर्म से बहिष्कृत करने तक के अधिकार प्राप्त थे। यहाँ तक कि पोप की अनुमति के बिना कोई राजा शादी भी नहीं कर सकता था।इंग्लैंड का राजा अपनी रानी को तलाक और एक विधवा से शादी करने चाहते थे |उनका नाम हैनरी था |और पोप ने उन्हें को धर्म से बहिष्कृत कर दिया।इस पर नाराज़ होकर हेनरी ने अपने राज्य इंग्लैंड को पोप की सता से अलग करके ‘चर्च ऑफ़ इंग्लैंड “की स्थापना कर दी|

हैनरी का सेपरेशन ऑफ़ चर्च एंड स्टे-

हैनरी ने 1534 में इंग्लैंड के संसद एक कानून पास कराया |सेपरेशन ऑफ़ चर्च एंड स्टेट नाम से जाना जाता है |जिसके अनुसार चर्च न तो राज्य के कामों में हस्तक्षेप कर सकता था और न ही राज्य चर्च के कामों में दखल दे सकता था। इस चर्च और राज्य के अलगाव के सिद्धांत को उसने “सेकुलरिज्म(Secularism)” का नाम दिया|बाद में जार्ज जाकोब हालियैक 1851 ने इस शब्द प्रयोग चर्च की नीतियों से अपने मतभेद प्रकट करने के लिए किया |सेक्युलर शब्द का कुछ मिलता-जुलता या अनुवाद “लौकिक” हो सकता है। सेक्युलर के लिए लौकिक शब्द हिंदी में प्रचलित है। वास्तव में सेक्युलर शब्द के लिए हिंदी में अभी कोई उपयुक्त शब्द नहीं निकल पाया है।

सेक्यूलरिज़्मभारत और सेक्यूलरिज़्म-

भारत में अनेक राजनीती दल सेक्युलिस्म को एक हथियार के तरह प्रयोग करने लगे केवल अपने फायदे के लिए |आज़ादी के बाद भारत और पाकिस्तान अलग हो गये | पाकिस्तान ने खुद इस्लामिक देश घोषित किया और भारत ने खुद को सेक्युलर |श्री जवाहरलाल नेहरु ने 5 अगसत, सन् 1954 के भाषण में इसका और स्पष्टीकरण करते हुए कहा था “हम अपने राज्य को शायद धर्मनिरपेक्ष कहते हैं। शायद “सेक्युलर” शब्द के लिए धर्मनिरपेक्ष शब्द बहुत अच्छा नहीं है। फिर भी इससे बेहतर शब्द न मिलने के कारण इसका प्रयोग किय गया है। इसका अर्थ है धार्मिक स्वतंत्रता, अपनी अंतरात्मा की प्रेरणा के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता। इसमें उन लोगों की भी स्वतंत्रता सम्मिलित है जो किसी धर्म को नहीं मानते। स्पष्टत: इसका यह मतलब नहीं है कि यह एक ऐसा राज्य है जहाँ पर धर्मपालन को निरुत्साहित किया जाता है।

इसका मतलब है कि प्रत्येक धर्म के अनुयायियों को धर्मपालन की पूरी स्वतंत्रता है, बशर्ते वे दूसरे के धर्म में या हमारे राज्य के मूल सिद्धांतों में हस्तक्षेप न करें। इसका मतलब है कि धर्म की दृष्टि से जो अल्पसंख्यक हैं वे इस स्थिति को स्वीकार करें। इसका यह भी तात्पर्य है कि बहुसंख्यक लोग इस दृष्टिकोण से इसका पूरी तरह से महत्व समझें, क्योंकि बहुसंख्यक होने के नाते और दूसरे कारणों से भी उनका प्रभाव अधिक है। अत: उनकी जिम्मेदरी हो जाती है किसी भी रूप में अपनी स्थिति का इस तरह से प्रयोग न करें जिससे हमारे धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों(सेक्यूलरिज़्म) के पालन में बाधा पहुँचे।भारतीय परिप्रेक्ष्य में धर्मनिरपेक्षता को लेकर आरोप लगाया जाता है कि यह पश्चिम से आयातित है।अर्थात् इसकी जड़े/ उत्पत्ति ईसाइयत में खोजी जाती हैं|यह वोट बैंक की राजनीति को भी बढ़ावा देती है।

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