आये जाने छोटे कपडे या छोटी सोच से महिलाओं का होता है उत्पीड़न ?

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सोच

छोटी सोच से महिलाओं का होता है उत्पीड़न ?

हमारा समाज में हर वर्ग का प्रतिनिधत्व होना चाहिए | लेकिन आये दिन लोग महिलाओं के कपड़ों पे कमेंट करते है और बताता की इनके छोटे कपड़ों की वजह से बलात्कार होते है | ये बहुत बड़ा कारन है ज़्यदा बलात्कार  के होने के बहुत लोगों की ऐसी सोच है | ये देश ऐसा है जहा नारी को लक्ष्मी मानकर पूजा जाता है | ऐसी परम्परा रही है | इधर बीच आपने कई समाचार सुना होगा -बच्चों का भी बलात्कार हो रहा है | इसे आप क्या कहेंगे | क्योकि ये क्रिया कपड़ों को देखकर नहीं लोगों के सोच या मानसिकता पे बहुत ज़्यदा निर्भर करती है | जहाँ कपड़ों का कोई महत्व नहीं है | कोई साडी पहने या फ्राक इससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है | मानसिकता ही बदलनी चाहिए |

समाज कैसा है ?

जहा भी बोल्ड समाज है वहाँ लोगों बोलने और कुछ कहने और कुछ भी पहनने की स्वतंत्रता है | जिससे समाज आगे बढ़ता है | असामनता भी इसका बड़ा कारण हो सकती है | असामनता कई तरह की होती है – लैंगिक असामनता , आर्थिक असामनता | इन असमानता की वजह से ही लोगों में कुंठायी आती है |
और आप जो भी बोलते है या पहनते है वो आपके पृष्ट्भूमि पे भी निर्भर करता है | पृष्ट्भूमि ये आर्थिक रूप से भी निर्धारित होती है| ये सचाई है की ये भारतीय समाज स्तरों में बटा है | निम्न स्तर , मध्यम स्तर , उच्च स्तर है | सबके अपने भाग है | और सोचने का तरीका और रहना के तरीका सब अलग होता है | ये पूर्णतया सच है | ये कुंठाये उत्पन करता है | ये जो खाई बढ़ती जा रही है | और समय के साथ हमारे पहनावे में भी परिवर्तन आता गया है |

भारतीय समाज में महिलाओं का पहनावा ?

पहले भी भारत के अलग -अलग जगह पहनावा था | कही महिलाये साडी तो कही सूट तो कही लुंगी पहना करती थी | और पहनावा तो जलवायु पे भी निर्भर करता है | पहले महिलाये इतनी स्वतंत्र नहीं थी | क्योकि वो ज्यादातर घर का ही काम करती थी | लेकिन अब समय बदल चूका है | महिलाये भी घर से बहार निकल रही है |

वो भी कामकाजी हो रही है  और अब तो वर्कप्लेस भी आपके कपडे निर्धारण करता है |क्योकि कोई महिला फूटबाल खिलाडी कोच है तो वो साडी पहन के बच्चों को फूटबाल नहीं सीखा सकती | कोई टीचर है तो उसका अपनी वेश-भूषा है | और सबसे पहले हमे स्वतंत्र का अधिकार मिला हुआ | जिसको जो पसंद है वो पहन सकता है | और इससे कोई क्राइम नहीं होता |

क्राइम या अपराध क्या सोच पे आधारित है ?

क्राइम या अपराध हमारे सोच पे निर्भर करता है | वो देश भी क्या जहा हम अपने पसंद के कपडे भी नहीं पहन सकते बस इसलिए की कोई क्या सोचेगा या कोई गन्दी नज़र से देखेगा | हमे ये सोचना चाहिए की लोगों का , अपने लड़को की सोच बदलू उनकी मानसिकता बदलनी चाहिए | इसलिए कहा गया है ‘ पैर में मोच और छोटी सोच’ से कोई भी आगे नहीं बढ़ सकता हूँ |

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