क्या वर्ल्ड कप में १९ साल की धावक हिमा दास की उपलब्धिया दब के रह गयी ?

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हिमा दास

क्या सच में क्या वर्ल्ड कप में  १९ साल की धावक हिमा दास की उपलब्धिया दब के रह गयी ?

जाने क्या हैं सच्चाई हिमा दास की –

क्रिकेट में भारतीय बोर्ड सबसे अमीर बोर्ड माना जाता है | और भारतीय क्रिकेट के खिलाडियों को सारी सुविधा मिलती है लेकिन फिर भी वो लोग सेमीफइनल से वापस लौटना पड़ा है | टीवी इंडस्ट्रीज और ऐड इंडस्ट्रीज भी इसको भुनाने में लगी थी |

जोर -शोर से प्रचार हो रहा था | मैच हो रहा था जो की बेसक एक खेल है लेकिन टीवी में और पेपर में ऐसा माहोल बनाया जा रहा था जैसे दो देशों के बीच युद्ध हो रहा है | आपने भारत और पाकिस्तान के खेल को देख कर अंदाजा लगा सकते है | किसी के हारने या जितने से इन्हे फर्क नहीं पड़ता है | ये बस लगे है अपने प्रोडक्ट बेचने में |

खेलों में विज्ञापन का प्रभाव –

और भारत फाइनल में नहीं पंहुचा तो बहुत सी कंपनी को करोड़ों का नुकसान हो गया है |और तो और इनकी पूरी जर्सी कंपनी की ऐड से भरी पड़ती है और कुछ खिलाडी तो ऐसे है की एक इन्निंग्स में ३ बैट का प्रयोग करते है बस कंपनी के ऐड करने के लिए और ज़्यदा से ज़्यदा पैसा कमाने के लिए |

इस सब बीच एक १९ साल की धावक हिमा दास की उपलब्धि दब के रह गयी | वो उड़न पारी गोल्ड पे गोल्ड जीतती रही है | मीडिया से लेकर किसी ने ध्यान नहीं दिया | और ११ दिन में ३ गोल्ड जीत डाला | असम की इस धाविका ने वो करके जो इससे पहले किसी ने नहीं किया |

हिमा दास कहा से आती है –

हिमा दास का जन्म ९जनवरी २००० में  असम राज्य के नगाव जिले के कांधुलीमारी गांव में हुआ था |इनके पिता जी का नाम रोनजीत दास और माता जी का नाम जोनाली दास है | वो चावल की खेती करते है और इनके ४ संताने है और उसमे हिमा दास सबसे छोटी है | बचपन से ही हिमा को खेलने का बहुत शौक था और ये फूटबाल लड़कों के साथ खेला करती थी और आगे उसमे ही अपना भविष्य देख रही थी |

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और नवद्या विद्यालय के शिक्षक समशुल के नज़र इनपे पड़ी और उन्होंने हिमा को धावक बनने की सलाह दी | समशुल नवद्या विद्यालय में पि -टी शिक्षक थे | और धीरे -धीरे इनकी दौड़ने में रूचि बढ़ने लगी और समशुल ने नगाव एसोसिएशन के गौरी शंकर राय से मिलाया | और हिमा फिर तेज़ी से आगे बढ़ती रही है |

पहले ये जिला स्तरीय प्रतियोगिता में खुद को साबित किया और कई गोल्ड जीता | और हिमा की प्रतिभा को देखकर धीरे -धीरे सबको आकर्षित कर रही थी | फिर ये गोवाहाटी गयी जो इनके घर से १४० किलोमीटर दूर था | पहले इनके घर वाले इन्हे वहाँ जाने से मना कर दिया था लेकिन बाद में मान गए | और यही हिमा दास नाम का सूरज का उदय हुआ |

हिमा दास की उपलब्धि –

हिमा दास ने २०० मीटर रेस में गोल्ड जीता | साथ ही साथ इन्होने वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भी गोल्ड जीता है था ४०० मीटर में भी गोल्ड जीता | पोलैंड में हिमा ने २०० मीटर रेस २३.६५ सेकंड में पूरा करके गोल्ड अपने नाम किया | और वो अभी बहुत ही कम उम्र की खिलाडी है |

ये ऐसी खिलाडी है जिनके पास कोचिंग के पैसे नहीं होते थे और इनका परिवार भी सक्षम नहीं था | इनके कोच ने इनकी आर्थिक मदद की | इसलिए जब भी किसी ऐसे खिलाडी का उदय होता है तो वो संघर्षों से पैदा होता है | ये १९ साल की लड़की गोल्ड जीतती ही आँखों में आशु आए जाता है और इसने अपने हाथों से तिरंगा फहराया है | हम क्रिकेट की शोर -गुल में हिमा को एकदम से भुला दिया था | असम की लड़की ११ दिन ३ गोल्ड ले आती है उसका नाम ही हिमा दास है |

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