क्या २०३० से २०५० तक वातारण परिवर्तन की वजह से २५०००० मृत्यु हर साल होगी ?

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वातारण

क्या २०३० से २०५० तक वातारण परिवर्तन की वजह से २५०००० मृत्यु हर साल होगी ?

वातावरण में परिवर्तन हर दिन हो रहा है | प्रदूषण दिनों -दिन बढ़ रहा है और इसका असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है | आबादी भी बढ़ रही है | और लोग ज्यादा से ज्यादा अपनी जिंदगी सरल बनाना की ओर अग्रसर है | और कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक चीजें प्रयोग कर रहे है | कभी -कभी पैसे ज्यादा होने की वजह से एक ही घर में लोग २ है और कार चार है | जिसे हर तरह की प्रदूषण बढ़ रहा है | पेड़ों को कटा जा रहे जिससे रिहायसी जगह बन सके | प्रदूषण तो ३ तरह के होते है जो जल -वायु -ध्वनि तीनो से बढ़ता है |

इसका असर हमारे वातारण पे जरूर पड़ेगा | जो की और भी बिमारियों के लिए अनुकूल होगा | और इसीलिए यूनाइटेड नेशंस सस्टेनेबल डेवेलॉपमेंट ने ३ लक्ष्य निर्धारित किया है जिससे एकदम से ख़त्म कर दिया जाये दुनिया से वो है -एड्स – टीवी – मलेरिया  | इनकी महामारी से दुनिया मुक्त हो जाये | वातारण के परिवर्तन से इन चीजें पे बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ेगा | और बहुत ज्यादा कठिन होगा फिर इनको जड़ से मिटाना |

जब प्रदूषण बढ़ेगा और तब वातावरण में कई तरह के बदलाव आएंगे – जैसे तापमान बढ़ेगा जो की मच्छरों के लिए अच्छा होता है | जिससे वो और ज्यादा पनपेंगे – जिससे मलेरिया  को ख़त्म करना जड़ से और भी मुश्किल हो जायेगा |और इसिलए ज्यादा तापमान जहा है -जैसे अफ्रीका में मलेरिआ ज्यादा प्रभाव छोड़ता है |

क्योकि अफ्रीका के देश पृथ्वी के हाई अलटीटूड पे है | और वातारण परिवर्तन का अप्रतक्ष्य प्रभाव टीवी और एड्स पे पड़ता है | और इसलिए वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने इन बिमारियों को २०३० से पहले पूरी दुनिया से ख़त्म करने की सोचा है |

जल है तो कल है-

आप सोच सकते हो जब भी कोई असमय -असमान्य परिवर्तन होता हैउसका प्रभाव कहा तक जाता है | हम उससे सीधे तो प्रभावित हो ही रहे साथ में हम अप्रतक्ष्य रूप से भी प्रभावित हो रहे है | इसलिए हमे इस ओर जरा ध्यान देने की जरुरत है | आप देख रहे हो जल संकट भी गहराता जा रहा है |

बस कहने से अब काम नहीं चलने वाला की – ‘जल है तो कल है ‘| हमे करके दिखाना होगा | जलवायु परिवर्तन होगा तब धीरे -धीरे ही सही  सब सबपे फरक पड़ेगा |अगर हम चाहते है की हमारी अगली -अगली पीढ़ी सब देख सके तो हमे चेतना होगा |

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