MiG एयरक्राफ्ट का नाम मिग क्यों पड़ा ?

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MiG एयरक्राफ्ट बूढ़ा शेर है –

आपके बताते हुए हर्ष होता है की हमारी सेना आज भी MiG एयरक्राफ्ट प्रयोग में लाती है | अभी जो जल्दी ही एयर स्ट्राइक हुआ था उसमे भी और पाकिस्तान के फाइटर प्लेन का जवाब देने के लिए हमने इसे प्रयोग किया था | और समय के साथ बहुत ही तुलना होती थी फाइटर प्लेन में की ये ज्यादा बेहतर या उससे ज्यादा अच्छा है |समय बदलता है साथ ही विकास होता है टेक्नोलॉजी बदलती है | लेकिन कुछ चीजें रहती है जो हमारे दिलो पे बहुत दिन तक राज करती है |

MiG (2)

लोग मिग को बूढ़ा शेर भी कहने लगे थे | और भारत भी नए एयरक्राफ्ट राफेल को पाने के लिए बहुत ही उत्तेजित था| लेकिन हम आज उसी मिग की बात करेंगे -जो कभी बहुत शानदार प्लेन में पूरी दुनिया में गिना जाता था | ये एक सोवियत संघ द्वारा निर्मित लड़ाकू विमान है |इसको 1939 में अर्टेम मिकेयन (M ) और मिखाइल गुरेविच(G ) ने बनाया था और जो बीच का I है उसका रशियन भाषा मतलब ‘ और ‘(and ) होता है और इसी के साथ इस फाइटर प्लेन का नाम MiG रखा गया |

मिग की खासियत –

मिग के खासियत ये है की इसमें इजी सर्विसिंग है और कम पैसे भी लगते है | और उस दौर का ये बेहतरीन फाइटर प्लेन था | मिग -9 पहला प्लेन था जो 1946 उड़ा|पहले ये सिंगल सीट था और सिंगल इंजन के थे | और इसमें समय के साथ बहुत सी चीजें जुड़ती गयी और ये खतरनाक बनता गया |रशियन ने इसके कई युद्धों में इस्तेमाल किया -जैसे विएतनाम युद्ध में , कोरियन युद्ध में वैगरह| फिर ये डबल इंजन वाले भी बनाये गये जिससे रूस को बहुत फायदा हुआ |और रूस ने दूसरे देशों को भी ये मिग बेचे -जिसमे भारत , पोलेंड और चीन है |

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