गंगूबाई काठियावाड़ी : फिल्म टीज़र से चर्चित आखिर गंगूबाई कौन है ?

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गंगूबाई

गंगूबाई काठियावाड़ी एक बायोपिक –

संजय लीला भंसाली की चर्चित फ़िल्म गंगूबाई काठियावाड़ी एक बार फिर सुर्खियों में है हो भी क्यों न 24 फरबरी 2021 का टीज़र रिलीज़ होते है वायरल हो गया है एक तो इस फिल्म में गंगूबाई काठियावाड़ी का किरदार आलिया भट्ट ने निभाया है।हम जैसा की जानते है की संजय लीला भंसाली बायोपिक बनाने के लिए जाने जाते है।वो पद्मावत और कई तरह के फिल्म बना चुके है।

लेकिन ये फिल्म उन फिल्मो से कुछ अलग दिखाई दे रही है। सब लोगों को जिज्ञासा है की आखिर इस फिल्म में क्या होगा और ये फिल्म किस कहानी पर आधारित है। आलिया का लुक और हाव -भाव देखकर ऐसा लगता है की ये एक महिला गैंगस्टर की कहानी है लेकिन हम आपकी जिज्ञासा शांत करते है।और आपको बताते है की आखिर गंगूबाई कौन थी।

गंगा से गंगूबाई बनने का सफर –

गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी था।उनका जन्म गुजरात के काठियावाड़ में हुआ था और वो वहीं पलीं-बढ़ीं थी।फिर ये सवाल ये आएगा की वो मुंबई कैसी पहुंची।आप धैर्य रखे आप को सब पता चल जायेगा।वो काठियावाड़ के सम्पन्न परिवार से थीं और परिवार के लोग पढ़े-लिखे थे और वकालत से जुड़े थे।गंगा (गंगूबाई )को रमणीकलाल नाम के एक अकाउंटेंट से प्यार हो गया था और उनका परिवार इस रिश्ते के लिए राज़ी नहीं था तो वो मुंबई भाग आयी उस रमणीकलाल के साथ लेकिन वो धोकेबाज़ निकला और कमाठीपुरा में उन्हें बेच दिया।

इसका पता लगने के बाद भी वो अपने घर नहीं लौट पायी।क्योकि उन्हें पता था की उनका परिवार अब उन्हें स्वीकार नहीं करेगा।इसलिए उन्होंने हालात को अपनाया और बतौर सेक्स वर्कर काम करने लगीं। जैसे-जैसे वक़्त गुज़रा,वो कमाठीपुरा रेड लाइट एरिया की प्रमुख बन गईं और इस तरह से वह पहले ‘गंगा’ से ‘गंगू’ बनीं और गंगू से ‘मैडम’ बन गयी।

ये फिल्म बुक -‘माफ़िया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ पर आधारित है –

ये 1960 के दशक में मुंबई के कमाठीपुरा में ‘वेश्यालय’ चलाती थीं ।फ़िल्म ‘माफ़िया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ नाम की किताब पर आधारित है,जिसे एस. हुसैन ज़ैदी और जेन बोर्गेस ने लिखी है।फिर उन्होंने अपना रुख चुनाव की तरफ भी किया और उसे भी जीता। गंगू सेक्स वर्कर से गंगूबाई काठेवाली बन गईं और काठेवाली दरअसल कोठेवाली से जुड़ा है कोठा का मतलब है वेश्यालय और कोठा की प्रमुख को कोठेवाली कहा जाता था और उनके नाम के साथ जुड़ा काठियावाड़ी यह भी दिखाता था कि उनको भले ही उनका परिवार छोड़ दिया था लेकिन वो अपने परिवार को नहीं छोड़ पायी थी।

गंगूबाई ने महिलाओं के शोषण के खिलाफ भी आवाज उठायी –

गंगूबाई बहुत संवेदनशील थी और 1960 -70 वो सभी सेक्स वर्कर के लिए उनकी माँ की तरह थी और उनका पूरा ख्याल रखती थी।उन्होंने बहुत सी ऐसी लड़कियों को उनके घर भेजा जिन्हे धोखे से यहाँ लाया गया था।वो इस काम से जुड़ीं महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी काफ़ी सजग थीं।उन्होंने उन महिलाओं के साथ हुए अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई और उन लोगों के ख़िलाफ़ भी क़दम उठाए,जिन्होंने इन महिलाओं का शोषण किया।

उनका यह नज़रिया था कि शहरों में सेक्स वर्कर्स के लिए जगह उपलब्ध कराई जानी चाहिए।गंगूबाई को बचपन में अभिनेत्री बनने का शौक था और वैसे ही वो लाइफस्टाइल जीना चाहती थी।गंगूबाई सुनहरे किनारे वाली सफेद साड़ी, सुनहरे बटन वाला ब्लाउज़ और सुनहरा चश्मा भी पहनती थीं और वो कार से चला करती थीं।गंगूबाई की मौत के बाद कई वेश्यालयों में उनकी तस्वीरें लगाई गईं और उनकी मूर्तियां भी बनाई गईं थी।

एक माफिया और गंगूबाई की झड़प क्यों हुई मशहूर –

कमाठीपुरा में एक पठान बारबार बतमीज़ी नहीं कर रहा था ।उसने उनके साथ ज़बर्दस्ती करने की कोशिश की, उन्हें चोट पहुंचाई और पैसे नहीं दिए। फिर इन्होने उसके बारे में पता किया तो पता चला की ये उस समय के माफिया करीम लाला के गैंग का है और वो करीम लाला से मिली और उसे अपनी दिक्कत बताया। और अगले दिन जब पठान आया तो उसकी बहुत जोरों से पिटाई हुई और करीम लाला उन्हें अपना बहन मानने लगा। जिससे लोगों के बीच उनका रुतबा और भी बढ़ गया।

प्रधानमंत्री नेहरू और गंगूबाई की मुलाकात-

एक बात और गंगूबाई के बारे में मशहूर है जब इन्होने उस समय के प्रधानमंत्री नेहरू जी से मिलने का वक़्त माँगा था। हुआ ये की कमाठीपुरा में सेंट एंथनी गर्ल्स हाई स्कूल शुरू होना था और वेश्यालय को बंद करना था ऐसी सरकार सोच रही थी।इस फ़ैसले से कमाठीपुरा में क़रीब एक सदी से काम कर रही महिलाओं पर बुरा असर पड़ने वाला थावैसे तो इसकी कोई पुष्टि नहीं है की वो नेहरू जी से मिली थी लेकिन लोग कहते है की उनकी औपचारिक मुलाकात हुई थी और नेहरू जी भी उनके स्पष्ट विचारों से बहुत प्रभावित थे।

प्रधानमंत्री ने जब ख़ुद इस पर हस्तक्षेप किया तो कमाठीपुरा से वेश्याओं को हटाने का काम कभी नहीं हो पाया।देखिये बात ये नहीं की इंसान बुरा है या अच्छा है ये तय करने की बात है की आप किस धरातल पर रहकर सोचते है। रही बात जब हम फिल्म देखंगे तो हमे नया देखने को मिलेगा। आपको हमारे आर्टिकल पसंद आते है तो हमे अपना समर्थन दे।

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