मोदी का भूमि पूजन और भारतीय सेक्युलरवाद –

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मोदी का भूमि पूजन और सेक्युलरवाद –

सेक्युलरवाद ( secularism ) के भारतीय संस्करण को लेकर हमेशा से ही बहस होती रही है | बौद्धिक हलकों से लेकर राजनीति में और राजनीति से लेकर आमजन समुदाय में अक्सर ये बहस विवादों का रूप भी ग्रहण कर लेती है | भारत में तो सेक्युलर ( पंथ निरपेक्ष ) शब्द की ‘सवैधानिकता ‘ को लेकर भी कुछ लोग सवाल उठाते रहे है क्योंकी ये शब्द ‘ समाजवाद ‘ (socialism ) के साथ 1976 में सविधान में जोड़ा गया था जब देश में ‘आपातकाल’ लागु था और नागरिक अधिकार स्थगित थे | प्रधानमंत्री मोदी के भूमि पूजन में इस तरह शामिल होने तथा राममंदिर निर्माण शिला रखने के बाद ‘ सेक्युलरवाद ‘ को लेकर एक बार फिर बहस जारी है | कुछ लोगों का कहना है कि अयोध्या में प्रधानमंत्री ने केवल राममंदिर कि नीव नहीं रखी है | उन्होंने हिन्दू राष्ट्र की नीव रखी है |हकीकत चाहे जो हो ! लेकिन एक बात तो तय है कि भारतीय राष्ट्र -राज्य एक गंभीर परिवर्तन के दौर से गुज़र रहा है  | ये यूँही नहीं है कि कुछ विश्लेषक जिसमे संघ के नीतिज्ञ भी शामिल है पांच अगस्त (5th august ) को भारत की ‘ सांस्कृतिक स्वतंत्रता ‘ का दिन बताते है जो भारत की राजनैतिक स्वतंत्रता ( 15  august ) के जितना ही महत्वपूर्ण है |

जहाँ तक प्रश्न सेक्युलरवाद (secularism) का है तो सेक्युलर (secular ) अर्थ इह लौकिकता से जा कर मिलता है |इसी इह लौकिकता से सम्बंधित विचारधारा या विश्व -दृष्टिकोण है सेक्युलरवाद (secularism ) .सेकुलरवादी विचारधारा के अनुसार लोक या संसार की व्याख्या करने के लिए किसी पारलौकिक कारण की कोई आवश्यकता नहीं है | सरल शब्दों में उदहारण के तौर पर ‘ कोरोना ‘ त्रासदी के पीछे कोविड -19 विषाणु है न की कोई परलौकिक शक्ति | चेचक के बारे में भी यही कहा जा सकता है | सेक्युलरवाद का मानना है कि है की सामाजिक और सांसारिक चुनौतियों का सामना सामाजिक और सांसारिक संसाधनों द्वारा प्रभावी रूप से किया जा सकता है | यथा भारत में आकस्मिक दुर्घटनाओं में सर्वाधिक मौते होती है |सेकुलरवादी समझ कहती है कि यतायात कि बुनियादी व्यवस्था को बेहतर बनाकर , यतायात सबंधी नियमो का शक्ति से पालन करके और चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाकर दुर्घटना जनित मौतों पे काबू पाया जा सकता है |

इन सारे उपायों के बगैर चाहे कितनी भी दुआ -पूजा कि जाये दुर्घटनाये को नहीं रोका जा सकता | गरीबी , वचना जैसी तमाम सामाजिक चुनौतियों के संदर्भ में भी सेक्युलरवाद का एप्रोच सांसारिक ही है | वैज्ञानिक भाव और राज्य तथा राजनीति से धर्म का अलगाव इसी वजह से सेक्युलरवाद का अभिन्न अंग है |

जो लोग आज ये बात कर रहे है कि भारत में सेक्युलरवाद दम तोड़ रहा है | और इसका सारा दोष मोदी -शाह और संघ -भाजपा को जाता है उन्हें कुछ और गंभीर सवालों पर भी विचार करना चाहिए | 70 वर्षों तक भारत में तथाकथित सेक्युलर दलों ने हकूमत की किन्तु उन्होंने कभी भी भारतीय जनमानस में वैज्ञानिक व् तार्किक समझदारी ( scientific and logical understanding ) की अभिवृद्धि के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया | इन्होने कभी भी प्रगतिशील सांस्कृतिक अभियान ( progressive cultural campaign ) नहीं चलाया और न ही आम जनता और विशेषकर छात्रों के भीतर सवाल करने की आलोचनात्मक क्षमताओं का ही विकास होने दिया |

ये सब कुछ सचेतन किया गया | जनता का तार्किक , प्रगतशील और वैज्ञानिक सोच से लैस होने का अर्थ न केवल हुक्मरानो (तात्कालिक ) को खतरा था जनता के असहज कर देने वाले सवालों से बल्कि अंततः अपनी सत्ता ही हमेशा के लिए खो देने का |

इसी लिए सर्वप्रथम तो सेक्युलरवाद को कथित सेक्युलर दलों ने सर्वप्रथम पंथ निरपेक्ष या धर्मनिरपेक्षता तक निम्न यानी (degrade ) किया और उसके पश्चात उसको और निम्न करके अल्प्शंख्यकों विषेशकर मुस्लिमों के वोट को प्राप्त करने का एक हथियार बना डाला | सेक्युलरवाद जैसी व्यापक विचारधारा को ‘ मुसलमानो ‘ को एक वोट बैंक के रूप में संगठित करने के लिए प्रयोग किया गया | अ.ज .ग .र , MY , जय भीम -जयमीम कांग्रेस का बी ऍम सी समीकरण वैगरह इसी प्रकार के धर्म निरपेक्ष प्रयोगों की उपज थी |

कालान्तर में इस ‘ चुनावी धर्मनिरपेक्षता ‘ की सीमाएं और खुल कर सामने आने लगी | मुस्लिम वोटों के लिए इसने मुस्लिम कठमुल्लों के सामने घुटने टेकने सुरु कर दिया |

80 के दशकों का सहबानो मामला हो , या सलमान रुश्दी की किताब द सेटेनिक वर्सेज़ पर प्रतिबंध का, राजीव गाँधी सरकार ने कठमुल्लों की धमकिया के समक्ष पूर्णतया समर्पण ही कर दिया था |रही सही कसर राजीव गाँधी ने संतुलन बनाने के लिए 89 में बाबरी मस्जिद का ताला खुलवा कर पूरी कर दी |

वस्तुतः राजीव गाँधी के बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाने से लेकर मोदी के राममंदिर – शिलन्यास तक इतिहास का एक चक्र पूरा हो चला है | अब ‘ धर्म निरपेक्षता के चैम्पियन दल’ हिंदुत्व ‘ की रेलगाड़ी पर सवार हो चुके है , लेकिन वो भूल रहे है कि इस गाडी के इंजन  R . S .S और B J P है |

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