हिजाब:ईरान का फरमान महिला कार्टून को भी पहनना पड़ेगा हिजाब –

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हिजाब

हिजाब एनीमेशन महिला करेक्टर पर भी –

दुनिया की बहुत सी संस्कृतियों में औरतों को अपना सिर और बाल ढककर रखने की बात कही जाती है और इस्लाम में औरतों को अपने पिता और पति के अलावा अन्य सभी आदमियों के सामने खुद को ढककर रखने की बात कही जाती हैं । ऐसे में औरतें खुद को ढकने के लिए एक खास किस्म का परिधान इस्तेमाल करती हैं।भारत, पाकिस्तान, ईरान, इराक, अमेरिका, इंग्लैंड समेत पूरी दुनिया में बहुत सी मुस्लिम महिलाएं सिर से पांव तक एक बड़ा सा कपड़ा ओढ़ती हैं जिसे हिजाब कहा जाता है।

लेकिन अभी हाल में ईरान में जो फरमान जारी हुआ हैं उसकी कई जगह आलोचना हो रही हैं हुआ यूँ की ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली ख़ामेनई से ईरान की न्यूज़ एजेंसी के एक पत्रकार ने पूछा की -”आप क्या मानते हैं की एनीमेशन करेक्टर के लिए हिजाब जरुरी होना चाहिए ” इस प्रश्न का जवाब देते हुई ईरान के सुप्रीम लीडर ने कहा की -” यूँ तो परिकल्पित चीजें में हिजाब की जरुरत नहीं होती लेकिन हिजाब नहीं पहिनने से जो असर हो सकता हैं उसके देखते हुए एनीमेशन फिल्मो में भी हिजाब होना चाहिए”।

कोई भी व्यक्ति क्या पहने क्या न पहने उसके लिए तो स्वत्रन्त्र होना चाहिए –

लेकिन ईरान के वो लोग जो इन चीजें की आलोचना कर रहे हैं उनका मानना हैं की यातुल्लाह अली ख़ामेनई ये सोचकर दर रहे हैं की जो भी लड़किया कार्टून देखेंगी वो आगे चलकर हिजाब पहनने से इंकार कर सकती हैं। सबके अपनी अपनी राय हैं। लेकिन किसी भी प्रगतशील समाज में इस तरह की सोच रखना ही एक तरह से अपराध हैं। क्योकि कोई भी व्यक्ति क्या पहने क्या न पहने उसके लिए तो स्वत्रन्त्र होना चाहिए। कोई भी सोच उत्पन्य करने से पहले उससे प्रभावित होने वाले लोगों की राय भी जरुरी हैं और तो और पूरी दुनिया को देखते हुए आपको खुद में ये बदलाव लाना चाहिए। मेरे ये मानना ये हैं की किसी अहम् अहदो पर बैठे हुए शख्स को इस तरह के विचार नहीं प्रकट नहीं करने चाहिए। महिलाये अंतरिक्ष तक पहुंच गयी और आप हिजाब और घूंघट में अटको हो।

हिजाब का शाब्दिक अर्थ –

मॉडर्न इस्लाम में हिजाब का अर्थ का पर्दा और कुरान में हिजाब का ताल्लुक कपड़े के लिए नहीं, बल्कि एक पर्दे के रूप में किया गया है जो औरतों और आदमियों के बीच हो।कुरान में मुसलमान आदमियों और औरतों दोनों को ही शालीन कपड़े पहनने की हिदायत दी गई हैं । यहां कपड़ों के लिए खिमर (सिर ढकने के लिए) और जिल्बाब (लबादा) शब्दों का जिक्र है हिजाब के अंतर्गत औरतों और आदमियों दोनों को ही ढीले और आरामदेह कपड़े पहनने को कहा गया है, साथ ही अपना सिर ढकने की बात कही गई है।

बुर्का-

भारत में अक्सर मुसलमान औरतों द्वारा पहने जाने वाले काले लबादे जैसी पोशाक को हम बुर्का कह देते हैं। दरअसल बुर्का उससे कुछ अलग होता है नकाब का ही अगला स्तर बुर्का है जहां नकाब में आंखों के अलावा पूरा चेहरा ढका होता है, बुर्के में आंखें भी ढकी होती हैं।आंखों के स्थान पर या तो एक खिड़कीनुमा जाली बनी होती है या कपड़ा हल्का होता है जिससे आर-पार दिख सके ।इसके साथ ही पूरे शरीर पर एक बिना फिटिंग वाला लबादा होता है। यह अक्सर एक ही रंग का हो होता है जिससे गैर-मर्दों को आकर्षित ना करे।

अल-अमीरा-

यह दो कपड़ों का सेट होता है एक कपड़े को टोपी की तरह सिर पर पहना जाता है और दूसरा कपड़ा थोड़ा बड़ा होता है जिसे सिर पर लपेटकर सीने पर ओढ़ा जाता है।

अबाया-

यह वो पोशाक होती है जिसे भारत में बुर्का कहते हैंदरअसल मिडिल ईस्ट में इसे अबाया कहा जाता है यह एक लंबी ढकी हुई पोशाक होती है जिसे औरतें भीतर पहने किसी भी कपड़े के ऊपर डाल लेती हैं और इसमें सिर के लिए एक स्कार्फ होता है जिसमें सिर्फ बाल ढके होते हैं और चेहरा खुला होता है अब फैशन के हिसाब से ये बहुत से रंगों का आने लगा है।

कई तरह के बुर्खा कई तरह के हिजाब हैं जिनका काम हैं बस शरीर को ढक सके।कभी कोई पहनावा उस देश के जलवायु के हिसाब से डिज़ाइन किया गया हैं। ऐसा लगता हैं क्योकि अगर आप कुछ बारीक़ चीजें पर नज़र डाले तो सऊदी अरेबिया जैसे देशों महिलाओं और वह के पुरषों के पहनायों में कोई ज्यादा फरक नहीं होता हैं क्योकि वहाँ रेतीली भूमि हैं और वहाँ गर्मी भी खूब पड़ती हैं जिसे इन पहनायों को वहाँ की जरुरत भी कह सकते हैं। लेकिन हर चीज के बावजूद आप किसी की स्वतंत्रता पर पाबंदिया इस तरह से नहीं लगा सकते हैं। मैंने ये आर्टिकल ये सोच के लिखा हैं की आप समझे लोग कहा तक सोच रहे हैं और आपको मैंने कुछ बेसिक हिजाब के बारे में भी अवगत कराया हैं।और बात आप इसपे सोचियेगा जरूर।

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